Category: साहित्‍य

लेख

वर्तमान में स्वामी विवेकानन्द के विचारों की प्रासंगिकता

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राजेन्द्र चड्ढा गर्व से कहो हिंदू हैं-इस मंत्र के दृष्टा थे, स्वामी रामकृष्ण परमहंस के “सप्तर्षि मण्डल के महर्षि” स्वामी विवेकानन्द, जो हमेशा कहा करते थे जब मनुष्य अपने पूर्वजों के बारे में लज्जित होने लगे तो सोच लो की उनका अन्त आ गया है। मैं हिन्दू हूँ, मुझे अपनी जाति पर गर्व है, अपने […]

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व्यंग्य

क्या राजनीतिज्ञों का नार्को और डी.एन.ए. परिक्षण अनिवार्य होना चाहिए……!

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विनायक  शर्मा एक गंभीर राजनैतिक व्यंग डी.एन.ए. और नार्को -परिक्षण , गाहे-बगाहे कहीं न कहीं समाचारों में यह शब्द पढने-सुनने में आ ही जाते हैं. जीवित कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाए जाने वाले तंतुनुमा अणु को डी-ऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल या डीएनए कहते हैं. इसमें अनुवांशिक कूट या जेनेटिक कोड निबद्ध रहता है. दूसरी ओर नार्को […]

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