कविता साहित्य तुहिन के तीर बिफर ! February 4, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment तुहिन* के तीर बिफर, धरा पर जाते बिखर; भूमि तल जाता निखर, प्राण मन होते भास्वर ! पुष्प वत आते कभी, गगन में छा के कभी; मोहते नयना जभी, मोह छुड़वाते तभी ! धवल छवि धर के ज़मीं, ध्यान में लेती गुणी; कणी को करती मणि, ऋणी हो जाते धनी ! सहजता उर में भरे, […] Read more » तुहिन के तीर बिफर !
कविता साहित्य तरंगों में फिरा सिहरा ! February 4, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment तरंगों में फिरा सिहरा, तैरता जो रहा विहरा; विश्व में पैठ कर गहरा, पार आ देता वह पहरा ! परस्पर राग रंगों में, रगों में रक्त दे जाता; मनों में मुक्ति भर जाता, भुक्त कर तृप्त कर जाता ! कभी निर्गुण में गुण भरता, सगुण बन कभी नच जाता; किए चैतन्य सब सत्ता, वही मूर्द्धन्य […] Read more » तरंगों में फिरा सिहरा !
कविता आकांक्षा February 3, 2016 / February 3, 2016 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment मातृभूमि भारतमाता की , एक राष्ट्रभाषा हिन्दी हो । बँधें सभी हम एक सूत्र में, हिन्दी तेरी सदा विजय हो ।। जग में और संयुक्तराष्ट्र में , स्वाभिमान भारत का जागे । गौरव से गूँजे हिन्दी स्वर, भारत की संस्कृति की जय हो ।। हों स्वदेश में या विदेश में, दृढ़ संकल्प सदा हो मन […] Read more » आकांक्षा
कहानी साहित्य बरकत February 2, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on बरकत कल शाम देहरादून से जितेन्द्र का फोन आया, ‘‘20 अक्तूबर को तुम्हारे भतीजे का विवाह है। कार्ड तो जब छपेगा, तब भेज दूंगा; पर तारीख लिख लो। भाभी जी और बच्चों को भी आना है।’’ मैंने कहा, ‘‘हां भाई, ऐसे खुशी के मौके बार-बार थोड़े ही आते हैं। हम सब जरूर आएंगे। कोई चीज […] Read more » Featured बरकत
कहानी साहित्य सौन्दर्या February 2, 2016 by अनुप्रिया अंशुमान | Leave a Comment एक बहुत ही मीठी ,मधुर ध्वनि या स्वर सुनायी दे रही है ।आज सुबह मैं होटल की बालकनी मे खड़े होकर मनाली की रहस्यात्मक खूबसूरती के राज का आनंद ले रहा था। पर ये ध्वनि कहाँ से आ रही है –एकदम मन को मोह लेनी वाली अब तो आवाज भी आने लगी थी वो आवाज […] Read more » सौन्दर्या
लेख विविधा अयोध्या अर्थात अवधपुरी रही है कभी संपूर्ण विश्व की राजधानी February 1, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment बाबर की वकालत करते इतिहास के लेखक बाबर को पूर्णत: पंथनिरपेक्ष सिद्घ करते हुए एक इतिहास लेखक सतीशचंद अपनी पुस्तक ‘मध्यकालीन भारत’ के पृष्ठ 204 पर लिखते हैं :- ‘‘बाबर रूढि़वादी सुन्नी था, पर वह धर्मांध नही था। न ही वह इस्लाम के धर्माचार्यों से प्रेरित होता था। जब ईरान और तूरान में शिया और […] Read more » Featured अयोध्या अर्थात अवधपुरी संपूर्ण विश्व की राजधानी
व्यंग्य पुत्तन चाचा का पश्चाताप…!! February 1, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा जीवन संध्या पर पुत्तन चाचा पश्चाताप की आग में झुलस रहे हैं। कुनबे का मुखिया होने से घर – परिवार में उनकी मर्जी के बगैर कभी कोई पत्ता न हिलता था , न अब हिलता है। चचा को गम है कि उन्होंने कुछ गलत फेसले किए। परिवार का होनहार पप्पू इंजीनियरिंग की […] Read more » पुत्तन चाचा का पश्चाताप...!!
कविता आ गया मधुमास प्यारा, January 30, 2016 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment ओढ़कर नव वसन न्यारा॥ प्रकृति का यौवन निराला, गा रहा स्वर तान प्यारा॥ नमन हे ईश्वर तुम्हारा, नमन हे ईश्वर तुम्हारा॥ कूप झरने नदी सागर। मधुर रस में तृप्त गागर॥ झूमते सब पेड़ पौधे। नृत्य करते मोर मोहते॥ कुहुक कोयल की निराली। मगन पुष्पम् डाली डाली॥ पृथ्वी माता हरित आंचल। हरित चुन्नी हरित हर […] Read more » आ गया मधुमास प्यारा
लेख समाज साहित्य चित्तौड़ ऋणी है व भारत को गर्व है पन्ना गूजरी के त्याग पर January 27, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment असीम वेदना के साथ पन्ना गूजरी महल से बाहर निकली अपने पुत्र चंदन से हाथ धोकर और अपनी असीम वेदना को अपने हृदय में समेटकर पन्ना चित्तौड़ के राजभवनों से बाहर निकली। उसे असीम वेदना थी पर वह अपने पथ से ना तो विचलित थी और ना ही उसे कोई घबराहट थी। हमारी इस मान्यता […] Read more » Featured चित्तौड़ ऋणी है व भारत को गर्व है पन्ना गूजरी पन्ना गूजरी के त्याग पर
कहानी साहित्य ओक्साना कुत्ते द्वारा पालित लड़की January 27, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment अविकसित मानव बच्चों की सच्ची कहानियां ( 10 ) डा. राधेश्याम द्विवेदी ओक्साना की कहानी ना तो डरी सहमी लड़की का है और ना तो किसी दोषी लड़की की है, अपितु एक उपेक्षित अथवा निष्कासित लड़की की कहानी है। वह यूक्रेन के नोवाया बलागोवेसचेनका के अपने पारिवारिक घर में रहती थी। उसके घर के पीछे […] Read more » ओक्साना कुत्ते द्वारा पालित लड़की
साहित्य बुद्धकालीन रामग्राम का कोलिय गणराज्य January 27, 2016 / January 27, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on बुद्धकालीन रामग्राम का कोलिय गणराज्य डा. राधेश्याम द्विवेदी गौतम बुद्ध के अवतरण के पहले का यह प्रसंग है। कोशल के सूर्यवंशी राजा प्रसेनजित या ओक्कका की बड़ी रानी की बड़ी पुत्री एवं शाक्यों की राजमाता पिया बहुत रुपवती थी। उसको बाद में कुष्ट रोग हो गया। उसके भाइयों ने कहा कि यदि राजमाता उन लोगों के साथ रहेगी तो उन […] Read more » Featured बुद्धकालीन रामग्राम का कोलिय गणराज्य
कविता साहित्य ऐसा था सुभाष हमारा January 27, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment ऐसा था सुभाष हमारा । ऐसा था सुभाष हमारा ।। महल और चौबारा छोड़ा तख्त ताज मीनारा छोड़ा। निज मन का बंधन तोड़ा अपना सुख वैभव छोड़ा।।1।।ऐसा था ….. भारत मां के चरणों में रणभेरी का तान छोड़ा। तन पर खाकी पहन लिया सिविल की नौकरी छोड़ा।। 2।।ऐसा था……. दुश्मन से टक्कर लेकरके ’जयहिन्द’ का […] Read more » ऐसा था सुभाष हमारा