व्यंग्य व्यंग्य बाण : आधार कार्ड वाले हनुमान जी September 14, 2014 by विजय कुमार | 1 Comment on व्यंग्य बाण : आधार कार्ड वाले हनुमान जी लीजिए साहब, सचमुच देश में अच्छे दिन आ गये। अच्छे दिन क्या, रामराज्य कहिए। लोग अपने अगले दिनों की चिन्ता में घुलते रहते हैं; पर हमारे महान देश के अति महान सरकारी कर्मचारियों ने पूर्वजों की देखभाल शुरू कर दी है। दुनिया भर के इतिहासकार और अभिलेखागार वाले सिर पटक लें; कम्प्यूटर से लेकर नैनो […] Read more » आधार कार्ड वाले हनुमान जी
व्यंग्य समाज जोधाएं बचेंगी तब न… September 10, 2014 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on जोधाएं बचेंगी तब न… ऋतू कृष्णा चैटरजी अकबर को जोधा नही दोगे ठीक बात है किन्तु अपने लिए भी नही चुनोगे ये कहां का इंसाफ है, उलटा जहां तक संभव होगा जोधा को धरती पर आने ही नही दोगे। भईया! अकबर को जोधा देने न देने की स्थिति तो तब आएगी न जब जोधाएं बचेंगी। लड़कियां बची ही कहां […] Read more » जोधाएं बचेंगी तब न
व्यंग्य अच्छे दिन ! September 9, 2014 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल आर गांधी हाथ की दातुन से निपट कर आखिरी फोलक को थू …. कहने ही वाले थे कि चोखी लामा बीच में आ धमके … न दुआ न सलाम सरहद पार की फायरिंग की मानिंद सवाल दागा … बाबू आज का अखबार देखा … अनजान बालक सा चोखी का मुखारविंद तकता रह गया … […] Read more » अच्छे दिन
व्यंग्य भगवान भटकते गली-गली… August 15, 2014 by निर्मल रानी | Leave a Comment -निर्मल रानी- सम्राट अकबर के बारे में कहा जाता है कि वे पुत्र प्राप्ति की खातिर देवी से मन्नत मांगने माता वैष्णो देवी तथा ज्वाली जी के मंदिरों तक पैदल ही गये थे। आज भी यदि हम देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर जाएं तो हमें यह दिखाई देगा कि अब भी कई आस्थावान लोग […] Read more » भगवान भगवान भटकते गली-गली
व्यंग्य व्यंग्य बाण : आत्मकथा August 11, 2014 by विजय कुमार | Leave a Comment शर्मा जी कई दिन से बेचैन थे। जब भी मिलते, ऐसा लगता मानो कुछ कहना चाहते हैं; पर बात मुंह से निकल नहीं पा रही थी। मन की बात बाहर न निकले, तो वह भी पेट की गैस की तरह सिर पर चढ़ जाती है। रक्षाबंधन वाले दिन मैं उनके घर गया, तो शर्मानी मैडम […] Read more » व्यंग्य बाण : आत्मकथा
व्यंग्य किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहां August 4, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -अंशु शरण- 1. अवसरवाद लोकतन्त्र स्थापना के लिए वो हमेशा से ऐसे लड़ें, कि उखड़े न पाये सामंतवाद की जड़ें, इसलिए तो लोकतंत्र के हर स्तम्भ पर पूंजी के आदमी किये हैं खड़े। किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहाँ, संसद से लेकर अख़बार तक, हर जगह दलाल हैं भरे पड़े। तो हम क्यों ना जाये बाहर, […] Read more » किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहां व्यंग्य हिन्दी व्यंग्य
