राजनीति बंगाल में ममता सरकार ने बदले सुर January 18, 2018 / January 18, 2018 by संजय सिन्हा | Leave a Comment -संजय सिन्हा पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अजीब सा बदलाव दिख रहा है.राज्य के मुसलमानों को वरीयता देने वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अब अचानक हिन्दुओं की तरफ रुख कर लिया है,मानो सरकार का ह्रदय परिवर्तन हो गया हो.एकदम अचानक से बारह हज़ार हिंदी पुजारियों को सम्मानित करना,हिन्दुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रियता बढ़ाना […] Read more » Featured Mamta government changes ideology in Bengal तृणमूल कांग्रेस नरम हिंदुत्व बंगाल भाजपा ममता सरकार
राजनीति भारत-इजराइल संबंधों की नई उड़ान January 17, 2018 / January 17, 2018 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत को लेकर इजराइयली क्या सोचते हैं, यह इस बात से पता चलता है कि वहां रहकर अपनी उच्चशिक्षा पूरी कर रहे भारतीय अपने को सबसे अधिक सुरक्षित और सम्मानित अनुभव करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री ने जब पिछले साल 3 जुलाई को इजराइल की अपनी यात्रा की तो जो अनुभव उनके […] Read more » Featured India-Israel India-Israel relations New India-Israel relations ties भारत-इजराइल भारत-इजराइल संबंध
राजनीति महिला कल्याण से जुड़ेगी हज सब्सिडी January 17, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को इस साल से अब कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। अल्पसंख्यकों मामलों के मंत्री मु,तार अब्बास नकबी ने यह ऐलान करते हुए चैंसठ साल पुरानी व्यस्था को एक झटके में खत्म कर दिया। हज यात्रियों को करीब 700 करोड़ की छूट प्रतिवर्ष दी जाती है। अब इस धनराशि […] Read more » Featured Haj subsidy Haj subsidy linked to women's welfare women's welfare महिला कल्याण हज यात्रा हज सब्सिडी
राजनीति सिक्का और पर्ची न्याय January 15, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment प्रायः शर्मा जी मेरे घर नहीं आते। बुजुर्ग व्यक्ति हैं, इसलिए मैं ही दूसरे-चौथे दिन उनके घर चला जाता हूं; पर आज ठीक से सुबह हुई भी नहीं थी कि वे आ गये। उनकी आंखें न्यायमूर्ति चेलमेश्वर जैसी ही उदास थीं। मैंने मुंह धोने के लिए उन्हें गरम पानी दिया। गिलास भर अदरक वाली चाय […] Read more » Coin and prescription justice Featured न्याय पर्ची न्याय सिक्का न्याय
राजनीति राज्यसभा की प्रासंगिकता पर सवाल क्यों? January 11, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment –ललित गर्ग- आम आदमी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर विवाद होना और सवाल उठना स्वाभाविक है। इस मसले ने एक बार फिर राज्यसभा की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। भारत में लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत जिस तरह की शर्मनाक घटनाएं घट रही हैं, इसमें आम आदमी पार्टी के द्वारा […] Read more » Featured Question about the relevance of the Rajya Sabha Rajya Sabha relevance of the Rajya Sabha राज्यसभा राज्यसभा की प्रासंगिकता पर सवाल
राजनीति छत्तीसगढ़ में क्राउडफंडिंग की सुबह January 11, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों, जनकल्याण उपक्रमों और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग क्राउडफंडिंग का सहारा ले रहे हैं। यह भारतीय चन्दे का आयात किया हुआ एक स्वरूप है, एक प्रक्रिया है। इसमें जहां पारदर्शिता होती है वही जनता के घन के दुरुपयोग होने की संभावनाएं नगण्य हो जाती है। […] Read more » chhattisgarh crowdfunding crowdfunding in Chhattisgarh Featured The morning of crowdfunding in Chhattisgarh क्राउडफंडिंग छत्तीसगढ़
राजनीति निर्वाचन बाॅन्डः राजनीतिक चंदे में पारदर्षिता का उपाय ? January 9, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः- निर्वाचन बाॅन्ड के जरिए ही राजनीतिक दल ले सकेंगे चंदा प्रमोद भार्गव कालेधन पर रोक और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दृष्टि से राजनीतिक पार्टियां अब केवल निर्वाचन बाॅन्ड के जरिए ही चंदा ले सकेंगी। भारत ऐसा पहला देश हो गया है, जिसने चुनावनीति को पारदर्शी बनाने के लिए इस तरह के बाॅन्ड का […] Read more » A solution for transparency in political donations Election Bond Featured political donations transparency in political donations इलेक्टोरल बाॅन्ड निर्वाचन बाॅन्ड राजनीतिक चंदे में पारदर्षिता वित्त विधेयक-2017
