Category: राजनीति

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योगी सरकार बनने से विरोधी दलों में भय का वातारवण

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समाजवादी व बसपा के बाहुबली जो लोग जेल में बंद है। अब वे लोग जेल में भी कांप रहे है। बाहुबलियों का जेल मे मुस्कराना व दरबार लगाना बंद हो गया है। अतीक अहमद जेसे लोगों की जमानत अब मुश्किल काम हो गया है। अतीक के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि मनपसंद जेल में रहना उसका मौलिक अधिकार है तब कोर्ट ने फटकार लगा दी। वहीं जब गायत्री प्रसाद प्रजापति ने धोखे से जमानत लेने का प्रयास किया तब सरकार ने जिस प्रकार से एक्शन लिया वह काबिलेतारीफ है तथा आम जनता के बीच सरकार के कदमों की प्रशंसा हो रही है। जिस जज ने रेप के आरोपी गायत्री को जमानत दी हाईकोर्ट ने उसी की ही नौकरी ले ली। रेप के आरोपी गायत्री की जमानत रदद हो गयी। पेट्रोल पंपों में चिप लगाकर की जा रही सनसनीखेज चोरी का ऐतिहासिक खुलासा कर दिया जिसमें भी करोड़ों रूपये के घोटाले का पर्दाफाश कर दिया है। सरकार ने 15 महापुरूषों की छुटिटयों को रदद करने का ऐतिहासिक कदम उठाया लेकिन विपक्ष है कि सुधर नही रहा ।

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कश्मीरः ये आग कब बुझेगी ?

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यह वक्त ही है कि कश्मीर को ठीक कर देने और इतिहास की गलतियों के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराने वाले आज सत्ता में हैं। प्रदेश और देश में भाजपा की सरकार है, पर हालात बेकाबू हैं। समय का चक्र घूम चुका है। “जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है” का नारा लगाती भाजपा देश की केंद्रीय सत्ता में काबिज हो चुकी है। प्रदेश में भी वह लगभग बराबर की पार्टनर है। लेकिन कांग्रेस कहां है?इतिहास की इस करवट में कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं भी नदारद हैं। फारूख अब्दुल्ला को ये पत्थरबाज देशभक्त दिख रहे हैं। आखिर इस देश की राजनीति इतनी बेबस और लाचार क्यों है।

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एक साथ चुनाव से लोकतंत्र मजबूत होगा

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सही मायनों में हमारा लोकतंत्र ऐसी कितनी ही कंटीली झाड़ियों में फँसा पड़ा है। प्रतिदिन आभास होता है कि अगर इन कांटों के बीच कोई पगडण्डी नहीं निकली तो लोकतंत्र का चलना दूभर हो जाएगा। लोकतंत्र में जनता की आवाज की ठेकेदारी राजनैतिक दलों ने ले रखी है, पर ईमानदारी से यह दायित्व कोई भी दल सही रूप में नहीं निभा रहा है। ”सारे ही दल एक जैसे हैं“ यह सुगबुगाहट जनता के बीच बिना कान लगाए भी स्पष्ट सुनाई देती है। राजनीतिज्ञ पारे की तरह हैं, अगर हम उस पर अँगुली रखने की कोशिश करेंगे तो उसके नीचे कुछ नहीं मिलेगा। कुछ चीजों का नष्ट होना जरूरी है, अनेक चीजों को नष्ट होने से बचाने के लिए। जो नष्ट हो चुका वह कुछ कम नहीं, मगर जो नष्ट होने से बच सकता है वह उस बहुत से बहुत है। लोकतंत्र को जीवन्त करने के लिए हमें संघर्ष की फिर नई शुरूआत करनी पडे़गी।

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राजनीति शख्सियत

आज भी हजारों लोग सुनने और देखने आते हैं उमा भारती को

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इस समय साध्वी उमा भारती केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जल संसाधन और गंगा संरक्षण मंत्री का दायित्व निभा रहीं हैं। अगर भगवाधारी केंद्रीय मंत्री उमा भारती के गंगा के प्रति नजरिए के बारे में बात की जाये तो वह गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने को अपने जीवन-मरण का सवाल बना चुकी हैं। इसलिए उमा भारती अपने हर वक्तव्य में कहती हैं कि ‘‘जब आए हैं गंगा के दर पर तो कुछ करके उठेंगे, या तो गंगा निर्मल हो जाएगी या मर के उठेंगे।’’ इससे पता चलता है कि उमा भारती गंगा के प्रदूषण से कितनी विचलित हैं। अब आगे देखने वाली बात होगी कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती यमुना का कितना जीर्णोद्धार या कायाकल्प कर पाती हैं।

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पीएम मोदी देश के गृहमंत्री को बदलें

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इधर सोशल मीडिया पर भी कुछ अधिक ही 'क्रांतिकारी' पैदा हो गये हैं जो बम की भाषा पढ़ाने का प्रयास सरकार को कर रहे हैं। माना कि सरकार को प्रेरित करना और उकसाना कलम का काम है-पर कलम पराक्रमी होने के साथ साथ घटनाओं की समीक्षक भी होनी चाहिए, अन्यथा वह आग लगाकर अपनी ही हानि कर लेगी। समझने की आवश्यकता है कि इस समय पाकिस्तान के विरूद्घ भारत चाहकर भी 'सर्जिकल स्ट्राइक' नहीं कर सकता और ना ही 'सर्जिकल स्ट्राइक' की पुनरावृत्ति समस्या का समाधान है। अब यदि 'सर्जिकल स्ट्राइक' की गयी तो पाकिस्तान और चीन की ओर से युद्घ की घोषणा होने की पूर्ण संभावना है।

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फर्क डी.एन.ए. का है

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संघ का डी.एन.ए. सौ प्रतिशत भारतीय है। उसने अपने प्रतीक और आदर्श भारत से ही लिये। भगवे झंडे को गुरु माना। देश, धर्म और समाज की सेवा में अपना तन, मन और धन लगाने वाले सभी जाति, वर्ग, क्षेत्र, आयु और लिंग के महामानवों को अपने दिल में जगह दी। हिन्दू संगठन होते हुए भी अन्य मजहब या विचार वालों से द्वेष नहीं किया। उन्हें समझने तथा शिष्टता से अपनी बात समझाने का प्रयास किया। शाखा के साथ-साथ निर्धन और निर्बल बस्तियों में सेवा के लाखों प्रकल्प खोले। अतः संघ धीरे-धीरे पूरे भारत में छा गया और लगातार बढ़ रहा है।

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