राजनीति लाल सलाम के क़त्लेआम की वजह October 24, 2009 / December 26, 2011 by चन्दन कुमार | 1 Comment on लाल सलाम के क़त्लेआम की वजह पूंजीवाद और विकास के नाम पर आदिवासियों और समाज में हाशिए पर रह गए लोगों को उनकी ज़मीन और अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है. यदि ये तबका कोशिश भी करे तो इनकी आवाज़ भी सांप के फन की तरह कुचल दिया जाता है. शायद इन्हें नहीं मालूम जब यहीं देश के सत्ताधीशों को […] Read more » Chandan Kumar Lal Salam Naxal Naxalite क़त्लेआम नक्सल राजनीति लाल सलाम
राजनीति इस तरह हार तो लोकतंत्र ही जाता है – पंकज झा October 24, 2009 / December 26, 2011 by पंकज झा | 6 Comments on इस तरह हार तो लोकतंत्र ही जाता है – पंकज झा भाजपा और भारत में एक साम्य ये रहा है कि दोनों भारतीय पौराणिक विचारों से प्रभावित, लोक में प्रचलित विभिन्न पुराने रूपकों और कहावतों को ही सदा अपने विचारों का आधार बनाते रही है. एक बड़े विचारक ने कहा है कि देश दो ही भाषाएँ जानता है रामायण और महाभारत.भाजपा भी इन्ही भाषाओँ में बात […] Read more » Democracy लोकतंत्र
राजनीति लाल सलाम को सलामी October 24, 2009 / December 26, 2011 by चन्दन कुमार | Leave a Comment साल 1967 के दौर में नक्सलबाड़ी से जो चिंगारी उठी, उसने भारत को अपनी आगोश में ले लिया. आज हालात ऐसे हैं कि बंगाल कि यह चिंगारी आंध्रप्रदेश के गांवों तक पहुंच चुकी है. लेकिन सत्ता की मंशा कभी इसे सुलझाने की नहीं रही. देश में जब जनता पार्टी की सरकार थी तब उसी दौर […] Read more » Chandan Kumar Lal Salam Naxalite चन्दन कुमार नक्सल राजनीति
राजनीति ‘थैंक गॉड’ कम से कम एक सांसद तो पियक्कड़ नहीं है! October 14, 2009 / December 26, 2011 by हिमांशु शेखर | 12 Comments on ‘थैंक गॉड’ कम से कम एक सांसद तो पियक्कड़ नहीं है! अभी हाल में हुई प्रभात झा और विजय माल्या प्रकरण ने हमारे देश के गणमान्य सांसदों की पोल खोल दी है। अभी तक तो जनता इस बात से पूरी तरह बेखबर ही थी कि जनता की नुमाइंदी करने का ढोंग रचने वाले सांसदों को कैसे-कैसे गिफ्ट मिलते हैं। इस प्रकरण के बात जनता की नाम […] Read more » Depawali Prabhat Jha Vijay Mallya Wine Gift सांसद
राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान October 12, 2009 / December 26, 2011 by लिमटी खरे | 33 Comments on ये है दिल्ली मेरी जान कहां खो गया कांग्रेस का चाणक्य! एक समय था जब देश की राजनीति में कुंवर अर्जुन सिंह को कांग्रेस की आधुनिक राजनीति का चाणक्य माना जाता था। देश में उनकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिल पाता था। खतो खिताब की राजनीति के जनक अर्जुन सिंह चाहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या […] Read more » Delhi दिल्ली
राजनीति युवराज के नाटक October 11, 2009 / December 26, 2011 by हिमांशु डबराल | 3 Comments on युवराज के नाटक अब आप सोच रहे होंगे कि युवराज कौन? हम इस देश की सत्तारूढ़ पार्टी के युवराज की बात कर रहे हैं। पुराने समय में राजा-महाराजा हुआ करते थे और उनके पुत्रों को युवराज कहा जाता था। रजवाड़े खत्म हो गए लेकिन आज के आधुनिक दौर में भी युवराज होते हैं। अब युवराज हैं तो भइया […] Read more » Yuvraj युवराज
