राजनीति रीढ़विहीन होती जाती भाजपा June 15, 2012 / June 15, 2012 by वीरेन्द्र जैन | 7 Comments on रीढ़विहीन होती जाती भाजपा वीरेन्द्र जैन जैसे कि सुब्रमण्यम स्वामी उस जनता पार्टी के प्रमुख हैं जिस नाम की पार्टी ने कभी इमरजैन्सी लगाये जाने से आक्रोशित जनता का समर्थन हासिल करते हुए केन्द्र में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनायी थी, पर सुब्रमण्यम स्वामी की यह जनता पार्टी, आज वही जनता पार्टी नहीं है केवल उसका साइनबोर्ड भर है। […] Read more » कमल भाजपा
राजनीति संगठन की दुहाई देने वाली भाजपा में व्यक्ति हो गए हावी June 15, 2012 / June 18, 2012 by तेजवानी गिरधर | Leave a Comment तेजवानी गिरधर यह बात सिद्धांतत: तो सही है कि लोकतंत्र में व्यक्तिवाद और परिवारवाद का कोई स्थान नहीं होना चाहिए और नीति व विचार को ही महत्व दिया जाना चाहिए, मगर सच्चाई ये है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश कहलाने वाले हमारे भारत में परिवारवाद और व्यक्तिवाद ही फलफूल रहे हैं। कांग्रेस की […] Read more »
राजनीति राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर उलझी कांग्रेस June 14, 2012 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर उलझी कांग्रेस प्रमोद भार्गव ममता-मुलायम के पलटबार के बाद राष्ट्रपति चुनाव का पूरी तरह राजनीतिकरण हो गया है। ममता-मुलायम ने अपनी तरफ से जो तीन नाम राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए सार्वजनिक किए हैं, उससे तीन बातें तय हुर्इं हैं। एक संप्रग के घटक और सहयोगी दल संप्रग और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को […] Read more » who can be the next president राष्ट्रपति चुनाव
राजनीति मोदी जी, यह गांधी का भारत है हिटलर का जर्मनी नहीं June 14, 2012 / June 29, 2012 by निर्मल रानी | 23 Comments on मोदी जी, यह गांधी का भारत है हिटलर का जर्मनी नहीं निर्मल रानी जैसे-जैसे 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों का समय क़रीब आता जा रहा है, सभी राजनैतिक दल अपनी-अपनी शतरंजी बिसातें बिछाने में लग गए हैं। देश में होने जा रहे राष्ट्रपति की उम्मीदवारी को लेकर भी विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा की जा रही ज़ोर-आज़माईश उसी 2014 के लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र है। मंहगाई […] Read more » Narendra modi as PM गांधी का भारत हिटलर का जर्मनी
राजनीति ये मनमोहन से छुट्टी व राहुल की ताजपोशी की चाल तो नहीं June 14, 2012 / June 14, 2012 by तेजवानी गिरधर | Leave a Comment तेजवानी गिरधर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पद के लिए अचानक तीन नाम सुझा कर पिछले एक पखवाड़े से वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी पर हो रही सहमति की अटकलों को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। हालांकि उनके इस पैंतरे को कांग्रेस की रणनीति […] Read more » who can bethe next PM मनमोहन से छुट्टी राहुल की ताजपोशी
राजनीति भारत विभाजन और हकीकत June 14, 2012 / June 14, 2012 by सुमीत श्रीवास्तव | 1 Comment on भारत विभाजन और हकीकत सुमीत श्रीवास्तव भारतीय उप-महाद्वीप का विभाजन और दो नए राज्यों/राष्ट्रों का निर्माण सन 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान(मुस्लिम राष्ट्र) एवं सन 15 अगस्त 1947 को भारत (रिपब्लिक आफ इंडिया) में दोनों राज्यों/राष्ट्रों के विभाजन था अलग-अलग होने की घोसना लोर्ड माउन्टबेटेन ने की| इस विभाजन में न की भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किये गये […] Read more » partition of India क्रेयल रैडक्लिफ जवाहर लाल नेहरु भारत विभाजन और हकीकत महत्मा गाँधी मो. अली जिन्नाह लोर्ड माउन्टबेटेन
