विधि-कानून विविधा लंबित मामलों के निष्पादन में गति जरूरी April 26, 2016 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिंदुस्थानी लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्राय: तीन आधार स्तंभों की चर्चा की जाती रही है। इसमें विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका हैं। हालांकि मीडिया भी वर्तमान में चौथा स्तंभ बनकर हमारे सामने है। लेकिन सबसे पहले लोकतंत्र के तीन स्तंभों का ही प्रचलन था। संवैधानिक व्याख्या भी इन्हीं तीन स्तंभों का चित्र प्रस्तुत […] Read more » Featured
विधि-कानून विविधा चीफ जस्टिस की भावुकता! April 25, 2016 by हरि शंकर व्यास | Leave a Comment भारत के चीफ जस्टिस की आंखे नम हो जाए, आवाज भर्रा जाए तो मतलब गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भावुक हुए! वह भी उनसे अपील करते हुए! इसका अर्थ है न्यायपालिका और सरकार में बात दिल से बिगड़ी हुई है। दोनों एक-दूसरे की सोच और […] Read more » चीफ जस्टिस की भावुकता
विधि-कानून समाज भारतीय न्याय व्यवस्था पर श्वेत-पत्र April 19, 2016 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | Leave a Comment उदारीकरण से देश में सूचना क्रांति, संचार, परिवहन, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में सुधार अवश्य हुआ है किन्तु फिर भी आम आदमी की समस्याओं में बढ़ोतरी ही हुई है| आज भारत में आम नागरिक की जान-माल-सम्मान तीनों ही सुरक्षित नहीं हैं| ऊँचे लोक पदधारियों को सरकार जनता के पैसे से सुरक्षा उपलब्ध करवा देती है और […] Read more » Featured swet patra on indian judicial system भारतीय न्याय व्यवस्था श्वेत पत्र
राजनीति विधि-कानून संविधान में अपरिभाषित है धर्मनिरपेक्षता April 5, 2016 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on संविधान में अपरिभाषित है धर्मनिरपेक्षता प्रमोद भार्गव भारतीय समाज के बहुलतावादी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को ध्यान में रखकर संविधान में धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की नींव रखी गई थी, लेकिन उसमें अलग-अलग पहचानों को मिटाकर सबको एकरूप करने का उल्लेख नहीं है। हालांकि न्यायपालिका ने इस बारे में स्थिति साफ कि है, बावजूद उसके फैसले की भिन्न-भिन्न तरह से […] Read more » Featured secularism is undefined in constitution अपरिभाषित धर्मनिरपेक्षता संविधान
विधि-कानून विविधा …अब और न हो सकड़ पर मौत April 4, 2016 by संजय स्वदेश | Leave a Comment संजय स्वदेश हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जख्मी लोगों को मदद करने और अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों को अब पुलिस या अन्य कोई भी अधिकारी द्वारा जांच के नाम पर परेशान नहीं करने संबंधी केंद्र सरकार के जारी दिशानिर्देशों पर मुहर लगाते हुए एक फरमाना जारी किया है। यह सरकार और […] Read more » accidental death on road should be lessen Featured न हो सकड़ पर मौत सकड़ पर मौत
मीडिया लेख विधि-कानून विविधा साहित्य तब सम्पादक की जरूरत ही क्यों है ? April 2, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार इस समय की पत्रकारिता को सम्पादक की कतई जरूरत नहीं है। यह सवाल कठिन है लेकिन मुश्किल नहीं। कठिन इसलिए कि बिना सम्पादक के प्रकाशनों का महत्व क्या और मुश्किल इसलिए नहीं क्योंकि आज जवाबदार सम्पादक की जरूरत ही नहीं बची है। सबकुछ लेखक पर टाल दो और खुद को बचा ले जाओ। […] Read more » Featured need of editor तब सम्पादक की जरूरत ही क्यों है
