जन-जागरण लेख समाज साहित्य भाषा-विज्ञान में साम्राज्यवादी षड्यंत्रों से सावधान ! July 12, 2016 / July 12, 2016 by मनोज ज्वाला | 1 Comment on भाषा-विज्ञान में साम्राज्यवादी षड्यंत्रों से सावधान ! मनोज ज्वाला यूरोप के रंग-भेदकारी औपनिवेशिक साम्राज्यवादियों ने सम्पूर्ण विश्व, विशेष कर भारत पर अपना दबदबा कायम रखने और जबरिया उसका औचित्य सिद्ध करने तथा स्वयं को सर्वोपरी स्थापित करने के लिए एक ओर उपनिवेशित देशों की ऐतिहासिक सच्चाइयों व सांस्कृतिक विरासतों एवं सामाजिक संरचनाओं को तदनुरुप तोड-मरोड कर विकृत कर दिया , वहीं दूसरी […] Read more » Featured भाषा विज्ञान साम्राज्यवादी षड्यंत्रों से सावधान !
लेख साहित्य राणा उदयसिंह, जयमल और फत्ता की वीरता और मुगल बादशाह अकबर July 12, 2016 / July 12, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on राणा उदयसिंह, जयमल और फत्ता की वीरता और मुगल बादशाह अकबर राकेश कुमार आर्य अकबर के शासनकाल को इतिहास में 1556 से 1605 ई. के मध्य माना गया है। इस काल में दिल्ली और चित्तौड़ की वीरता और हमारे वीर योद्घा महाराणा प्रताप का बार-बार उल्लेख होता है। अकबर के काल में चित्तौड़ का किला ही हमारे शौर्य और प्रताप का वह दुर्ग बन गया था, […] Read more » Featured जयमल और फत्ता की वीरता मुगल बादशाह अकबर राणा उदयसिंह
लेख 11 जुलाई : विश्व जनसंख्या दिवस July 11, 2016 / July 11, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी दुनिया में हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का महत्त्व तेजी से बढ़ती जनसंख्या से सम्बन्धित बिन्दुओं , चिन्ताओं तथा सम्भावनाओं पर सारी दुनिया के विकसित तथा विकासशील देशों के लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। पहली बार यह कार्यक्रम सन् 1987 में मनाया गया […] Read more » 11 जुलाई : विश्व जनसंख्या दिवस Featured World Population Day जनसंख्या नियंत्रण
साहित्य खिलाड़ियों की मस्ती और सुल्तान का गुणगान…!! July 11, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा समय , पहर या दिन कैसे बीत जाते हैं पता ही नहीं चलता। अब देखिए देखते – देखते एक सप्ताह बीत गया। इस बीच हमने शांति की तलाश में भटक रही दुनिया को और अशांत होते देखा। आतंकवाद और कट्टरतावाद का दावानल उन देशों तक भी पहुंच गया, जो अब तक इससे […] Read more » Featured खिलाड़ियों की मस्ती सुल्तान सुल्तान का गुणगान
कला-संस्कृति लेख साहित्य संस्कृति पर हमला हो चुका है July 7, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य इस्लाम और ईसाइयत इन दोनों ने भारत में आकर इस देश की संस्कृति को मिटाने का हर संभव प्रयास किया। यदि यह क्रम बीते कल की बात हो गयी तो हम भी इसे ‘गड़े मुर्दे उखाडऩे’ की नीति मानकर छोड़ देते। किंतु दुर्भाग्य से यह क्रम आज भी थमा नही है। जो […] Read more » Featured इस्लाम और ईसाइयत राष्ट्रीय संस्कृति पर घातक प्रहार शिक्षा पर विदेशी प्रभाव संस्कृति पर हमला
कविता साहित्य कविता : खुशियाँ July 5, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment ये चंद घड़िया ही तो है, जो हमें अनगिनत खुशियाँ देती हैं। छोटी-छोटी बातें ही हमें यादगार पल देती है । चलती तेज हवाए देती हमे मंजिल का पता वक्त चला जा रहा उम्मीद का सहारा दिए । अपनों को खुश देखना , यही आस लगा तुम चलो या हम चले “दोनों” रास्ते पर […] Read more » खुशियाँ
