राजनीति लेख गांधीवाद से लड़ती कांग्रेस June 7, 2011 / December 11, 2011 by डॉ. मनोज जैन | Leave a Comment डॉ. मनोज जैन टैक्स हैवन देशों की बैंकों में जमा देश की जनता के हकों से चुराकर जमा किया हुआ कालाधन वापिस देश में लाने के लिये राजधानी के रामलीला मैदान में रात को सो रहे अहिंसक और शान्तिपूर्वक सत्याग्रह कर रहे आन्दोलनकारियों पर केन्द्र सरकार द्वारा किये गये नादिरशाही हमले ने न केवल लोकतंत्र […] Read more » Congress कांग्रेस गांधीवाद
व्यंग्य बेटा सो जा वरना बाबा पकड़ ले जाएगा June 7, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव बाबा कालेधन के सख्त खिलाफ हैं। वो विदेश से कालाधन वापस मंगाकर ही छोड़ेंगे। बाबा का गुस्सा बड़ा अहिंसक है। बाबा बड़े गुस्से में हैं। लीजिए गुस्से में बाबा सरकार को धमकाने सीधे दिल्ली ही पहुंच गए। अबला सरकार भी बाबा के गुस्से के आगे थर-थर कांपने लगी। उसने अपने दूत बाबा […] Read more » बाबा पकड़ ले जाएगा बेटा सोजा
कविता ऐ लाला कुछ दे दे(कविता) June 6, 2011 / December 11, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on ऐ लाला कुछ दे दे(कविता) “समझौता’’ ऐ लाला कुछ दे दे मेरे बच्चे भूखे हैं, भिखारन ने लाला से सवाल किया लाला ने नोटों की गिनती बन्द कर नोट मुटठी में छुपा लिये और नजर उठाकर, भिखारन के शरीर पर गड़ा दी, उसके सोने जैसे तन को वो भूखे गिद्ध की तरह निहारने लगा ऐ लाला बच्चे भूखे हैं, कुछ […] Read more »
व्यंग्य पिटाई सरकारी योग में तप कहलाती है! June 6, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment हास्य-व्यंग्य-संदर्भःबाबा रामदेव पंडित सुरेश नीरव इश्क की दुनिया में महबूबा सरकार कहलाती है। जो अपने आशिक पर बड़े ही जुल्म ढाती है। मेरा तो मानना है कि सरकार कैसी भी हो,कहीं की भी हो सियासत की हो या मुहब्बत की हो जुल्म ही ढाती है। और यदाकदा,सुविधानुसार अपने चाहनेवाले को तबीयत से पिटवाती भी है। […] Read more » Baba Ramdev बाबा रामदेव
व्यंग्य भ्रष्टाचार महाक्ति कलियुगे!! June 5, 2011 / December 11, 2011 by अशोक गौतम | 1 Comment on भ्रष्टाचार महाक्ति कलियुगे!! बाजे गाजे की आवाज सुन हड़बड़ाया जाग कर बाहर निकला तो पैरों तले से जमीन खिसक गई। वे सुबह सुबह अपने फसली बटेरों के जुलूस के साथ झोटे सी गरदन को चंदे के गुड्डी कागजों की मालाओं से लक दक किए गंजे सिर पर लाल साफा बांधे, मुहल्ले के मास्टर जी की पहले तो ट्रांसफर […] Read more » Corruption कलियुगे भ्रष्टाचार महाक्ति
लेख एक अनशन जनता के लिए June 5, 2011 / December 11, 2011 by श्याम नारायण रंगा | 1 Comment on एक अनशन जनता के लिए अभी हाल ही में कुछ दिन पहले अन्ना हजारे ने अनशन किया और मान गए और अब बाबा रामदेव अनशन कर रहे हैं। ये सब अनशन और आंदोलन और धरना प्रदशर्न जो हमारे देश में होते हैं वे सिस्टम के खिलाफ होते हैं और सब लोग मिलकर सारा दोा सरकार व सरकार चलाने वाले नेताओं […] Read more » Public अनशन जनता
