कविता साहित्य माँ शारदे, वर दे February 13, 2016 by हिमकर श्याम | Leave a Comment वरदायिनी माँ शारदे, वर दे मैं अल्पज्ञानी शरण में ले मुझे चरण में स्थान दे हे वागीश्वरी गहन है अँधेरा अज्ञान हर शब्दाक्षर दान दे विद्या, बुद्धि ज्ञान दे वीणा वादिनी वसंत की रागिनी विनती करूँ सुमधुर तान दे कलम को धार दे -हिमकर श्याम Read more » मां शारदे वर दे
कविता साहित्य नयन विच निहारिका ! February 13, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment नयन विच निहारिका, दिखाती अपनी छटा; अधर अमृत की वर्षा, हर्ष ज्योतिर्मय घटा ! छिटकती छवि की आभा, नज़र की विपुल विधा; रिझाती ऋतम्भरा, हुए शिशु स्वयम्वरा ! पिंगला इड़ा क्रीड़ा, सुषुम्ना स्मित मना; झाँकती विश्व लहरियाँ, झूल कर माँ की बहियाँ ! श्वाँस हर आहट पा के, प्राण की चाहत ताके; खोल नैनन वो […] Read more » नयन विच निहारिका !
कविता साहित्य आज कोई याद मुझको ! February 13, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment आज कोई याद मुझको, स्वप्न में आया किया; प्रीति में हर्षा रुला कर, प्राण को परशा किया ! प्रणव की हल्की फुहारें, छोड़ वह गाया किया; प्रवाहों की प्रगढ़ता में, प्रवाहित मुझको किया ! दूर से आयाम आ, आरोह का स्वर दे गया; रूह हर हरकत विचरता, रोशनी मुझको दिया ! जागरण की चौखटों पर, […] Read more » आज कोई याद मुझको !
व्यंग्य साहित्य अबके नहीं आ पाऊंगा यार February 13, 2016 by अशोक गौतम | 2 Comments on अबके नहीं आ पाऊंगा यार बाजार द्वारा हर मौसम की कमी पूरी किए जाने के बाद भी पता नहीं वसंत का कई दिनों से वैसे ही इंतजार क्यों कर रहा था जैसे कोई पागल कवि कई दिनों से अपनी भेजी रचना की स्वीकृति आने का इंतजार करता है। दरवाजे पर जरा सी भी आहट होती है तो कवि को लगता […] Read more » Featured
आलोचना विविधा साहित्य प्यार का ढाई आखर जो सनातन, अजर और अमर है February 12, 2016 by एम. अफसर खां सागर | Leave a Comment एम. अफसर खां सागर किसी के लिए जिन्दगी जीने का सलीका तो किसी के लिए जीने की खुबशूरत वजह है। किसी को इसमें रब दिखता है तो किसी के लिए कम्बख्त इश्क है ये। प्यार शब्द तो एक है मगर इसके मायने अनेक हैं। इतिहास गवाह है कि इश्क के नाम पर न जाने कितनी […] Read more » Featured अजर और अमर प्यार का ढाई आखर जो सनातन
आलोचना साहित्य प्रसिद्धि के ये ‘टोटके’ February 11, 2016 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी अधिक से अधिक धन-दौलत अर्जित करना तथा सुख व समृद्धि हासिल करना निश्चित रूप से मानव जाति की एक बहुत बड़ी कमज़ोरी है। समाज में अधिकांश लोग ऐसे मिलेंगे जो ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाने की कोशिश में दिन-रात लगे रहते हैं। धनवान बनने की यही प्रवृति इंसान को भ्रष्टाचार,जमाख़ोरी,रिश्वतख़ोरी,कालाबाज़ारी,तस्करी तथा अन्य कई […] Read more » Featured प्रसिद्धि के ये ‘टोटके’
