विधि-कानून दबाव की राजनीति में इतिहास और तथ्य की विदाई / जगदीश्वर चतुर्वेदी October 1, 2010 / June 6, 2012 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 55 Comments on दबाव की राजनीति में इतिहास और तथ्य की विदाई / जगदीश्वर चतुर्वेदी समझौते , समाधान या न्याय के नाम पर इतिहास और तथ्यों की अनदेखी करने, इतिहास और तथ्य की बलि चढ़ाने का अधिकार किसी भी व्यक्ति या संस्थान को नहीं दिया जा सकता। चाहे वह जज ही क्यों न हों। लखनऊ बैंच ने कई मुद्दों पर इतिहास और तथ्यों की अनदेखी की है। आधुनिककाल में इतिहास […] Read more » Ayodhya Movement रामजन्मभूमि
विधि-कानून एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? July 28, 2010 / December 23, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 8 Comments on एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप्त होगा। अनुच्छेद13 में यह भी कहा गया है कि यदि उक्त प्रावधान का उल्लंघन करने वाला या कम करने वाला […] Read more » Constitution संविधान
विधि-कानून प्लेगिएरिज्म व कॉपीराईट कानून की उलझन June 29, 2010 / December 23, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment -सतीश सिंह 27 जून के दैनिक हिन्दुस्तान में ‘शब्द’ पृष्ठ के अंतगर्त युवा स्वर स्तंभ में एक स्पष्टीकरण प्रकाशित की गई है कि 20 जून के अंक में युवा स्वर के तहत प्रकाशित कविता ‘खूंटी में टंगी जिंदगी’ पूर्व में सितंबर 2001 की कादंबिनी पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी थी। दैनिक हिन्दुस्तान को यह सूचना […] Read more » Copyright Law कॉपीराईट कानून प्लेगिएरिज्म
विधि-कानून आरटीआई : भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम May 29, 2010 / December 23, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment on आरटीआई : भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम -फ़िरदौस ख़ान देश की जनता को क़रीब साढ़े चार साल पहले मिले सूचना के अधिकार ने काफ़ी राहत दी है। इस सुविधा के चलते जहां लोगों के कामकाज होने लगे हैं, वहीं ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां सूचना के अधिकार के तहत लोगों को सूचना न मांगने या मांगी गई सूचना का आवेदन […] Read more » Corruption आरटीआई भ्रष्टाचार
विधि-कानून हृदय प्रदेश में फिर दागदार हुई वर्दी May 28, 2010 / December 23, 2011 by लिमटी खरे | 2 Comments on हृदय प्रदेश में फिर दागदार हुई वर्दी -लिमटी खरे हरियाणा प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर के द्वारा रूचिका गहरोत्रा के साथ की गई ज्यादती, रूचिका का काल कलवित होना और इंसाफ के लिए बीस साल तक रगडना, यह सब अभी लोगों की स्मृति से विस्मृत नहीं हुआ है, कि अचानक ही देश के हृदय प्रदेश के छतरपुर जिले में दो […] Read more » Dress वर्दी
विधि-कानून जनहित याचिकाओं की राह में यूपी हाईकोर्ट का रोड़ा! May 21, 2010 / December 23, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on जनहित याचिकाओं की राह में यूपी हाईकोर्ट का रोड़ा! -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ भारत के न्यायिक इतिहास में उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट ऐसा पहला हाई कोर्ट हो गया है, जिसमें अब किसी गरीब और आम व्यक्ति या किसी भी संस्था की ओर से आसानी से जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकेगी। हाई कोर्ट की प्रशासनिक कार्यवाही के तहत जारी किये गये उक्त आदेश को देखने […] Read more » RTI आरटीआई जनहित याचिका
विधि-कानून भारत को आईएएस कल्याणकारी राज्य घोषित कर दिया जावे! April 14, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 2 Comments on भारत को आईएएस कल्याणकारी राज्य घोषित कर दिया जावे! देश के आम व्यक्ति के स्वास्थ्य की चिन्ता इस देश की सरकार को भी है, इस बात को कागज पर प्रमाणित करने के लिये और जरूरत पडने पर कहीं दिखाने के लिये भी कुछ ऐसे कदम सरकार द्वारा उठाये जाते हैं, जिनका जनता के स्वास्थ्य से कोई सम्बन्ध नहीं होता है। इसी क्रम में गुणवत्तापूर्ण […] Read more » IAS आईएएस
विधि-कानून भारत में न्याय पाने का सफर आसान नहीं March 22, 2010 / December 24, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment ठीक ही कहा गया कि न्याय मिलने में अगर देरी होती है तो वह न्याय नहीं मिलने के समान है। स्वस्थलोकतंत्र की पहचान स्वस्थ न्यायपालिका को माना जाता है, लेकिन हमारे देश की न्याय व्यवस्था इतनी लचर है कि दो-तीन पीढ़ियाँ गुजर जाती हैं, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता है। कायदे से बदतर […] Read more » Court न्याय न्यायपालिका न्यायालय
राजनीति विधि-कानून न्यायपालिका और लोकतंत्र – राजीव तिवारी March 13, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका का समन्वित स्वरूप ही लोकतंत्र होता है। लोकतंत्र में न्यायपालिका, विधायिका तथा कार्यपालिका एक दूसरे के पूरक भी होते हैं तथा नियंत्रक भी। इसका अर्थ यह हुआ कि इन तीनों में से कोई अंग कमजोर पड़ रहा हो तो शेष दो उसे शक्ति दें और यदि कोई अंग अधिक मजबूत हो […] Read more » Democracy न्यायपालिका लोकतंत्र
विधि-कानून बातचीत नहीं करना क्रूरता एवं तलाक का आधार! March 11, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on बातचीत नहीं करना क्रूरता एवं तलाक का आधार! हिन्दू विवाह अधिनियम में क्रूरता को तलाक का आधार माना गया है, लेकिन क्रूरता की परिभाषा को लेकर शुरू से ही निचली अदालतों में मतैक्य का अभाव रहा है। इसलिये जब भी क्रूरता का कोई नया मामला सामने आता है तो पक्षकार अन्तिम निर्णय के लिये सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा अवश्य ही खटखटाते हैं। सुप्रीम […] Read more » Hindu Marrige Act हिन्दू विवाह अधिनियम
विधि-कानून आत्मरक्षा का अधिकार February 21, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | Leave a Comment कुछ समय पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने आत्मरक्षा के अधिकार से जुडे मामले में अपने निर्णय में कहा था कि कानून का पालन करने वाले लोगों को कायर बनकर रहने की जरूरत नहीं है, खासकर तब, जबकि आपके ऊपर गैरकानूनी तरीके से हमला किया जाए। प्रिण्ट मीडिया ने इसे कोर्ट का अति-न्यायिक सक्रियता दर्शाने वाला निर्णय […] Read more » Right to self defense आत्मरक्षा का अधिकार
विधि-कानून सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक टिप्पणी January 30, 2010 / December 25, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 6 Comments on सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक टिप्पणी पहली पत्नी के रहते कोई भी सरकारी कर्मचारी दूसरा विवाह नहीं कर सकता सुप्रीम कोर्ट की उस ऐतिहासिक टिप्पणी से मुस्लिम महिलाओं को काफ़ी राहत मिलेगी, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि पहली पत्नी के रहते कोई भी सरकारी कर्मचारी दूसरा विवाह नहीं कर सकता. दरअसल, कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस फ़ैसले को सही […] Read more » Supreme Court मुस्लिम महिला सुप्रीम कोर्ट