व्यंग्य भ्रष्टाचार ने बड़ौ दुख दीनौ June 5, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment ऱाष्ट्रकुल खेलों में भरपेट भ्रष्टाचार का खेल खेलने के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ का खेल आजकर देश में काफी लोकप्रिय हो रहा है। जिसे मौका मिलता है नही भ्रष्टाचार मिटाने पर आमादा हो जाता है। मीडिया भी क्रिकेट के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ की लुभावनी झांकी को दिखाते हुए छलक-छलक जा रहा है। और लोगबाग भी बड़े […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
गजल मैने खुद सा दुनिया मे बेवफा नही देखा June 4, 2011 / December 11, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment 1. मैने खुद सा दुनिया मे बेवफा नही देखा मैने खुद सा दुनिया मे बेवफा नही देखा फिर भी उस के होठो पर कुछ गिला नही देखा चॉद चख्रर्र से आकर कह गया है कानो मै लाख चेहरे देखे हे आप सा नही देखा आओ मेरी ऑखो मे देख कर सॅवर जाओ आज लग रहा […] Read more »
कहानी कहानी/क्षुद्रता की प्रतियोगिया June 4, 2011 / December 11, 2011 by गंगानन्द झा | 1 Comment on कहानी/क्षुद्रता की प्रतियोगिया गंगानन्द झा श्री विक्रमादित्य झा और प्रो. जीवनलाल मिश्र मिथिला के निम्न-मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि से थे, अपने अपने परिवारों के पहली पीढ़ी तथा तथा अभी तक के एकमात्र सदस्य, जो परम्परागत पृष्ठभूमि से उभड़कर आधुनिकता के परिवेश में जगह बनाने के अवसर के लाभ ले रहे थे। श्री विक्रमादित्य झा (बैंक के अधिकारी) अपनी भतीजी के […] Read more »
कविता पर्यावरण पर पाँच कविताएँ June 4, 2011 / December 11, 2011 by सतीश सिंह | 5 Comments on पर्यावरण पर पाँच कविताएँ 1. पेड़ फूलों को मत तोड़ो छिन जायेगी मेरी ममता हरियाली को मत हरो हो जायेंगे मेरे चेहरे स्याह मेरी बाहों को मत काटो बन जाऊँगा मैं अपंग कहने दो बाबा को नीम तले कथा-कहानी झूलने दो अमराई में बच्चों को झूला मत छांटो मेरे सपने मेरी खुशियाँ लुट जायेंगी। 2. नदियाँ हजार-हजार दु:ख उठाकर […] Read more » Atmosphere पर्यावरण
गजल न बादल होता न बरसात होती June 4, 2011 / December 12, 2011 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment न बादल होता न बरसात होती न बादल होता न बरसात होती दिन अगर न होता न रात होती। गम ही न होता अगर जिंदगी में बहार से भी न मुलाक़ात होती। नए लोगों की जो आमद न होती रंगों से कैसे फिर मुलाक़ात होती। लफ्ज़ ख़ूबसूरत लिखने न आते मुहब्बत में हमें फिर मात […] Read more »
कहानी कहाँ जायेगा विजय..!!! June 2, 2011 / December 12, 2011 by प्रत्यूष मिश्र | 3 Comments on कहाँ जायेगा विजय..!!! ”गुलाबी सपनों का शहर जयपुर और इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाते यहाँ के शॉपिंग मॉल्स,शाम गहराते ही जहाँ यूँ लगता है मानो इसकी भव्यता देखने को ही सूरज दुसरे छोर पर जा छुपा है.हाथ में हाथ डाले जोड़े ,अपनी गुफ्तगू में मशगूल तमाम युवक युवतियां ,खरीददारी करने आये लोगों का उत्साह उस पर तमाम […] Read more »