कविता साहित्य तन्हाई July 27, 2016 by चारु शिखा | Leave a Comment तन्हाई छोड़ देती हूँ सिलवटे अब ठीक नहीं करती, मन सुकून चाहता , जो शायद मिल पाना मुश्किल, मुस्कान भी झूठी लगती, अच्छी थी कच्ची मिट्टी की मुस्कान, वक्त के साथ, सोच बदल गयीं। पर हकीकत कुछ और हैं. सहारा नहीं साथ की दरकार हैं, अब उसकी भी नहीं आस है, ढूंढती नजरें पर सब […] Read more » तन्हाई
व्यंग्य साहित्य आया सावन जल -भुन के July 25, 2016 by अशोक गौतम | Leave a Comment लीजिए साहब! जिस बेदर्दी सावन का फरवरी से ही सरकार को इंतजार था आखिर वह आ ही गया। जल -भुन के ही सही। सावन हद से अधिक झूमता- लड़खड़ाता जनता के सामने अपने को पेश करे अतैव सरकार ने उसको लड़खड़ाते हुए आने के लिए रास्ते में ही गच्च कर दिया है। हर दो कोस […] Read more » Featured आया सावन जल -भुन के सावन
दोहे साहित्य प्रभु प्रभाव प्रति जीव सुहाई ! July 24, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment प्रभु प्रभाव प्रति जीव सुहाई; देश काल एकहि लग पाई ! पृथ्वी एक, देश सब अापन; विश्व बसहि, मानस उर अन्तर ! भेद प्रकट मन ही ते होबत; भाव सबल आत्मा संचारत ! बृह्म भाव आबत जब सुलझत; खुलत जात ग्रंथिन के घूँघट ! चक्र सुदर्शन-चक्र चलाबत; आहत होत द्वैत मति भागत ! नेह सनेह […] Read more » प्रभु प्रभाव प्रति जीव सुहाई !
व्यंग्य साहित्य राजनेता या पॉलिटिकल सेल्समैन…!! July 24, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा सचमुच मैं अवाक था। क्योंकि मंच पर अप्रत्याशित रूप से उन महानुभाव का अवतरण हुआ जो कुछ समय से परिदृश्य से गायब थे। श्रीमान कोई पेशेवर राजनेता तो नहीं लेकिन अपने क्षेत्र के एक स्थापित शख्सियत हैं। ताकतवर राजनेता की बदौलत एक बार उन्हें माननीय बनने का मौका भी मिल चुका है […] Read more » political salesman politicians पॉलिटिकल सेल्समैन राजनेता
पुस्तक समीक्षा साहित्य शिकारी का अधिकार – (व्यंग्य संग्रह) आरिफा एविस July 22, 2016 by बी एन गोयल | 3 Comments on शिकारी का अधिकार – (व्यंग्य संग्रह) आरिफा एविस समीक्षा – बी एन गोयल एक प्रसिद्ध दोहा है – शब्द सम्हारे बोलिए शब्द के हाथ न पांव एक शब्द करे औषधि एक शब्द करे घाव , इस दोहे में एक सलाह दी गयी है कि जब भी कुछ बोलो नाप तोल कर बोलो. सोच समझ कर बोलो. यह सलाह यद्यपि सब के लिए हैं […] Read more » शिकारी का अधिकार
आलोचना साहित्य गांधी पर राहुल की महापंडिताई! July 22, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment नेहरु राजवंश के युवराज राहुल गांधी अपने ही शब्द-जाल में फंस गए हैं। मार्च 2014 में देश को चुनाव का बुखार चढ़ा हुआ था। महाराष्ट्र की एक सभा में उन्होंने एक जुमला दे मारा। उन्हें यह बुरा लगा कि नरेंद्र मोदी-जैसा आदमी अपनी सभाओं में गांधी और पटेल की दुहाई दे रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक […] Read more » गांधी राहुल गांधी की महापंडिताई
