Category: राजनीति

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वजूद के संकट में मायावती

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मायावती ने मूर्तियों के माध्यम से दैवीय प्रतीक गढ़ने की जो कवायद की, हकीकत में ऐसी कोशिशें ही आज तक हरिजन, आदिवासी और दलितों को कमजोर बनाए रखती चली आई हैं। उद्यानों पर खर्च की गई धन राशि को यदि बंुदेलखण्ड की गरीबी दूर करने अथवा दलितों के लिए ही उत्कृष्ठ विद्यालय व अस्पताल खोलने में खर्च की गई होती तो एक तरफ खेती-किसानी की माली हालत निखरती और दूसरी तरफ वंचितों को निशुल्क शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं मिलती। किंतु मायावती की अब तक की कार्य संस्कृति में मानक व आदर्श उपायों और नई दृष्टि का सर्वथा अभाव रहा।

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गलती कांग्रेस की, ठीकरा राज्यपाल पर

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भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद महात्मा गांधी ने कहा था कि देश को अब कांग्रेस की आवश्यकता नहीं है। इसलिए कांग्रेस को समाप्त कर देना चाहिए। पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर नजर डाली जाए तो यही परिलक्षित होता दिखाई देता है कि देश की जनता ने महात्मा गांधी की बात पर अमल करना प्रारंभ कर दिया है। क्योंकि इन पांच राज्यों में से चार राज्यों में भाजपा की सरकार बन चुकी है या बनने वाली है। वर्तमान में पूरा देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के सपने को साकार करने के लिए अपने कदम बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है।

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बिगड़ैल आज़म खान की सरकारी अकड़

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वैसे उनकी मानसिकता को समझने के लिए 8 फरवरी 2012 को पिछले चुनावों की गोरखपुर में हुई एक सभा में मुसलमानों को भड़काते हुए उन्होंने जो कहा था वह पर्याप्त है कि "बदलाव लाओ और सपा सरकार के गुजरे उस कार्यकाल (2002 से 2007) को याद करो जब थाने के लोग "दाढ़ी" पर हाथ धरने से डरते थे"।( दैनिक जागरण 08.02.2012)। आज़म खान प्रदेश में दादागिरी दिखाते हुए मुसलमानों को भी दबंग बने रहने के लिए कहते थे। वे अधिकारियों के लिए उनसे कहते थे कि "अधिकारी न आपके रिश्तेदार है और न मेरे, आप चाबुक हाथ मे रखिये वह सब सुनेंगे "।( दैनिक जागरण 31.01.2013) ।

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उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भाजपा की जीत के ऐतिहासिक मायने

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आज भाजपा की जीत के लिए सबसे बड़ा कारण यह भी है कि भाजपा को विगत तीन माह में जुमलेबाज पार्टी , नेता विहीन दल तीन साल मेंकोई काम न कर पाने वाले दल के रूप में अलंकृत किया गया था। जिसका लाभ आज भाजपा व सहयोगी दलों को मिल रहा है। विगत 27 सालों से किस न किसी प्रकार से सपा, बसपा और कांग्रेस ही प्रदेश मं राज कर रहे थे लेकिन यह सभी दल अपनी नाकामियों को छिपाते हुए प्रदेश के बिगड़ते हुए हालातांे के लिए पीएम मोदेी व भाजपा को जिम्मेदार मान रहे थे। सबसे बड़ी राहत की बात यह मिली हे कि एग्जिट पोलों के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना किसी देरी के अपनी बुआ के साथ प्यार की पेंगे बढ़ानी शुरू कर दी थी

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