व्यंग्य साहित्य भूखे को भूख, खाए को खाजा…!! July 4, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा भूखे को भूख सहने की आदत धीरे – धीरे पड़ ही जाती है। वहीं पांत में बैठ जी भर कर जीमने के बाद स्वादिष्ट मिठाइयों का अपना ही मजा है। शायद सरकारें कुछ ऐसा ही सोचती है। इसीलिए तेल वाले सिरों पर और ज्यादा तेल चुपड़ते जाने का सिलसिला लगातार चलता ही […] Read more » खाए को खाजा भूख भूखे को भूख
लेख साहित्य दक्खिन का दर्द July 2, 2016 by संजय चाणक्य | Leave a Comment संजय चाणक्य ‘‘ तेरा मिजाज तो अनपढ़ के हाथों का खत है! नजर तो आता है मतलब कहां निकलता है!!’’ मेरी नानी बचपन में कहती थी कि दक्खिन की ओर मुह करके खाना मत खाओं,दक्खिन की ओर पांव करके मत सोओं। गांव में बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि गांव के दक्खिन टोला में मत जाना। हमेशा […] Read more » दक्खिन का दर्द
लेख शख्सियत साहित्य नागार्जुन की कविता का भावबोध July 1, 2016 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान बाबा नागार्जुन को भावबोध और कविता के मिज़ाज के स्तर पर सबसे अधिक निराला और कबीर के साथ जोड़कर देखा गया है। वैसे, यदि जरा और व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो नागार्जुन के काव्य में अब तक की पूरी भारतीय काव्य-परंपरा ही जीवंत रूप में उपस्थित देखी जा सकती है। उनका कवि-व्यक्तित्व […] Read more » Featured Poet Nagarjun काव्य-संसार नागार्जुन नागार्जुन का संपूर्ण काव्य-संसार बाबा नागार्जुन
लेख साहित्य संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा Part 10 July 1, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment महाराणा का राजधर्म भी यही था यह था भारत का राजधर्म। महाराणा प्रताप इसी राजधर्म की रक्षार्थ अकबर से संघर्षरत रहे। हमारा राजधर्म व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का उद्घोषक था। व्यक्ति के विचार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उदघोषक था। अकबर राजधर्म की परिभाषा तक नही जानता था। ऐसे बादशाहों की बादशाहतें क्रूरता पर अवलंबित होती हैं। […] Read more » Featured Maharana Pratap अकबर अकबर इस्लामिक राजधर्म का संवाहक प्राचीन राजधर्म भारतीय राजधर्म महाराणा प्रताप भारत के राजधर्म के संवाहक महाराणा प्रतापसिंह हमारा प्राचीन राजधर्म
लेख साहित्य संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा Part 9 July 1, 2016 / July 1, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कुछ आदर्शों को लेकर महाराणा करते रहे अकबर से युद्घ राकेश कुमार आर्य इतिहास के पन्नो से  भारत में राजधर्म की महत्ता भारत का क्षात्र धर्म अति व्यापक है। महाभारत ‘शांति-पर्व’ (63 : 29) में कहा गया है :- सर्वेत्यागा राजधर्मेषु दृष्टा:। सर्वादीक्षा राजधर्मेषु योक्ता। सर्वाविद्या राजधर्मेषु युक्ता:। सर्वे लोका: राजधर्मेषु प्रविष्ठा। इसका अभिप्राय […] Read more » Featured Maharana Pratap अकबर प्राचीन राजधर्म हमारा प्राचीन राजधर्म
कहानी साहित्य पाप का बोझ June 30, 2016 / June 30, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment मुझे बालपन से ही अपना काम खुद करने की आदत रही है। इसका श्रेय मेरे पिताजी को है, जिन्होंने मुझे स्वावलम्बी बनने के लिए प्रेरित किया। वे कहते थे कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। अपना काम खुद करने में शर्म कैसी ? वे अपने और बाबाजी के जूते खुद पालिश करते थे। […] Read more » पाप का बोझ