लेख साहित्य राममंदिर टूटने से पहले हुए थे पौने दो लाख हिन्दू बलिदान February 10, 2016 / February 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 3 Comments on राममंदिर टूटने से पहले हुए थे पौने दो लाख हिन्दू बलिदान ‘जय-पराजय का चक्र’ कुछ विजयें ऐसी होती हैं कि उनके कारण किसी व्यक्ति या किसी राजा का विशेष नाम हो जाता है। जैसे अशोक की ‘कलिंग विजय’। इसी प्रकार कोई पराजय भी ऐसी होती है कि उसके कारण किसी व्यक्ति या किसी राजा की विशेष चर्चा होती है। जैसे खानवा के युद्घ में बाबर के […] Read more » demolish of ram mandir in ayodhya Featured lakhs of hindus sacrificed their lives राममंदिर राममंदिर टूटने से पहले हुए थे पौने दो लाख हिन्दू बलिदान
व्यंग्य हर हाइनिसेस बर्थडे February 9, 2016 by अशोक गौतम | 1 Comment on हर हाइनिसेस बर्थडे अचानक दोपहर बाद आफिस में नोटिस सर्कुलेट हुआ कि दो दिन बाद यानि रविवार को मैडम के कुत्ते का बर्थडे है और इस अवसर पर स्टाफ के सारे सदस्य सादर आमंत्रित हैं । यह नोटिस सर्कुलेट होते ही पूरे आफिस में खलबली मच गई। किसीको पता ही नहीं था मैडम कुत्ता प्रेमी भी हैं ,वे […] Read more » Featured हर हाइनिसेस बर्थडे
लेख विविधा जब बर्बर मसूद हमलावर बनकर आया था अयोध्या February 9, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment हमारे अतीत का पवित्र स्मारक अयोध्या हमारे गौरवपूर्ण अतीत का पवित्र स्मारक है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। संपूर्ण विश्व इस पवित्र नगरी का ऋणी है, क्योंकि इक्ष्वाकु वंश की अनेकों पीढिय़ों ने यहां से विश्व पर शासन किया और आर्यावत्र्तीय राजाओं ने विश्वशांति की दिशा में ठोस उपाय किये। विदेशी इतिहासकारों का एक […] Read more » Featured अयोध्या जब बर्बर मसूद हमलावर बनकर आया था
व्यंग्य साहित्य साहित्य में ‘ मीट ‘…!! February 7, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा साहित्य समारोह- उत्सव या सम्मेलन की बात होने पर मुझे लगता था इस बहाने शब्दकर्मियों व साहित्य साधकों को उचित मंच मिलता होगा। एक ऐसा स्थान जहां बड़ी संख्या में साहित्य साधक इकट्ठे होकर साहित्य साधना पर वार्तालाप करते होंगे। छात्र जीवन में एक बड़े पुस्तक मेले में जाने का अवसर मिलने […] Read more » Featured साहित्य में ' मीट '...!!
कविता साहित्य यूँ खुद को उदास करो February 5, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment सारी कोशिशें जब दर दीवार होने लगे बेवजह जब कोई दरकिनार होने लगे फलसफाँ रहगुजर का नया आयाम तलाश करो….. घुट घुट कर जी कर ना खुद को उदास करों…. उम्मीदें सारी जब गम ए रूखसार होने लगे उन्मादमयी सपने सारे यातनाओं मे सोने लगे करवटे बदल कर नया रास्ता इजाद करो.. अतीत से मुखातिब […] Read more » यूँ खुद को उदास करो
कहानी साहित्य उलझन February 4, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment शोभा का मन न जाने कैसा हो रहा था। जब से उसे अपनी जेठानी पूर्णिमा की मृत्यु का समाचार मिला था, उसका मन बार-बार चिन्तित और व्याकुल हो उठता था। क्या होगा अब पांच साल के मोहन और नवजात राधिका का ? पूर्णिमा और शोभा क्रमशः पांच साल के अन्तर से इस घर […] Read more » उलझन