राजनीति उपराष्ट्रपति चुनाव में नीतीश कुमार का दांव July 10, 2017 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। विशेषकर बिहार की राजनीति के बारे में तो कहने ही क्या? वहां आज जो हो रहा है, हो सकता है भविष्य में वह नहीं हो। सिद्धांतों को ताक पर रखकर की जा रही ऐसी राजनीति के द्वारा हम देश को किस दिशा […] Read more » Featured उपराष्ट्रपति के चुनाव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीरा कुमार राजग का समर्थन रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति चुनाव लालू प्रसाद यादव
राजनीति मोदी का ‘स्वच्छता अभियान’ और इजराइल July 10, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  आज से लगभग सवा पांच हजार वर्ष पूर्व भारत में महाभारत हुआ था और यहीं से भारत ‘गारत’ होने लगा था। यही वह बिन्दु है जिसके पश्चात विश्व के अन्य देशों की उल्टी-सीधी सभ्यताओं ने सांस लेना आरंभ किया। यही कारण है कि विश्व के अधिकांश तथाकथित विद्वान इस विश्व की […] Read more » Featured Israel Modi Modi and Israel इजराइल मोदी का 'स्वच्छता अभियान'
राजनीति संवैधानिक मर्यादा लांघती ममता की राजनीति July 9, 2017 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में पश्चिम बंगाल के जो हालात हैं, वह किसी से छिपे नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि बंगाल में हिंसा को लेकर राज्य की सरकार द्वारा पक्षपाती राजनीति की जा रही है। सरकार का संचालन करने वाली ममता बनर्जी जहां अप्रत्यक्ष रुप से केन्द्र सरकार को आड़े हाथ ले रही […] Read more » Featured ममता की राजनीति संवैधानिक मर्यादा
आर्थिकी चुनाव राजनीति राजनीतिक चंदे के लिए निर्वाचन बाॅन्ड का औचित्य July 8, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment एक मोटे अनुमान के अनुसार देश के लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होते हैं। इस खर्च में बड़ी धनराशि कालाधन और आवारा पूंजी होती है। जो औद्योगिक घरानों और बड़े व्यापारियों से ली जाती है। आर्थिक उदारवाद के बाद यह बीमारी सभी दलों में पनपी है। इस कारण दलों में जनभागीदारी निरंतर घट रही है। अब किसी भी दल के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को पार्टी का सदस्य नहीं बनाती हैं। मसलन काॅरपोरेट फंडिंग ने ग्रास रूट फंडिंग का काम खत्म कर दिया है। इस कारण अब तक सभी दलों की कोशिश रही है कि चंदे में अपारदर्शिता बनी रहे। Read more » Featured political donation जीएसटी निर्वाचन बाॅन्ड निर्वाचन बाॅन्ड का औचित्य नोटबंदी बेनामी संपत्ति पर अंकुश
राजनीति सार्थक पहल भारत और इजराइल के रिश्तेः संस्कृति के दो पाट July 8, 2017 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment -संजय द्विवेदी इजराइल और भारत का मिलन दरअसल दो संस्कृतियों का मिलन है। वे संस्कृतियां जो पुरातन हैं, जड़ों से जुड़ी है और जिन्हें मिटाने के लिए सदियां भी कम पड़ गयी हैं। दरअसल यह दो विचारों का मिलन है, जिन्होंने इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सपने देखे। वे विचार जिनसे दुनिया सुंदर बनती […] Read more » Featured इजराइल भारत भारत और इजराइल
राजनीति ममता करे खुद का नुकसान July 8, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक कल से मैं कोलकाता में हूं। यहां के अखबार और टीवी चैनल बस एक ही खबर से भरे दिखाई पड़ रहे हैं। वह है- राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मुठभेड़। राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच खुले-आम जो दंगल चल पड़ा है, वह कई राज्यों में पहले चले दंगलों की […] Read more » ममता का फैसला
