कविता तेरे बिन July 22, 2014 by रवि कुमार छवि | Leave a Comment -रवि कुमार छवि- तू मोहब्बत है मेरी, तू मेरी संगिनी है। तू इमारत का वो हिस्सा है, जिस पर मेरे ख्वाब टिकते हैं। तू वो आशियाना है, जहां मेरी उम्मीदें रहती है। तेरी मुस्कराहटें, मेरी आवारगी है। तेरी खामोशी, मेरी बैचेनी है। तेरी खुशी, मेरी जिंदगी है। तेरी इबादत, मेरी आस्था है। तेरे लफ्ज़, मानो […] Read more » कविता तेरे बिन हिन्दी कविता
गजल या खुदा कैसा ये वक्त है July 22, 2014 by जावेद उस्मानी | Leave a Comment -जावेद उस्मानी- हर सिम्त चलते खंज़र, कैसा है खूनी मंज़र हर दिल पे ज़ख्मेकारी, हर आंख में समंदर दहशती कहकहे पर रक्स करती वसूलों की लाशें इस दश्तेखौफ़ में, अमन को कहां जा के तलाशें दम घुटता है इंसानियत का, वहशीपन जारी है या खुदा कैसा ये वक्त है लहू का नशा तारी है Read more » ग़ज़ल या खुदा कैसा ये वक्त है
कविता आज बूंदों से कर लें दो बातें… July 21, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- आज नहीं करेंगे, रोज़ की बाते… काम वाली अब तलक, क्यों नहीं आई! आज खाने में क्या बनाऊं? या बाज़ार से सब्ज़ी ले लाऊं? आज बूंदों से, करले दो बातें, कुछ उनकी सुनें, कुछ अपनी कह डालें। तुम बादलों से गिरती हो… चोट नहीं लगती? तुम्हारे आने की, प्रतीक्षा में, हम आंखें बिछाते […] Read more » आज बूंदों से कर लें दो बातें कविता हिन्दी कविता
कविता दरिंदगी July 21, 2014 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment -रवि श्रीवास्तव- समाज में फैल गई गंदगी, हर तरफ दिख रही दरिंदगी, नारी के शोषण में तो, देश रहा है अब तक झेंप, कड़ी सज़ा मिले उन सबको, जो करते हैं महिलाओं का रेप। नहीं नज़र आती है उनको, उस नारी में बहन बेटी, अपनी इज्ज़त को को इज्ज़त समझे, दूसरों की करते हैं बेइज्ज़ती। […] Read more » कविता दरिंदगी हिन्दी कविता
कविता किस्मत से जंग July 18, 2014 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment -रवि श्रीवास्तव- किस्मत के साथ मेरी, चल रही इक जंग है, न कोई हथियार है, न कोई संग है। कभी भारी पलड़ा उसका तो कभी मेरा रहा, उसके दिए रह चोट का दर्द तो मैने सहा। तोड़ना वो चाहती मुझको, कर के अपने तो सितम, उसके हर वार को सहने का तो मुझमें है तो […] Read more » किस्मत कविता किस्मत से जंग
कविता उड़ान July 17, 2014 by रवि श्रीवास्तव | Leave a Comment -रवि श्रीवास्तव- एक दिन बैठकर मैं, बस यही सोचता था, किस तरह से उड़ते हैं पक्षी, क्या उनकी उड़ान है। गिरने का न डर है उनको, उनकी यह पहचान है, सोचते-सोचते आखिर, पहुंच गया उस दौर तक, पंख तो होते हैं उनके, पर उनके हौसलों में जान है। कभी यहां तो कभी वहां, क्या गज़ब […] Read more » उड़ान पक्षी पक्षी कविता