व्यंग्य वोट देवता जिन्दाबाद August 2, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- दिल्ली में ‘नमो सरकार’ बनने से सामाजिक संस्थाओं का रुख भी बदला है। जिस संस्था ने मुझे कभी श्रोता के रूप में बुलाने लायक नहीं समझा, पिछले दिनों उसके सचिव का फोन आया कि स्वाधीनता दिवस पर ‘संभ्रांत’ लोगों की सभा में मुझे भाषण देना है। यह सुनकर मैं डर गया। सम्भ्रान्त (सम्यक […] Read more » वोट वोट देवता वोट देवता जिन्दाबाद वोट व्यंग्य
व्यंग्य मोदी जी ! मंत्रियों की भी ‘क्लास’ लो July 14, 2014 / July 14, 2014 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कौटिल्य ने देश को चलाने के लिए किसी मंत्री की योग्यता की एक व्यवस्थित सूची हमें दी है। उनके अनुसार-‘‘एक मंत्री को देशवासी (विदेशी ना हो) उच्चकुलोत्पन्न (संस्कारित और उच्च शिक्षा प्राप्त) प्रभावशाली, कलानिपुण, दूरदर्शी, विवेकशील, (न्यायप्रिय दूध का दूध और पानी का पानी करने वाला-नीर-क्षीर विवेकशक्ति संपन्न) अच्छी स्मृति वाला, जागरूक, अच्छा वक्ता,(समाज में […] Read more » modi teach your ministers also मोदी जी ! मंत्रियों की भी ‘क्लास’ लो
व्यंग्य एक शोक संतप्त लेखक July 7, 2014 / October 8, 2014 by अशोक गौतम | Leave a Comment -अशोक गौतम- अत्यंत दुख के साथ अपने सभी चटोरे मित्रों को रूंधे गले से सूचित किया जाता है कि मेरे प्रिय कंप्यूटर का आकस्मिक निधन हो गया है। हालांकि कि वे इस सूचना को पढ़कर बल्लियां उछलेंगे, यह सोचकर कि चलो कुछ दिन तक तो मेरा लेखन बंद रहेगा। मित्रो! सच कहूं तो कंप्यूटर मेरा […] Read more » कंप्यूटर कंप्यूटर व्यंग्य
व्यंग्य पप्पू को अब भी समझ में नहीं आ रहा है… June 14, 2014 by वीरेंदर परिहार | 2 Comments on पप्पू को अब भी समझ में नहीं आ रहा है… -वीरेन्द्र सिंह परिहार- गत 12 जून को राहुल गांधी लोक सभा में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों से यह पूछते देखे गये कि सोलहवीं लोकसभा में बीजेपी को इतनी भारी जीत क्यों मिली। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि भाजपा के उभार की वजह क्या है? साम्प्रदायिक माहौल के बावजूद उत्तर प्रदेश से एक भी […] Read more » पप्पू भारतीय राजनीति राहुल गांधी
व्यंग्य दान वही जो दाता बनाए …! June 13, 2014 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment -तारकेश कुमार ओझा- भारतीय संस्कृति में दान का चाहे जितना ही महत्व हो, लेकिन यह विडंबना ही है कि दान समर्थ की ही शोभा पाती है। मैं जिस जिले में रहता हूं, वहां एक शिक्षक महोदय एेसे थे, जिन्होंने अपने सेवा काल में एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली, औऱ रिटायर होने पर जीवनभर […] Read more » दान वही जो दाता बनाए बाबा रामदेव भारतीय संस्कृति व्यंग्य शिल्पा शेट्टी
व्यंग्य टीवी का लड्डू June 10, 2014 / June 11, 2014 by बीनू भटनागर | 4 Comments on टीवी का लड्डू -बीनू भटनागर- एक पुरानी कहावत है कि ‘शादी का लड्डू जो खाये वो भी पछताये और जो न खाये वो भी पछताये।‘ ये कहावत टी.वी. के साथ भी सही साबित होती है, ‘टी. वी. जो देखे वो भी पछताये जो न देखे वो भी पछताये।‘ बहुत से बुद्धिजीवी किस्म के लोग कहते हैं,वो टी.वी. बिलकुल […] Read more » टीवी का लड्डू टीवी व्यंग्य व्यंग्य