राजनीति भारत-इजराइल : धरती से स्वर्ग तक अटूट संबंध July 8, 2017 / July 8, 2017 by विनोद कुमार सर्वोदय | Leave a Comment मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के वशीभूत इंदिरा गाँधी ने इजराइल के सबसे बड़े शत्रु फिलिस्तीन को सबसे पहले मान्यता दी और उसके "फिलिस्तीन मुक्ति संगठन" के अध्यक्ष यासिर अराफात को करोड़ों रुपये का 'नेहरु शांति पुरस्कार' 1980 में दिया था । इसके बाद राजीव गाँधी ने भी अपने कार्यकाल में उसको 'इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार' दिया था।जब के समाचारो से ज्ञात हुआ था कि राजीव गाँधी ने तो उसको पूरे विश्व में घूमने के लिए एक बोईंग 747 विमान भी उपहार में दिया था। मुस्लिम परस्ती भारत के नेताओं में उस समय इतनी अधिक छायी हुई थी कि यासिर अराफात को छींक भी आती थी तब वो भागकर दिल्ली चला आता था और हमारे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव गांधी आदि उसके लिए पलकें बिछाए रहते थे। Read more » Featured कमांडर इन चीफ ले.जनरल जैकब जनरल मानेकशा बेंजामिन नेतन्याहू भारत-इजराइल की बढ़ती मित्रता मुस्लिम तुष्टिकरण हाइफा
राजनीति सीमा विवाद के बहाने उन्माद में चीन July 7, 2017 / July 7, 2017 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव पिछले एक माह से सिक्किम की सीमा पर जारी तनाव से चीन लगातार उन्मादी तेवर दिखा रहा है। उसकी यह बौखलाहट इसलिए भी है, क्योंकि भारत भी पीछे हटने की बजाय सख्ती बरत रहा है। लिहाजा चीनी विदेश मंत्रालय में जहां पंचशील समझौता तोड़ने का आरोप भारत पर मढ़ा है, वहीं चीन का […] Read more » Featured Indo China border उन्माद में चीन
राजनीति भारतीय राजनीति का घटिया स्तर July 6, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment हमारे विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी इसलिए अप्रिय लग रहे हैं कि वे अगले लोकसभा चुनावों में भी उसे सत्ता में आते हुए दिखायी दे रहे हैं। जनता आज भी उन्हें उतना ही चाह रही है, जितना 2014 में चाह रही थी। राहुल गांधी ना तो विपक्ष को साथ लगा पा रहे हैं और ना ही कांग्रेस को साथ लेकर चल पा रहे हैं। वह विपक्ष के साथ लगते हैं ना कि विपक्ष को साथ लगाते हैं, इसी प्रकार वह कांग्रेस पर थोपे जा रहे हैं-ना कि कांग्रेस उन्हें चाहती है। Read more » China Featured India politics Modi pakistan the declining status of India politics चीन पाकिस्तान
राजनीति प्रणब दा को मोदी का तोहफा July 5, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आपसी संबंध इतने अच्छे रहे हों, जितने प्रणब मुखर्जी और नरेंद्र मोदी के रहे हैं, ऐसा न तो मैंने कभी पढ़ा, न सुना और न ही जाना। प्रणब दा पर छपी एक चित्रकथा का विमोचन करते हुए मोदी ने कहा कि उनके और प्रणब दा के संबंध बाप-बेटे की […] Read more » cordial relation between PM mOdi and President Pranab Mukherjee Featured प्रणब दा और मोदी
राजनीति मोदीः जनविश्वास पर खरा उतरने की चुनौती July 4, 2017 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment -संजय द्विवेदी जिस दौर में राजनीति और राजनेताओं के प्रति अनास्था अपने चरम पर हो, उसमें नरेंद्र मोदी का उदय हमें आश्वस्त करता है। नोटबंदी, कैसलेश जैसी तमाम नादानियों के बाद भी नरेंद्र मोदी लोगों के दुलारे बने हुए हैं, तो यह मामला गंभीर हो जाता है। आखिर वे क्या कारण हैं जिसके चलते नरेंद्र […] Read more » Featured Modi जनविश्वास पर खरा उतरने की चुनौती मोदी
राजनीति जगत की जटिल राजनीति July 3, 2017 by सज्जाद हैदर | Leave a Comment वर्तमान समय में विश्व स्तर की राजनीति को समझना अत्यंत कठिन है क्योंकि आज के समय में विश्व की राजनीति एक ऐसी दिशा में गतिमान है जिसे साधारण रूप से समझ पाना मुश्किल ही नहीं अत्यंत कठिन है। यदि इतिहास के पन्नो को पलट दिया जाए और विश्व युद्ध के अतीत पर नजर डाली जाए […] Read more » complex politics of the world Featured जगत जगत की जटिल राजनीति जटिल राजनीति