Category: राजनीति

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ट्रंप-मोदी मुलाकात ने चीन की बढ़ाई कुंठा

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  चीन की यह दोगली कूटनीति तमाम राजनीतिक मुद्दों पर साफ दिखाई देती है। चीन बार-बार जो आक्रामकता दिखा रहा है, इसकी पृष्ठभूमि में उसकी बढ़ती ताकत और बेलगाम महत्वाकांक्षा है। यह भारत के लिए ही नहीं दुनिया के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। दुनिया जनती है कि भारत-चीन की सीमा विवादित है। सीमा विवाद सुलझाने में चीन की कोई रुचि नहीं हैं। वह केवल घुसपैठ करके अपनी सीमाओं के विस्तार की मंशा पाले हुए है। चीन भारत से इसलिए नाराज है, क्योंकि उसने जब तिब्बत पर कब्जा किया था, तब भारत ने तिब्बत के धर्मगुरू दलाई लामा के नेतृत्व में तिब्बतियों को भारत में शरण दी थी। जबकि चीन की इच्छा है कि भारत दलाई लामा और तिब्बतियों द्वारा तिब्बत की आजादी के लिए लड़ी जा रही लड़ाई की खिलाफत करे ? दरअसल भारत ने तिब्बत को लेकर शिथिल व असंमजस की नीति अपनाई है। जब हमने तिब्बतियों को शरणर्थियों के रूप में जगह दे ही दी थी, तो तिब्बत को स्व तंत्र देश मानते हुए अंतराष्ट्रीय मंच पर समर्थन की घोषणा करने की जरुरत भी थी ? डाॅ राममनोहर लोहिया ने संसद में इस आशय का बयान भी दिया था। लेकिन ढुलमुल नीति के कारण नेहरु  ऐसा नहीं कर पाए ? इसके दुष्परिणाम भारत आज भी झेल रहा है?

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अमेरिका ने दिखाया पाकिस्तान को आइना

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अमेरिका ने भी आतंकवाद के दंश को करीब से भोगा है। इसके साथ ही विश्व के अनेक देशों ने भी इस्लामिक आतंकवाद का साक्षात्कार किया है। वर्तमान में यह पूरी दुनिया जान चुकी है कि आतंकवाद कितना खतरनाक होता है। कश्मीर घाटी में भारत आतंकवाद को लम्बे समय से भोग रहा है। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने जम्मू कश्मीर सहित भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को दोषी ठहराया है।

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भारत को अमेरिका बनाने के संकल्प का सत्य

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अमेरिका के कारोबारी दिग्गजों को संबोधित करते हुए मोदी ने भरोसा दिलाना चाहा कि भारत आर्थिक सुधारों की राह पर चल रहा है और भारत में निवेश करना तथा व्यापार करना पहले से कहीं आसान हो गया है, इसलिए भारत में पूंजी लगाने में वे तनिक न हिचकें। आर्थिक सुधारों की दिशा में अपनी सरकार के नए व बड़े कदम के रूप में उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी की चर्चा की। इसी के साथ उन्होंने भारत-अमेरिका का व्यापार कुछ ही बरसों में कई गुना बढ़ जाने की उम्मीद जताई। मोदी की इस अमेरिका यात्रा की अहमियत जाहिर है और इसे संभावनाभरा भी माना जा रहा है।

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भारत-अमेरिका के नए दौर के संबंध

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प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के पहले ही भारत को दो मोर्चों पर बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। दोनों को लेकर भारत सरकार लंबे समय से राजनयिक स्तर पर अमेरिका पर दबाव बना रही थी। जिसमें कि पहला यह कि अमेरिका ने भारत को 22 अमेरिकी ‘गार्जियन ड्रोन’ के सौदे को मंजूरी दे दी है। ये ड्रोन अभी सिर्फ अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है, जिसेकि प्राप्‍त करने के लिए भारत लम्‍बे समय से प्रयासरत था। इस सौदे को लेकर ट्रंप के पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन ने वादा भी किया था। किंतु अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा अपना किया वादा पूरा नहीं कर पाए थे जो अब जाकर ट्रम्‍प काल में पूरा होने जा रहा है।

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राष्ट्रपति चुनावों में अब राम बनाम मीरा का मुकाबला

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 कोविंद की सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि वह बेहद सरल स्वभाव के मिलनसार और खुले दिल वाले तथा संविधान विशेषज्ञ भी है। भाजपा ने कोविंद को  राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर यह साबित कर दिया है कि अब भाजपा में उन्हीं लोगों का नाम आगे आया करेगा जो कि मीडिया की चर्चा से कोसों दूर रहा करेंगे । राष्ट्रपति पद के लिए मीडिया में तरह- तरह के नामों की चर्चा चल रही थी लेकिन पीरएम मोदी ने आखिरकार सभी को चौंका कर रख दिया।

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कोविंद अगर गुमनाम हैं, तो जिम्मेदार कौन है?

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अब हम सब जान चुके हैं कि रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल हैं। दो बार के राज्यसभा सांसद रह चुके कोविंद पहले उच्चतम न्यायालय में वकालत करते थे और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सहयोगी रह चुके हैं। वह पहले आईआईएम कोलकाता के बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। आजकल वो अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी हैं, जिसके अपने सरोकार होते हैं जो मीडिया-सोशल मीडिया के लोगों को ज्यादातर नहीं दिखते या वो देखना नहीं चाहते। यहां सवाल यह उठता है कि इतना सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक जीवन होने के बावजूद वो हमें दिखाई क्यों नहीं दिए या ऐसे कहें कि हमारी मीडिया ने उन्हें क्यों नहीं दिखाया?

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