Category: राजनीति

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योगी सरकार के फैसलों से बड़े बदलाव की आहट

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ऊर्जामंत्री ने बिजली विभाग से अन्य विभागों से 10 हजार करोड़ रूपये वसूलने के निर्देश दिये हैं यह प्रदेश के इतिाहस मे पहली बार होने जा रहा हैं । केंद्र सरकार ने भी प्रदेश में सड़कों व पुलों आदि के निर्माण के लिए भारी -भरकम खजाना खोल ही दिया है। यह मुख्यमंत्री की सख्ती का ही असर है कि अफसरों ने जनसुनवाई प्रारम्भ भी कर दी है। वहीं बहुत से अफसर अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं। बैठकों में ही अफसरों को डांट पड़ने लग गयी है।

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आर्तनाद अन्नदाता का!

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आला कमान व राहुल बाबा की नजरों में हीरो बनने की चाहत में माननीय दीक्षित जी ने रविवार को अपने एक बयान में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल विपिन रावत 'सड़क का गुंडा करार दे डालाÓ उनकी व कांग्रेस की बुरी तरह भद्द पिटने पर भले ही दीक्षित ने माफी मांग ली पर खुद को, कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचना था वो तो उन्होने पहुंचा ही दिया। कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि आखिर कांग्रेस के रणनीतिकार कांग्रेस को किस दिशा में ले जाना चाहते है। राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता समझ में आती है पर सोनिया गांधी का मौन समझ से परे है।

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प्रणव दा के नाम पर सर्वसम्मति क्यूँ जरूरी?

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राष्ट्रपति प्रणव दा की एक और अनूठी सफलता रही कि वे राजनीति दृष्टि से भले ही निष्क्रिय रहे लेकिन राष्ट्रीय हितों के लिये सदैव सक्रिय बने रहे। उनकी सक्रियता से कार्यपालिका, विधायिका या न्यायपालिका के कार्यक्षेत्र में कभी भी अतिक्रमण नहीं हुआ। लेकिन वे भारत की समस्याओं के लिये सदैव जागरूक बने रहे, लोकतंत्र को मजबूती देने के लिये उनके प्रयास जारी रहे। साहित्य, शिक्षा एवं चिन्तन के लिये वे एक-एक पल का उपयोग करते हुए दिखाई दिये। जैसे कि एस. राधाकृष्णन राष्ट्रपति बनने के बाद भी अकादमिक रूप से काफी सक्रिय थे। एपीजे कलाम राष्ट्रपति के रूप में काफी विजिबल और एक्टिव रहे।

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जीप के बोनट पर फारुक अहमद धर और बचाव में उतरे उमर अब्दुल्ला –

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उमर अब्दुल्ला और उनकी मानवाधिकार ब्रिगेड यह तो चिल्ला रही है कि मेजर गोगोई को , फारुख अहमद धर को जीप के बोनट पर नहीं बिठाना चाहिए था लेकिन यह नहीं बताती कि उस हालत में उसे इसके स्थान पर क्या करना चाहिए था ? स्थल सेनाध्यक्ष जनरल रावत ने बिल्कुल सही प्रश्न उठाया है कि यदि सीमा पर शत्रुओं के मन में और देश के भीतर देश के खिलाफ बन्दूक़ उठा लेने वालों के मन में सेना का भय नहीं रहेगा तो देश का भविष्य ख़तरे में पड़ जाएगा ।

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