लेख साहित्य कर्बला : हुसैन का भारत से दिल और दर्द का सम्बंध October 12, 2016 by शाहिद नकवी | Leave a Comment कर्बला पर गौर करने के बाद ये साफ हो जाता है कि मोहम्मद साहब ने जो इस्लाम दिया था वह ज़ुल्म और दहशतगर्दों का इस्लाम नहीं बल्कि अमन शांति और सब्र का इस्लाम है।आज के दौर मे फिर आतंकवात ने पंख फैला लिये हैं,इस्लाम की नई परिभाषा गढ़ कर बेगुनाहों का कत्ल किया जा रहा है।महिलाओं की आबरू लूटी जा रही है,लोगों को बेघर किया जा रहा है। Read more » Featured कर्बला भारत से दिल और दर्द का सम्बंध हुसैन
व्यंग्य साहित्य रामायण और मीडिया ट्रायल October 12, 2016 by दीपक शर्मा 'आज़ाद' | Leave a Comment मीटिंग समाप्त होने के अगले कुछ दिनों में लंका में जो हुआ उससे राम और लक्ष्मण एक बड़ी प्रोब्लम में फंस गये। पत्रकारों और मानवाधिकारवादियों ने गुस्सैल लक्ष्मण को अपने सवालों में जकड़ लिया। आम जनता के बीच अपनी न्यूज सेंस टैक्निक की बदौलत यह बात फैला दी कि लक्ष्मण के पास ब्रह्मास्त्र था जबकि मेधनाद निहत्था था। बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान ढ़ूंढ़ने वाले राम इस आधुनिक समस्या का समाधान ढूंढ़ने में असफल दिखाई दिये। Read more » मीडिया ट्रायल रामायण
कविता साहित्य आओ वैदिक दीप जलाएं October 11, 2016 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment गोवर्धन, संरक्षण, पोषण, गौ की सेवा, गौ का पालन| गौ माता के प्राण बचाएं|| Read more » आओ वैदिक दीप जलाएं
कविता साहित्य रावण क्या बन पावोगे October 9, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment कीट मकोड़े पशु जानवर, भी बन पाना आसान नहीं। सब के अपने लक्ष्य होते हैं,सब कर पाना आसान नहीं।। चारो वेद का ज्ञाता था वह, वीणा संगीत में सानी नहीं। राजनीतिज्ञ था पराक्रमी , ज्ञानी सम उसके कोई नहीं।। Read more » रावण क्या बन पावोगे
व्यंग्य नेताओ का राज , फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज October 7, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on नेताओ का राज , फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज वहीँ भूषण के ऑफिस में घुसकर कुछ लोगो ने जूतों से उनकी पिटाई कर दी थी। वैसे इन घटनाओ की निंदा की जानी चाहिए। मैंने भी इन घटनाओ की निंदा की थी , हालांकि मैं कड़ी निंदा नहीं कर पाया था ,क्योंकि निंदा करने से पहले मैंने मिठाई खा ली थी क्योंकि जैसे ही मैंनै इन घटनाओ के बारे में सुना, वैसे ही मेरे दिल में ख्याल आया, “कुछ मीठा हो जाए”। Read more » नेताओ का राज फिर कैसे आएगा इंडिया का स्वराज योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण
व्यंग्य व्यंग्य : केजरी भैया बोले October 5, 2016 by मनोहर पुरी | 1 Comment on व्यंग्य : केजरी भैया बोले पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने अपनी संजय रूपी आंख से देखा कि उनके हमसाये अरविन्द केजरी भैया बहुत ही मायूस एक कोने में पड़े हैं। हमेशा अखबारों में छाये रहने वाले उनके केजरी भैया मीडिया में सोलहवें पेज पर भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। Read more » Featured Kejriwal attack on surgical strike केजरी भैया बोले
व्यंग्य आखिर अहिंसा के पुजारी का घर अशांत क्यों? October 1, 2016 / October 1, 2016 by प्रवीण कुमार | Leave a Comment अजीब विडम्बना है कि कल तक हमें कालापानी और फाँसी की सजा सुनाने वाले गोरे अब हमारे दोस्त बन गये और जो साथ लड़े वो दुश्मन। इसलिए अब सडकों और दीवारों की गन्दगी साफ करने के साथ-साथ हमें अपने दिलों की गन्दगी भी साफ करनी पड़ेगी तथा पुनर्चिंतन करना पड़ेगा। गाँधी के गुजरात से आने वाले प्रधानमंत्री जी को "गाँधी के मन्तर" को अपने मन की बात बनानी पड़ेगी। Read more » आखिर अहिंसा के पुजारी का घर अशांत क्यों?
लेख साहित्य 2 अक्टूबर : अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस October 1, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment यदि किसी 'विशुद्ध मानव' जो सब नैसर्गिक मानवीय गुणों से परिपूर्ण हो, इसकी मूर्त कल्पना करनी हो तो 'राम', 'कृष्ण', 'बुद्ध' के अवतार के बाद गाँधीजी का व्यक्तित्व उभरकर आता है। गाँधीजी से बढ़कर मानव पूजक दिखलाई देना आसान नहीं है। Read more » 2 अक्टूबर Featured अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
आलोचना साहित्य काश! सुप्रीमो, सुप्रीम को अहमियत देते! September 30, 2016 / September 30, 2016 by शिव शरण त्रिपाठी | Leave a Comment सोमवार को जब उन गायत्री प्रसाद प्रजापति ने पुन: मंत्री पद की शपथ ली जिन्हे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अपने मत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था तो लोगो के मुंह से बरबस निकल पड़ा कि काश! सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पूर्व के निर्णय का सम्मान किया होता। Read more »
व्यंग्य साहित्य मच्छर से कुछ सीखो भाई ………… September 30, 2016 / September 30, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment मनुष्य भले ही स्वयं को संसार के प्राणियों में सबसे अधिक बुद्धिमान समझे, पर मैं इससे सहमत नहीं हूं। इन दिनों सब तरफ बाबा रामदेव और उनके योगासनों की धूम है; पर एक बार जरा आसनों के नाम पर तो नजर डालें। मयूरासन, श्वानासन, कुक्कुटासन, सिंहासन, गोमुखासन, मत्स्यासन, भुजंगासन, मकरासन, उष्ट्रासन... आदि। नाम गिनाना शुरू करें, तो सूची समाप्त नहीं होगी। Read more » Featured sattirical article on dengue मच्छर
व्यंग्य साहित्य आज़ादी की तान पर नाचे बलूचिस्तान September 27, 2016 / September 27, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on आज़ादी की तान पर नाचे बलूचिस्तान भारत के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को नरक कहाँ था , मतलब बलूचिस्तान नर्क से आज़ादी चाहता है लेकिन बलूची लोगो को समझना होगा की नरक से आज़ादी मिलने में समय लगता है , हमें भी यूपीए के शासनकाल से 10 साल के बाद ही मुक्ति मिली थी। Read more » Featured sattirical article on baluchistan बलूचिस्तान
कविता साहित्य फल की इच्छा September 27, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment कर्म का उद्देश्य ही फल है, तो फल की इच्छा होना तो ज़रूरी है। थोड़ी व्याकुलता भी होगी ही, Read more » Featured फल की इच्छा