राजनीति कम्युनिस्टों के नए ब्रांड एंबेसडर:विवेकानंद June 14, 2012 / June 14, 2012 by राजीव पाठक | 8 Comments on कम्युनिस्टों के नए ब्रांड एंबेसडर:विवेकानंद वैचारिक अस्पृश्यता ने दुनिया को सैकड़ों छोटे बड़े युद्ध की ज्वाला में जलाया है | सरहदों की लकीरें भी इस वैचारिक अस्पृश्यता की गवाही देती है | आज भी सामाजिक अस्पृश्यता से ज्यादा खतरनाक है तथाकथित बुद्धिजीवियों का वाद राग और उससे उपजते वैचारिक छुआ-छूत से समाज के सर्वांगीण विकास में रूकावट आना | ऐसे […] Read more » कम्युनिस्टों के नए ब्रांड एंबेसडर विवेकानंद वैचारिक अस्पृश्यता
राजनीति संघ की व्याप्ति, शक्ति और रीति June 14, 2012 by मा. गो. वैद्य | Leave a Comment मा. गो. वैद्य संघ| मतलब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ| महाकवि कालिदास के शब्द का प्रयोग करे तो, यह एक अलोकसामान्य संस्था है| कारण, आज हमारे देश में या अन्यत्र भी जो अनेक संस्थाएँ कार्य कर रही है, उनके नमूने में संघ नहीं बैठता| काव्यालंकारों में ‘अनन्वय’ नाम का एक अलंकार है| जिसकी तुलना केवल उसी से ही हो […] Read more » राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
राजनीति संसद की प्रतिष्ठा के वास्तविक हत्यारे कौन? June 14, 2012 / June 14, 2012 by मा. गो. वैद्य | 2 Comments on संसद की प्रतिष्ठा के वास्तविक हत्यारे कौन? मा. गो. वैद्य गत १३ मई को, संसद के दोनों सभागृहों की दिन भर संयुक्त बैठक हुई. प्रसंग था पहली संसद की पहली बैठक को साठ वर्ष पूर्ण होने का. मतलब संसद की पहली बैठक १३ मई १९५२ को हुई. हमारा संविधान २६ जनवरी १९५० को कार्यांवित हुआ और उसके मार्गदर्शन में १९५२ को आम […] Read more » लोकतंत्र संसद
राजनीति जानिये:-अब तक के प्रधानमंत्रियों के बारे में June 14, 2012 / June 14, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on जानिये:-अब तक के प्रधानमंत्रियों के बारे में स्वतंत्रता के लम्बे और रोमांचकारी क्रांतिकारी आंदोलन के परिणामस्वरूप देश 15 अगस्त 1947 को पराधीनता की बेडिय़ों को काटकर स्वाधीन हुआ। लार्ड माउंटबेटन ने जापान की सेनाओं के ब्रिटिश सेनाओं के सामने 15 अगस्त 1945 को (हिरोशिमा और नागासाकी की प्राणघाती बमवर्षा के पश्चात) आत्मसमर्पण की स्मृति में, इस घटना की दूसरी वर्षगांठ 15 अगस्त […] Read more » 13 प्रधानमंत्रियों के विषय में about primeministers of India Atal Bihari Vajpai Chandrashekhar Chaudhary Charan Singh different primeministers of India Dr.Man mohan Singh how India got its 13 prime minister Indra Kumar Gujral Jawahar lal Nehru Lalbahadur Shastri Morarji Desai Rajiv Gandhi Shrimati Indira Gandhi Vishwanath PratapSingh अटल बिहारी वाजपेयी अब तक के प्रधानमंत्रि इंद्र कुमार गुजराल चंद्रशेखर चौधरी चरण सिंह डॉ. मनमोहनसिंह पंडित जवाहरलाल नेहरू मोरारजी देसाई राजीव गांधी लालबहादुर शास्त्री विश्वनाथ प्रताप सिंह श्रीमति इंदिरा गांधी
राजनीति राष्ट्रपति तो ठीक है, उपराष्ट्रपति कौन बनेगा? June 13, 2012 / June 14, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment राज गुजर चुनाव आयुक्त ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए तिथियां घोषित कर दीं. राजनीतिक दलों की पटरी बैठी तो अब आगामी 19 जुलाई को राष्ट्रपति निर्विरोध निर्वाचित कर दिया जाएगा, अगर नहीं तो मतदान होगा और देश को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार सोनिया गांधी के किचेन गार्डेन से […] Read more » who may be next vice president? who may be president उपराष्ट्रपति कौन बनेगा
राजनीति हिन्दी जगत में बनाई जाएं फतवा कमेटियाँ / राजीव रंजन प्रसाद June 13, 2012 / June 28, 2012 by राजीव रंजन प्रसाद | 9 Comments on हिन्दी जगत में बनाई जाएं फतवा कमेटियाँ / राजीव रंजन प्रसाद मंगलेश डबराल प्रसंग हिन्दी साहित्य जगत के कूड़ाघर हो जाने की व्यथा कथा का उपसंहार है। यह पूरी घटना एक छटपटाहट का नतीजा है जो मेरी मुर्गी की एक टाग़ वाली प्रवृत्ति से निकली है और जिन्हें दो टाँगे दिख रही थी उन्हें भी फतवा-वितरकों ने जन्मान्ध घोषित करने के निबटा दिया। हिन्दी में रंगदारों […] Read more » भारत नीति प्रतिष्ठान मंगलेश डबराल मार्क्सवाद राकेश सिन्हा वैचारिक अश्पृश्यता