राजनीति यह कैसी जुगलबन्दी January 6, 2018 by विपिन किशोर सिन्हा | 1 Comment on यह कैसी जुगलबन्दी जब-जब यह देश महानता की ओर बढ़ने की कोशिश करता है, कुछ आन्तरिक शक्तियां बौखला जाती हैं और इसे कमजोर करने की अत्यन्त निम्न स्तर की कार्यवाही आरंभ कर देती है। जाति और संप्रदाय इस देश के सबसे नाजुक मर्मस्थान हैं। इसे छूते ही आग भड़क उठती है। विगत सैकड़ों वर्षों का इतिहास रहा है […] Read more » Featured उमर खालिद कोरेगांव जिग्नेश मेवाणी जुगलबन्दी
राजनीति भीमा कोरेगांव : इतिहास की बुनियाद पर जातीय सियासत January 5, 2018 / January 5, 2018 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on भीमा कोरेगांव : इतिहास की बुनियाद पर जातीय सियासत प्रमोद भार्गव भारत का यह दुर्भाग्य ही है कि आजादी के 70 साल बाद भी जातीय दुराग्रह यहां-वहां हिंसा की क्रूर इबारत लिख जाते हैं। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि आज तक हम इतिहास के पन्नों पर दलित और आदिवासी समुदायों के आकांता मुस्लिमों और अंग्रेजों से हुए संघर्ष को ठीक से रेखांकित नहीं कर […] Read more » casteist politics Ethnic community Ethnic community on the basis of history Featured जातीय सियासत भीमा कोरेगांव
राजनीति विश्ववार्ता पाकिस्तान का तोड़ खोजना जरूरी January 5, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः हाफिज सईद की रैली में फिलस्तीन के राजदूत की उपस्थिति प्रमोद भार्गव द्विपक्षीय संबंधों के निर्वाह की दृष्टि से यह ठीक है कि फिलस्तीन ने पाकिस्तान से अपने राजदूत वालीद अबु अली को वापस बुला लिया। लेकिन एक आतंकवादी की सभा में किसी देश के राजनयिक का शामिल होने पर भारत का ऐतराज स्वाभाविक […] Read more » Featured फिलस्तीन के राजदूत वालीद अबु अली हाफिज सईद की रैली हाफिज सईद की रैली में फिलस्तीन के राजदूत की उपस्थिति
राजनीति विधि-कानून तो क्या ट्रायल कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है January 5, 2018 by वीरेंदर परिहार | 1 Comment on तो क्या ट्रायल कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है वीरेन्द्र सिंह परिहार 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में सी.बी.आई. की विशेष अदालत का फैसला जिसमे ए. राजा और काणिमोझी समेत अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया, एक बहुत ही आश्चर्यजनक फैसला है। इतना आश्चर्य जनक कि देश के बहुत से लोग इस फैसले को लेकर सन्न हैं। ऐसा इसलिये कि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे […] Read more » 2 जी स्पेक्ट्रम मामले 2g spectrum Featured trial court verdict on supreme court ए. राजा काणिमोझी चारा घोटाला ट्रायल कोर्ट शशिकला सर्वोच्च न्यायालय
राजनीति बांग्लादेशी घुसपैठियों पर निर्णायक मूड में नमो सरकार January 4, 2018 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment अंततः संघ परिवार की नीतियों के अनुरूप बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदर्भ में असम की सर्वानंद सरकार ने व केंद्र कीनमो सरकार ने अपना राष्ट्रवादी मास्टर प्लान लागू कर दिया है. 22 फरवरी 2014 को, लोस चुनाव के दौरान भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने असम के सिलचर में कहा था- ‘बांग्लादेश से दो तरह के लोगभारत में आए हैं. एक शरणार्थी हैं जबकि दूसरे घुसपैठिये. अगर हमारी सरकार बनती है तो हम बांग्लादेश से आएहिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के साथ ही घुसपैठियों को यहां से बाहर खदेड़ने का भी वादा करते हैं.’ भाजपा नेअसम में लोकसभा व विधानसभा दोनों चुनावों में “जाति, माटी, भेटी” यानि जाति, जमीन और अस्तित्व की रक्षा करनेके नाम पर वोट मांगे थे. सत्ता में आने के बाद 19 जुलाई 2016 को नमो सरकार के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ‘नागरिकता(संशोधन) विधेयक,2016’ पेश किया. यह विधेयक 1955 के उस ‘नागरिकता अधिनियम’ में बदलाव के लिए था, जिसकेजरिए किसी भी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय होती है. इस विधेयक में प्रावधान था कि अफगानिस्तान, बांग्लादेशऔर पकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को ‘अवैध प्रवासी’ नहीं माना जाएगा.’