राजनीति विधि-कानून मृतपत्र 356 का पुनर्जन्म April 1, 2016 by आरिफा एविस | Leave a Comment आरिफा एविस डॉ. बी. आर अम्बेडकर ने अनुच्छेद 356 के विषय में कहा था कि मैं यह उम्मीद करता हूँ कि यह एक ‘मृत पत्र’है जिसका कभी भी प्रयोग नहीं होगा। लेकिन अफसोस यह है कि भारतीय लोकतंत्र में न सिर्फ इसमें संसोधन किया गया बल्कि 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से केन्द्र सरकार द्वारा इसका […] Read more » article 356 of constitution Featured misuse of article 356 of constitution use of article 356 of constitution मृतपत्र 356 का पुनर्जन्म
जन-जागरण विधि-कानून समाज तीन तलाक,चार बीवियाँ: कब तक? March 31, 2016 by शंकर शरण | 2 Comments on तीन तलाक,चार बीवियाँ: कब तक? शंकर शरण सुप्रीम कोर्ट में सायरा बानो (फिल्म स्टार नहीं) ने तीन तलाक के शरीयत कानून को चुनौती दी है। कोर्ट ने सुनवाई मंजूर करते हुए केंद्र सरकार को अपनी स्थिति रखने का नोटिस दिया है। सायरा शाह बानो, ताहिरा बाई, फुजलुन बी, जोहरा खातून, शमीम आरा, इकबाल बानो, निसा खातून, शमीमा फारुखी, जैसी उन […] Read more » custom of keeping four wives in muslims Featured triple talak in muslims चार बीवियाँ तीन तलाक
विधि-कानून विविधा संवैधानिक रूप लेता आधार March 15, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव हर नागरिक को पहचान देने के लिए शुरू की गई आधार योजना को अब राजग सरकार ने लोकसभा से विधेयक के रूप में पारित कराकर साफ कर दिया है कि वह आधार को संवैधानिकता प्रदान करने के पक्ष में है। इस विधेयक को आधार मसलन ‘लक्षित वित्तीय एवं अन्य सरकारी सहायता लाभ एवं […] Read more » aadhar card getting constitutional Featured आधार आधार कार्ड संवैधानिक रूप
राजनीति विधि-कानून आरक्षण नीति का संवैधानिक प्रावधान March 14, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा राधेश्याम द्विवेदी सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए भारत सरकार ने अब भारतीय कानून के जरिये सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयों और धार्मिक/भाषाई अल्पसंख्यक शैक्शिक संस्थानों को छोड़कर सभी सार्वजनिक तथा निजी […] Read more » 5 year reservation system demerits of reservation Featured reservation policy आरक्षण आरक्षण नीति आरक्षण नीति का संवैधानिक प्रावधान आरक्षण से नुकसान प्रमोशन में आरक्षण
राजनीति विधि-कानून लोक की सुरक्षा March 14, 2016 / March 14, 2016 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान मनोवैज्ञानिकों के अनुसार व्यक्ति में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार की प्रवृत्तियां मौजूद रहती हैं। समाज में शांति और व्यवस्था के लिए आवश्यक है नकारात्मक प्रवृत्तियों का शमन तथा सकारात्मक वृत्तियों की रक्षा एवं प्रोत्साहन। धर्मानुग्राही न्याय-प्रणाली का सहारा लेकर इस देश का अभिजन वर्ग सहस्राब्दियों तक समाज के शीर्ष पर विराजमान रहा […] Read more » Featured आपराधिक न्याय संस्थान औपनिवेशिक न्याय पद्दति जनविरोधी उपनिवेशवादी कानून न्यायपालिका भ्रष्टाचार राष्ट्रद्रोह-कानून लोक की सुरक्षा
विधि-कानून विविधा समाज उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता February 23, 2016 by प्रो. एस. के. सिंह | 1 Comment on उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता अभी हाल ही में तेलंगाना सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर कुलपति की नियुक्ति के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित योग्यताओं में परिवर्तन किया है। विश्वविद्यालय प्रणाली में प्रोफेसर अथवा ख्याति प्राप्त शोध/अकादमिक प्रशासनिक संगठन में समतुल्य पद पर 10 वर्ष केअनुभव के स्थान पर तेलंगाना सरकार ने यह 5 वर्ष कर दिया […] Read more » Featured उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता