लेख साहित्य बंदा सिंह बहादुर ने रचा इतिहास – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री June 15, 2016 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अठारहवीं शताब्दी के शुरु में ही हुई दो लड़ाइयाँ अपना ऐतिहासिक महत्व रखती हैं । इन दोनों लड़ाईयों ने पश्चिमोत्तर भारत में विदेशी मुग़ल वंश के कफ़न में कील का काम किया । ये लडाईयां थीं पंजाब में सरहिन्द और गुरदास नंगल की लडाई । इन दोनों लड़ाईयों का नेतृत्व […] Read more » Banda Singh Bahadur Featured बंदा सिंह बहादुर लक्ष्मण देव
लेख साहित्य संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 4) June 15, 2016 / June 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारत से भागा हुआ हुमायूं परिस्थितिवश पुन: लौट आया राकेश कुमार आर्य हुमायूं के प्रति हमारे शासकों का प्रमाद प्रदर्शन यह हमारी दुर्बलता या ‘सदगुण विकृति’ का ही एक उदाहरण है कि जब हुमायूं इस देश से उसी के मजहबी भाइयों के द्वारा निकाल दिया गया था और वह इधर-उधर भटक-भटक कर समय व्यतीत कर […] Read more » राजा मालदेव संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा : छल प्रपंचों की कथा हुमायूं
व्यंग्य साहित्य किसका जन्म दिन , कौन मतवाला…!! June 14, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा उस रोज टेलीविजन पर मैं एक राजनेता का जन्म दिन उत्सव देख रहा था। लगा मानो किसी अवतारी पुरुष का जन्म दिन हो। नेताजी के बगल में उनका पूरा कुनबा मौजूद था। थोड़ी देर में मुख्यमंत्री से लेकर तमाम राजनेता उनके यहां पहुंचने लगे। दिखाया गया कि नेताजी ने अपने किसी शुभचिंतक […] Read more »
व्यंग्य साहित्य मौसम का हाल June 14, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment शर्मा जी को बचपन से ही रेडियो सुनने का बड़ा शौक था। किसी जमाने में उनके घर में एक बड़ा रेडियो हुआ करता था। अतः वे खुद को कुछ खास समझते थे और बड़ी ठसक के साथ उसके पास बैठे रहते थे। रात में पौने नौ बजे वाले समाचारों के समय आसपास के लोग वहां […] Read more » मौसम का हाल
व्यंग्य साहित्य मानसून बिना, सब सून June 14, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment आजकल हर कोई मानसून आने का इंतज़ार कर रहा हैं , लेकिन मानसून तो पेट्रोल और डीज़ल की तरह भाव खा रहा हैं। लोग तरस रहे हैं पर बादल बरस नहीं रहे हैं, लगता हैं उन्होंने भी कमेंट्री करते सिद्धू जी के मुँह से ये मुहावरा सुन लिया है की ” गुरु ,जो गरजते हैं […] Read more » sattirical article on monsoon मानसून
गजल साहित्य चुपचाप सा सुनसान सा ! June 14, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment चुपचाप सा सुनसान सा ! चुपचाप सा सुनसान सा, मेरा जहान है लग रहा; ना कह कहे चुलबुला-पन, इतना नज़र आ पा रहा ! वाला कहाँ अठखेलियाँ, लाला कहाँ गुलडंडियाँ; उर उछलते पगडंडियाँ, मन विचरते कर डाँडिया ! सोचों बँधे मोचों रुँधे, रहमों करम पर हैं पले; आत्मा खुली पूरी कहाँ, वे समझ पाए रब […] Read more » अलहदा हो अलविदा कहना ! चुपचाप सा सुनसान सा ! त्रिलोकी का लोक चलना ! सुगबुगाहट झनझनाहट ! है गाँठ कोई पुरातन !
लेख साहित्य गंगा दशहरा अर्थात गंगावतरण की पौराणिक कथा June 14, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” भारतवर्ष के पौराणिक राजवंशों में सबसे प्रसिद्ध राजवंश इक्ष्वाकु कुल है। इस कुल की अट्ठाईसवीं पीढ़ी में राजा हरिश्चन्द्र हुए, जिन्होंने सत्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया । इसी कुल की छत्तीसवीं पीढ़ी में अयोध्या में सगर नामक महाप्रतापी , दयालु, धर्मात्मा और प्रजा हितैषी राजा हुए। गर अर्थात विष […] Read more » गंगा दशहरा गंगावतरण गंगावतरण की पौराणिक कथा
लेख साहित्य 14 जून : विश्व रक्तदान दिवस June 14, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली है। संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा दें। मक़सद यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं […] Read more » Featured world bloodbank day विश्व रक्तदान दिवस
लेख साहित्य संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 3) June 13, 2016 / June 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment बाबर के पश्चात हुमायूं को भी नही मिला हिंदुओं का सम्मान राकेश कुमार आर्य क्षत्रिय जातियों का मूल उद्गम एक ही है ‘पंजाब कास्ट्स’ में सर इबट्सन ने लिखा है-‘‘गूजर पंजाब की सबसे बड़ी आठ जातियों में से एक है। ऊंची जातियों में केवल जाट, राजपूत, पठान, आर्य एवं ब्राह्मण तथा नीची जातियों चमार तथा […] Read more » babar Featured Humayun भारत संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा : छल प्रपंचों की कथा
कहानी साहित्य लघुकथाएं June 10, 2016 / June 11, 2016 by आलोक कुमार सातपुते | Leave a Comment आलोक कुमार सतपुते गोली मार देंगे… उस दंग़ाग्रस्त शहर में कफ़्र्यू लगा हुआ था । शहर सेना के हवाले कर दिया गया था। दंग़ाइयों को देखते ही गोली मार देने के आदेश थे। एक पत्रकार ने सेना केे मेज़र से जानना चाहा कि वे दंगो़ं को किस तरह से रोकेंगे। इस पर मेज़रसाहब का ज़वाब […] Read more »
लेख शख्सियत समाज साहित्य जनकवि घाघ की सटीक कहावतें June 10, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा.राधेश्याम द्विवेदी पुराने समय में जब आधुनिक तकनीकों का प्रचलन नहीं था, उस समय मौसम आधारित भविष्यवाणियां सटीक होती थीं, जो अनुभवी लोगों द्वारा समय-समय पर की जाती थीं। अकबर के समय के महाकवि घाघ ऐसे ही अनुभवी कवियों में माने जाते हैं । वह कृषि पंडित एवं व्यावहारिक पुरुष थे। उनका नाम भारतवर्ष के, […] Read more » Featured जनकवि घाघ सटीक कहावतें
लेख साहित्य संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 2) June 10, 2016 / June 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य उन पूर्वजों को करें ‘नमस्ते’ जो हमें बना गये उजालों का सम्राट राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का ओज राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त अपनी कविता ‘उद्बोधन’ में लिखते हैं :- ‘‘हम हिंदुओं के सामने आदर्श जैसे प्राप्त हैं- संसार में किस जाति को किस ठौर वैसे प्राप्त हं? भव सिन्धु में निज पूर्वजों की रीति […] Read more » entire india never remained slave Featured गुलाम संपूर्ण भारत संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा : छल प्रपंचों की कथा