Category: राजनीति

राजनीति समाज

मैकाले-पद्धति को शीर्षासन कराता महर्षि अरविन्द का शिक्षा-दर्शन

/ | Leave a Comment

“ वास्तविक शिक्षण का प्रथम सिद्धान्त है- ‘कुछ भी न पढ़ाना’ , अर्थात् शिक्षार्थी के मस्तिष्क पर बाहर से कोई ज्ञान थोपा न जाये । शिक्षण प्रक्रिया द्वारा शिक्षार्थी के मस्तिष्क की क्रिया को सिर्फ सही दिशा देते रहने से उसकी मेधा-प्रतिभा ही नहीं, चेतना भी विकसित हो सकती है, जबकि बाहर से ज्ञान की घुट्टी पिलाने पर उसका आत्मिक विकास बाधित हो जाता है ।”

Read more »

राजनीति

दिलचस्प दिन

| Leave a Comment

साठ के दशक के मध्य में अमेरिका में युवा आन्दोलन की एक धारा के रुप में हिप्पी उपसंस्कृति का जन्म हुआ और दुनिया भर के अनेको देशों में फैल गया। हिप्पियों के फैशन और मूल्य-बोध ने संगीत, फिल्म, साहित्य और शिल्प पर गहरा असर डाला। इस हिप्पी संस्कृति के अनेको पहलुओं का दुनिया भर के देशों की आज की संस्कृति की मुख्य धारा में समावेश हो गया है। साठ के दशक में दुनिया के विभिन्न देशों में प्रतिवाद और प्रतिरोध के स्वर गूँजते रहे थे। अमेरिका, यूरोप और एशिया के विश्वविद्यालयों के कैम्पस में छात्र अशान्त और उत्तेजित रहा करते थे।

Read more »

राजनीति

योगी का पराक्रम और प्रताप

| Leave a Comment

उत्तर प्रदेश की जनता को पुन: एक बार बधाई, जिसने परिपक्व निर्णय लिया और सत्ता की चाबी सत्ता के दलालों (त्रिशंकु विधानसभा बनने पर जो लोग सत्ता में अपनी-अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपना-अपना हिस्सा मांगते) के हाथों में न देकर सीधे एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में सौंप दी-जिसके आने की आहट से ही गौमाता को राहत की सांस मिलनी आरंभ हो गयी। पराक्रम इसी का नाम होता है कि जिसके पुण्य कर्मों से निर्मित उसका पुण्यमयी प्रतापी आभामण्डल समाज के अतिवादी लोगों को कंपायमान कर दे और सज्जनों को चैन की सांस दिला दे।

Read more »

राजनीति

केेजरीवाल जी! पहले दिल्ली संभालो

/ | 1 Comment on केेजरीवाल जी! पहले दिल्ली संभालो

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करके केजरीवाल अपने आपको मोदी के समान स्तर का राजनेता बनाने का अतार्किक प्रयास कर रहे हैं। माना कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को बड़े से बड़ा पद लेने का संवैधानिक अधिकार है, परंतु इस अधिकार की अपनी सीमाएं हैं और उन सीमाओं की पवित्रता इसमें है कि आप जितने बड़े पद को लेना चाहते हैं उतने ही बड़े अनुपात में आपके साथ जनाधार होना चाहिए। यह जनाधार किसी भी राजनेता को तभी मिलता है जब लोग उसके कार्य को प्रशंसा देने लगते हैं। यदि केजरीवाल जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए दिल्ली के दिल को जीतने में असफल हो रहे हैं तो मानना पड़ेगा कि वह प्रधानमंत्री मोदी से बराबरी करके न केवल अपनी ऊर्जा को नष्ट कर रहे हैं, अपितु अपनी अपने आपको उपहास का पात्र भी बना रहे हैं।

Read more »

राजनीति

बिहार से यूपी तक और मोदी से योगी तक

| 1 Comment on बिहार से यूपी तक और मोदी से योगी तक

एक लम्बे समय तक साम्प्रदायिक शब्द भारतीय राजनीत का प्यारा शब्द रहा है। समयानुसार यह शब्द अपने अर्थ तब्दील करता रहा, राजनीतिज्ञों की जुबानी। कभी अटल बिहारी बाजपेयी असाम्प्रदायिक थे और आडवाणी साम्प्रदायिक। समय बदला आडवाणी हो गये असाम्प्रदायिक और मोदी हो गये साम्प्रदायिक। आज के दौर में एक बार पुनः इस शब्द की व्याख्या हो रही है, व्यक्ति के सन्दर्भ में । कहा ये जा रहा है कि अब मोदी असाम्प्रदायिक है और आदित्यनाथ योगी साम्प्रदायिक। सुविधा की राजनीत इसे ही कहते है।

Read more »

राजनीति

‘न्यू इंडिया’ के लिए राष्ट्रपति कौन… ये, वो या फिर कोई और ?

| Leave a Comment

राष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में से देखें, तो वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, नगर विकास मंत्री वेंकैया नायडू समेत लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जैसे भी कुछेक जानदार नाम हैं। पार्टी में देखे, तो लालकृष्ण आडवाणी भी सबसे प्रबल स्वरूप में सामने हैं। मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, केशूभाई पटेल और यशवंत सिन्हा भी उम्मीद पाले हुए हैं। लेकिन इन सब में जेटली और आडवाणी को छोड़कर बाकी सभी को तो उपराष्ट्रपति पद से भी संतुष्ट किया जा सकता है।

Read more »

राजनीति

कौन हैं मुसलमानों को योगी का डर दिखाने वाले लोग?

| 2 Comments on कौन हैं मुसलमानों को योगी का डर दिखाने वाले लोग?

कुछेक बयानों को आधार बनाकर यह लोग योगी आदित्यनाथ को बदनाम कर रहे हैं। निश्चित तौर पर उनके कुछ बयान कड़े हैं, लेकिन समूचा देश यह भी जानता है कि वे बयान अकारण नहीं आए थे। उन बयानों के पीछे एक पीडि़त,आहत और व्यथित मन था। योगी की कट्टर छवि गढऩे वाले मीडिया और कम्युनिस्टों को आज से 10 साल पहले वर्ष2007 में संसद में दिए गए गोरखपुर के सांसद आदित्यनाथ का आँसुओं से तरबतर पूरा भाषण सुनना चाहिए। प्रोपोगंडा फैलाने में माहिर और हिटलर के सूचना मंत्री गोएबल्स के वंशज यह लोग क्या इस बात का जवाब दे सकते हैं कि संसद में एक संत क्यों फफक-फफक कर रोया था?

Read more »

राजनीति

उत्तर प्रदेश में योगी की ताजपोशी के साथ महाबदलाव के क्षण

| Leave a Comment

उप्र के युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ लेने के साथ ही दो उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य व लखनऊ के महापौर डा. दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंमत्रंी पद की शपथ दिलायी गयी। उनके साथ 22 कैबिनेट मंत्रियांे सहित 13 राज्यमंत्रियों व नौ स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी गयी । प्रदेश के राजनैतिक इतिहास में योगी मंत्रिपरिषद ऐसी पहली मंत्रिपरिषद है जो पूरी तरह से बेदाग है। यह मंत्रिपरिषद नये और पुराने चेहरों का सम्मिश्रण है। मंत्रिपरिषद के गठन में जातीय व क्षेत्रीय संतुलन का शानदार तरीके से प्रयोग किया गया है

Read more »