इसका सीधा सा अर्थ ये था कि इसके जरिए बांग्लादेशी हिंदुओं को भारत की नागरिकता दी जानी थी. अब इस दिशा मेंठोस कदम के रूप में NRC यानि नैशनल रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटिजन का पहला ड्राफ्ट 31 दिसंबर की रात सामने आयाहै. इस ड्राफ्ट में असम के कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों को जगह दी गई और उन्हें कानूनी तौर परभारत का नागरिक मान लिया गया है. वहीं बचे हुए लोगों का प्रमाणीकरण हो रहा है, जिसके बाद उनका नाम इसलिस्ट में शामिल किया जाएगा. जो व्यक्ति इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज नहीं करवा पाएंगे या उनके पास इसके लिएज़रूरी कागजात नहीं होगें, उन्हें असम का नागरिक नहीं माना जाएगा और उन्हें देश के बाहर जाना पड़ेगा. 1971 मेंजब पाकिस्तान विभाजन ले पश्चात बांग्लादेश अस्तित्व में आया, उसके बाद से ही असम घुसपैठियों के विषय चर्चितरहने लगा था. असम के रास्ते घुसपैठिये देश में घुसकर देश के प्रत्येक हिस्से में जाकर बसने लगे थे. बांग्लादेश के निर्माणके दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई व वहां की एक बड़ी आबादी भारत आकर बस गई थी, इसमें हिंदुओं के अलावामुस्लिमों की भी बड़ी आबादी थी. 1971 के इस दौर में लगभग 10 लाख बांग्लादेशी असम में ही बस गए. 1971 के बादभी बड़े पैमाने पर बांग्लादेशियों का असम में आना जारी रहा. बांग्लादेश के लोगों की बढ़ती जनसंख्या ने असम केस्थानीय लोगों में भाषायी, सांस्कृतिक व सामाजिक असुरक्षा की स्थितियां उत्पन्न कर दी. घुसपैठिये असम में नाना प्रकारसे अशांति, अव्यवस्था, अपराध व उत्पात मचाने लगे. 1978 में असम के मांगलोडी लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव केदौरान चुनाव आयोग के ध्यान में आया कि इस चुनाव में वोटरों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो गई है. चुनावी गणित वतुष्टिकरण की नीति के चलते सरकार ने 1979 में बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिक बना लिया.असम में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सरकारी नीति के विरोध में आन्दोलन हुआ और असम भड़क गया. आसू व अगप को असम की स्थानीय जनता ने बहुतप्यार व समर्थन दिया. छात्र संगठन आसू ने असम आंदोलन के दौरान ही 18 जनवरी 1980 को केंद्र सरकार को एकNRC अपडेट करने हेतु ज्ञापन दिया. इस बड़े व हिंसक आन्दोलन की परिणति 1985 में असम में राजीव गांधी के साथ “असम समझौते” के रूप में हुई. 1999 में वाजपेयी सरकार ने इस समझौते की समीक्षा की और 17 नवंबर 1999 कोतय किया गया कि असम समझौते के तहत NRC को अपडेट किया जाना चाहिए. अटल जी की सरकार जाने के बाद2005 में मनमोहन सरकार भी इस निर्णय पर कायम रही व NRC की समीक्षा हेतु बारपेटा और चायगांव में पायलटप्रोजेक्ट शुरू किया गया. असम के कुछ संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और वहां हिंसा हो गई और असम कीगोगोई सरकार इसमें बेतरह विफल रही. इसके बाद नेता सर्वानंद सोनोवाल ने 2013 में बांग्लादेश के घुसपैठ के मुद्दे कोसुप्रीम कोर्ट में उठाया और न्यायालय ने NRC 1951 को अपडेट करने का आदेश दिया जिसमें 25 मार्च, 1971 से पहलेबांग्लादेश से भारत में आने वाले लोगों को स्थानीय नागरिक माने जाने की बात कही गई थी और उसके बाद के असम मेंपहुंचने वालों को बांग्लादेश वापस भेजने के आदेश दे दिए गए थे. सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद ही NRC कीसमीक्षा व अपडेशन का कार्य प्रारम्भ हुआ और 1951 की जनगणना में शामिल अल्पसंख्यकों को राज्य का नागरिक मानलिया गया. 1951 से 25 मार्च, 1971 के बीच असम में आने वाले बांग्लादेशी शरणार्थियों के पास वैध कागजात नहीं थे.एनआरसी को अपडेट करने के दौरान पंचायतों की ओर से जारी नागरिकता प्रमाणपत्र को मान्यता नहीं दी जा रही थी.इसके बाद मामला असम हाईकोर्ट में पहुंच गया. हाई कोर्ट ने लगभग 26 लाख लोगों के पहचान के दस्तावेज अवैध करारदे दिए. इसके बाद मामला एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया. असम की सर्वानंद सरकार ने न्यायालय केआदेशानुसार 31 दिसंबर 2017 को नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया जिसमेंअसम के कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों को कानूनी तौर पर भारत का नागरिक माना गया. यद्दपिरजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेष ने ड्राफ्ट को जारी करते हुए कहा है कि लोगों कलो घबराना नहीं चाहिए व इसकेबाद और वेरिफिकेशन होगा व और ड्राफ्ट भी जारी होगा. लिस्ट जारी होने के बाद असम सरकार के वित्त मंत्री औरनागरिकता रजिस्टर के इंचार्ज हेमंत विश्व शर्मा ने कहा कि जिन लोगों का नाम एनआरसी रजिस्टर में नहीं है, उन्हें हरहाल में देश छोड़ना होगा. अब देखना यह है कि हमारा देश एक दीर्घ प्रतीक्षा के बाद किस प्रकार और कब बांग्लादेशीघुसपैठियों की समस्या से मुक्ति पायेगा. Read more » Bangladeshi infiltration Bangladeshi intruders Featured नमो सरकार बांग्लादेशी बांग्लादेशी घुसपैठि