कविता महकता मेरा गुलिस्तां सदा रहता July 15, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on महकता मेरा गुलिस्तां सदा रहता -गोपाल बघेल ‘मधु’- हम रहे आनन्द की आशा बने (मधुगीति सं. २२९२) हम रहे आनन्द की आशा बने, हम रहे ब्रह्मांड की भाषा बने; अण्डजों की आत्म की सुषमा बने, पिण्डजों की गति की ख़ुशबू बने । समय में चलना कभी चाहे हमीं, पूर्व के कुछ दृश्य लख चाहे कभी; भविष्यत की झांकियां चाहे कभी, […] Read more » कविता महकता मेरा गुलिस्तां सदा रहता हिन्दी कविता
कविता भीड़ में क्या मांगूं ख़ुदा से July 14, 2014 / July 14, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on भीड़ में क्या मांगूं ख़ुदा से -क़ैस जौनपुरी- रमज़ान का महीना है भीड़ में क्या मांगूं ख़ुदा से दुनियाभर के मुसलमान एक साथ रोज़ा रखते हैं सुना है रोज़े में हर दुआ क़ुबूल भी होती है अल्लाह मियां के पास काम बहुत बढ़ गया होगा आख़िर इतने लोगों की दुआएं जो सुननी हैं और फिर सिर्फ़ मुसलमान ही क्यूं उन्हें तो […] Read more » कविता भीड़ में क्या मांगूं ख़ुदा से हिन्दी कविता
व्यंग्य मोदी जी ! मंत्रियों की भी ‘क्लास’ लो July 14, 2014 / July 14, 2014 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कौटिल्य ने देश को चलाने के लिए किसी मंत्री की योग्यता की एक व्यवस्थित सूची हमें दी है। उनके अनुसार-‘‘एक मंत्री को देशवासी (विदेशी ना हो) उच्चकुलोत्पन्न (संस्कारित और उच्च शिक्षा प्राप्त) प्रभावशाली, कलानिपुण, दूरदर्शी, विवेकशील, (न्यायप्रिय दूध का दूध और पानी का पानी करने वाला-नीर-क्षीर विवेकशक्ति संपन्न) अच्छी स्मृति वाला, जागरूक, अच्छा वक्ता,(समाज में […] Read more » modi teach your ministers also मोदी जी ! मंत्रियों की भी ‘क्लास’ लो
कविता कौन है वह आखिर July 14, 2014 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on कौन है वह आखिर स्मिता सिंह दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सूरज का इस जगह से कोई वास्ता नहीं रहता नहीं डालता कभी रोशनी इन अंधेरी गलियों पर कि वो भी शुचिता की परंपरा को तोड़ नहीं सकता होठों पर लाली, माथे पर बिंदी सजाये कतार में खड़ी ये सुहागिनें नहीं पति नहीं उन्हें तो ‘किसी का भी’ […] Read more » कौन है वह आखिर
कविता यह भारत किसका भारत है July 8, 2014 by सुधीर मौर्य | 1 Comment on यह भारत किसका भारत है -सुधीर मौर्य- यह गोधरा और उसकी ट्रेन में जलती हुई लाशें यह मुज़फ्फरनगर और उसकी ज़मीन पर बहन की लाज़ बचाने वाले भाइयों की आतर्नाद चीखें यह मुरादाबाद और उसके मंदिरों से रमज़ान के नाम पर उतारे जाते लाउडस्पीकर यह कश्मीर और क़ाफ़िर के नाम पर मारे जाते हुए हिन्दू यह भारत और अपने ही […] Read more » भारत भारत कविता
कविता वही ज़िस्तेंसोराब है वही तिश्ना कारवाँ July 7, 2014 by जावेद उस्मानी | Leave a Comment वही ज़िस्तेंसोराब है वही तिश्ना कारवाँ प्यास बुझी कभी न बदल कभी समां सफर था सब्रतलब हमराही थे नातवाँ ठेस लगी ज़रा और सभी घबरा गए यहाँ गुमनाम रास्ते थे , मंज़िल थी बेनिशाँ जोशी जुनूँ में भटकते रहे जाने कहाँ कहाँ ख्वाहिशें बेहिसाब थी , कविशें थी कम शायद इसलिए ही नामुकम्मल रहा जहाँ […] Read more »