समाज तम्बाकू मुक्ति से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव May 30, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग विश्व की गम्भीर समस्याओं में प्रमुख है तम्बाकू और उससे जुड़े नशीले पदार्थों का उत्पादन, तस्करी और सेवन में निरन्तर वृद्धि होना। नई पीढ़ी इस जाल में बुरी तरह कैद हो चुकी है। आज हर तीसरा व्यक्ति किसी-न-किसी रूप में तम्बाकू का आदी हो चुका है। बीड़ी-सिगरेट के अलावा तम्बाकू के छोटे-छोटे पाउचों […] Read more » 60 लाख लोग मारे Featured डब्ल्यूएचओ तम्बाकू मुक्ति से ही स्वस्थ धूम्रपान नवयुवक राष्ट्र का निर्माण संभव
चिंतन समाज देश बदलना है तो देना होगा युवओ को सम्मान May 30, 2018 by डॉ नीलम महेन्द्रा | 2 Comments on देश बदलना है तो देना होगा युवओ को सम्मान डॉ नीलम महेंद्र भारत एक युवा देश है। इतना ही नहीं , बल्कि युवाओं के मामले में हम विश्व में सबसे समृद्ध देश हैं। यानि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा युवा हमारे देश में हैं। भारत सरकार की यूथ इन इंडिया,2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1971 से 2011 के बीच युवाओं […] Read more » Featured किताबों देश बदलना है तो देना होगा देश बदलेगा भविष्य भ्रष्टाचार युवओ को सम्मान युवाओं
राजनीति समाज परम्परागत खेलों को मिले प्रोत्साहन May 29, 2018 by देवेंद्रराज सुथार | Leave a Comment देवेंद्रराज सुथार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ”मन की बात” के 44वें संस्करण में परम्परागत खेलों को प्रोत्साहन देने की बात कही है। हमारे देश में बरसों से खेलें जाने वाले पारंपरिक खेलों की कम होती लोकप्रियता और आधुनिक युग के बच्चों का मोबाइल व कंप्यूटर के खेलों के प्रति बढ़ते रूझान को देखते हुए प्रधानमंत्री […] Read more » Featured कबड्डी को मिले प्रोत्साहन खो-खो डिब्बा स्पाइस परम्परागत खेलों ब्लू व्हेल लगंड़ी लुका छिपी सतोलिया
समाज डॉ॰ भीमराव आंबेडकर और उनकी धर्म विषयक अवधारणा May 29, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विवेकानंद तिवारी डॉ॰ भीमराव आंबेडकर को हम संविधान निर्माता के रूप में जानते हैं,हालांकि विधि विशेषज्ञ होने के साथ-साथ डॉ॰ भीमराव आंबेडकर एक प्रख्यात अर्थशास्त्री ,शिक्षा शास्त्री और सबसे बढ़कर मानवतावाद की पोषक थे. भारतीय समाज व्यवस्था में सामाजिक न्याय के योद्धा के रूप में भीमराव अंबेडकर का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है. डॉ॰ भीमराव आंबेडकर का एक […] Read more » Featured उनकी धर्म विषयक अवधारणा जमीदारों डॉ॰ भीमराव आंबेडकर पंडा- पुरोहितों बुद्धत्व और साम्यवाद बौद्ध सामाजिक साम्यवाद साहूकारों
राजनीति समाज उत्तराखंड के जलते जंगल May 29, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मनुष्य का जन्म प्रकृति में हुआ और उसका विकास भी प्रकृति के सानिध्य में हुआ। इसीलिए प्रकृति और मनुष्य के बीच हजारों साल से सह-अस्तित्व की भूमिका बनी चली आई। गोया,मनुष्य ने सभ्यता के विकासक्रम में मनुष्येतर प्राणियों और पेड़-पौधों के महत्व को समझा तो कई जीवों और पेड़ों को देव-तुल्य मानकर उनके […] Read more » Featured अखरोट और काफल उत्तराखंड जंगली जीव जन्म प्रकृति देवदार पत्तियां पतझड़ पीपल पेड़़ पौधों बर्फीली पहाड़ियों मनुष्य