कविता साहित्य वक्त July 20, 2016 / July 20, 2016 by चारु शिखा | Leave a Comment वक्त ने वक्त के साथ बहुत कुछ सिखा दिया वक्त ने “चलना” सिखा दिया वक्त ने “मुस्कुराना”सिखा दिया वक्त ने “आसूओं” को छुपा ना सिखा दिया वक्त ने हर “जख्म” को भरना सिखा दिया वक्त -वक्त की बात है…. कभी “तितली” की तरह मंडराना, कभी “भवरें”की तरह गंजन । कभी “बेले” की तरह महकती थी […] Read more » वक्त
राजनीति व्यंग्य साहित्य मानसून सत्र की गलबहियां July 20, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment (व्यंग्य ) लेखक एम.एम.चन्द्रा नेता: मंत्री जी जल्द ही संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है. हम कितनी तैयारी कर के जा रहे है. तथ्य आंकड़े दुरुस्त तो है वर्ना लोग खड़े ही धुल में लट्ठ लगनने के लिए. मंत्री: हम मंत्री है, प्रत्येक संत्री को हर मोर्चे पर कैसे फिट किया जाता है […] Read more » Featured GST bill in monsoon session parliamen Monsoon session in Parliatment मानसून सत्र की गलबहियां
लेख दिल्ली विधानसभा चुनाव ‘आप’ की सफलता या ‘भाजपा’ की विफलता ? July 16, 2016 / July 17, 2022 by अरूण कुमार जैन | Leave a Comment दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम अप्रत्याशित तो रहे ही, साथ ही अनेक प्रश्न भी उत्पन्न हो गये। इस चुनाव से तमाम तरह की परंपराएं टूटीं। चुनावी पंडितों, भाजपा एवं कांग्रेस को भी बिल्कुल अहसास नहीं था कि उनका यह हाल होगा? हालांकि, कांग्रेस पार्टी को ऐसी भी उम्मीद नहीं थी कि वह सत्ता में पहुंचने के […] Read more »
लेख साहित्य संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा Part 11 July 15, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अकबर की बहुत सी विजयों के उपरांत भी महाराणा प्रताप महान हैं राकेश कुमार आर्य , अकबर का महिमामंडन उचित नही अब हम अकबर पर पुन: चर्चा करते हैं। अकबर चित्तौड़ को लेने में सफल हो गया और हमारे इतिहासकारों द्वारा उसे महान होने का गौरव भी दे दिया गया। हम उसे प्रचलित इतिहास में […] Read more » Featured अकबर खान बाबा का अंत बैरम खां महाराणा प्रताप महान संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा : छल प्रपंचों की कथा
आलोचना साहित्य दहशतगर्द से हमदर्दी July 13, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मजहबी कट्टरपंथ से प्रेरित होकर आतंकवाद के रास्ते पर निकले एक गुमराह युवक की मौत पर कश्मीर में मातम और समर्थन हैरानी में डालने वाला है। इससे साफ होता है कि पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार से कश्मीर में शांति बहाली की जो उम्मीद थी, उस पर पानी फिरता लग रहा है। […] Read more » Featured दहशतगर्द से हमदर्दी
आलोचना विविधा साहित्य बुरहान वानी : आतंकियो के लिए कितने आँसू… July 12, 2016 by अजीत कुमार सिंह | Leave a Comment -अजीत कुमार सिंह कभी आतंकवादियों के मारे जाने पर किसी देश में मातम मनाते देखा है…। नहीं न ! हाँ! आतंकवादियों के मारे जाने पर हमारे देश में मातम मनाया जाता है। नमाज-ए-जनाजा होता है। इसका ताजातरीन उदाहरण कश्मीर मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात आतंकी बुरहान वानी के बाद का दृश्य है। 8 जुलाई को […] Read more » Featured terrorist Burhan Vani आतंकवाद आतंकवादी बुरहान वानी