राजनीति रियाया भी हकदार है ठंडी हवा की! October 6, 2009 / December 26, 2011 by लिमटी खरे | 1 Comment on रियाया भी हकदार है ठंडी हवा की! राजा और प्रजा के बीच क्या संबंध होते हैं, इनके मायने आज के शासक भूलते जा रहे हैं, इसका कारण यह है कि आधुनिकता और पश्चिमी संस्कृति की चकाचौंध में हम अपना इतिहास को विस्मृत करते जा रहे हैं। अभी बहुत समय नहीं बीता है, जबकि देश में आजादी का जश्न जिस संजीदगी से मनाया […] Read more » Riyaya रियाया
राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान October 5, 2009 / December 26, 2011 by लिमटी खरे | 15 Comments on ये है दिल्ली मेरी जान चंदा मामा से प्यारा मेरा मामा . . . बोफोर्स, बोफोर्स बोफोर्स। बार बार यह सुनते-सुनते कान थक गए और अब सरकार ने बोफोर्स के जिन्न को सदा के लिए बोतल में बंद कर उसे समंदर में गहरे पानी तले दबाने का जतन किया है, ताकि दुबारा यह बाहर न आ सके। बोफोर्स तोप दलाली […] Read more » Delhi
राजनीति थुरूर के पर कतरने से कतराती कांग्रेस October 4, 2009 / December 26, 2011 by लिमटी खरे | 2 Comments on थुरूर के पर कतरने से कतराती कांग्रेस किसी भी संगठन के लिए अनुशासन से बढ़कर कोई चीज नहीं होती है। इतिहास गवाह है कि गैर अनुशासित व्यक्तित्व या संगठन के धराशायी होने में समय नहीं लगता है। भाजपा में कुछ सालों से अनुशासनहीनता चरम पर रही है, यही कारण है कि अटल बिहारी बाजपेयी के परोक्ष तौर पर सक्रिय राजनीति को गुडबाय […] Read more » Thuroor थुरूर
राजनीति चीनी कूटनीतिक आक्रमण और साम्यवादी खटराग October 3, 2009 / December 26, 2011 by गौतम चौधरी | 3 Comments on चीनी कूटनीतिक आक्रमण और साम्यवादी खटराग खबरदार चीन के खिलाफ कुछ बोले तो जन-अदालत लगाकर नाक, कान, हाथ, पैर आदि काट लिए जाएंगे। वर्ग-शत्रु घोषत कर अभियान चलाया जाएगा। जुवान खोली तो हत्या भी की जा सकती है। याद रहे चाहे चीन कितना भी भारत के खिलाफ अभियान चलाये कोई कुछ कह नहीं सकता है, बोल नहीं सकात है। इस देश […] Read more » China चीन
राजनीति क्या हासिल होगा इस सादगी से September 30, 2009 / December 26, 2011 by अमलेन्दु उपाध्याय | 4 Comments on क्या हासिल होगा इस सादगी से आजकल अपने राहुल बाबा की सादगी के चर्चे कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं और सोने पर सुहागा यह है कि राहुल बाबा बिना बताए दलितों के घर भी पहुंच रहे हैं और उनके घर पर भोजन भी कर रहे हैं। जाहिर है यह सारी नौटंकी उत्तार प्रदेश में होने के कारण दलित की बेटी […] Read more » simplicity सादगी
राजनीति सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : भारत के भविष्य का आधार September 29, 2009 / December 26, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : भारत के भविष्य का आधार भारतीयता का अर्थ है भारत की समग्र परम्परा, भारत-वर्ष का सामाजिक, सांस्कृतिक इतिहास, भारत-वर्ष की पुरातन, अधुनातन पृष्ठभूमि, भारत-वर्ष की संवेदना, भारत वर्ष की कला, भारत-वर्ष का साहित्य। इन सबमें एक ही भाव है जो भारत-वर्ष के प्राचीन दर्शन व भारत के अध्यात्म को जीवन से जोड़ता है। मेरी दृष्टि में भारतीयता पूरे इतिहास का […] Read more » cultural nationalism सांस्कृतिक राष्ट्रवाद