राजनीति समाज ज्वलंत सवाल : आठ राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक May 29, 2018 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिनुस्थानी देश में कश्मीर से विस्थापित हुए हिन्दुओं के बारे में अगर उसी समय समाधान निकलता तो संभवत: अन्य राज्यों में इसकी पुनरावृति रुक सकती थी, लेकिन समाधान निकालने के किसी भी तरीके पर सरकार की ओर से कोई चिंतन नहीं किया गया। इस कारण यह समस्या आज पूरे देश में तेजी से पैर […] Read more » Featured उत्तरप्रदेश कट्टरपंथी कश्मीर पश्चिम बंगाल और केरल बिहार विस्थापित हिन्दुओं हिन्दुओं पर अत्याचार
समाज लव जिहाद- एक सुनियाेजित इस्लामी षड्यंत्र May 29, 2018 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | Leave a Comment : डॉ मनोज चतुर्वेदी समाचार क्रमांक 1. (केरल) केरल की हादिया अर्थात् 25 साल की अखिला मां- पिता से अलग हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेगी . माननीय sc ने कहा पति अभिभावक नहीं हो सकता. पत्नी उसकी जायदाद नहीं .28 नवंबर 20017 समाचार क्रमांक -2 (मुंबई): पूर्व मॉडल का मुस्लिम पति पर […] Read more » .'नफ्ज' के अंतर्गत अहम Featured केरल जीवन शैली भारतीय मुसलमानों भाषा और इतिहास वेशभूषा हादिया
समाज पाश्चात्य समीक्षकों की दृष्टि में गीतांजलि May 29, 2018 by डॉ छन्दा बैनर्जी | Leave a Comment डॉ. छन्दा बैनर्जी सन् 1913 का वर्ष न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक-ऐश्वर्य का अभूतपूर्व वर्ष था । इसी वर्ष विश्वसाहित्याकाश में ध्रुवतारा सदृश भारत की पहचान बनी थी रवीन्द्रनाथ ठाकुर की लेखनगर्भ से जन्मी ‘गीतांजलि’ । ‘गीतांजलि’ – अर्थात ईश्वर के प्रति गीतों की अंजली । गीतांजलि केवल कुछ […] Read more » Featured गीतांजलि नोबल पुरस्कार यूनाइटेड किंगडम की रॉयल सोसाइटी रवीन्द्रनाथ रवीन्द्रनाथ ठाकुर श्री बसन्त कुमार राय
राजनीति समाज सामाजिक समरसता एवम् डॉ .भीमराव अांबेडकर May 29, 2018 by डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ .प्रेरणा चतुर्वेदी भारतीय संस्कृति की आत्मा समरसता परिपूर्ण है .धर्म सापेक्षीकरण ,धर्म निरपेक्ष करण ,सर्वधर्म समभाव, मानवतावाद ,बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, आदि अवधारणा सामाजिक समरसता की पोषक रही हैं. विविधता में एकता का भाव समरसता का प्रतिनिधित्व करता है. ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ यह भारतीय संस्कृति का अमर वाक्य व्यष्टि नहीं समष्टि के कल्याण ,सुख […] Read more » featuerd गौतम बुद्ध छत्रपति शाहूजी महाराज एवं बाबा साहब डा.भीमराव अांबेडकर डॉ .भीमराव अांबेडकर नारायण गुरु बहुजन समाज महात्मा ज्योतिबा फुले महापुरुषों संत कबीर संत रविदास सामाजिक समरसता एवम्
राजनीति समाज मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में May 28, 2018 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 2 Comments on मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजकल मैं इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में छपी एक खबर ऐसी है कि जिस पर पूरे देश का ध्यान जाना चाहिए। केंद्र सरकार का भी और प्रांतीय सरकारों का भी। चिकित्सा के क्षेत्र में यह क्रांतिकारी कदम है। पिछले 50 साल से देश के नेताओं और डाॅक्टरों से मैं आग्रह […] Read more » Featured अब हिंदी में मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज चौहान मेडिकल की पढ़ाई स्वास्थ्य मंत्री जगतप्रकाश नड्ढा हिंदी पाठ्य-पुस्तकें
समाज स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात May 28, 2018 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ कवि सम्मेलनों का समृद्धशाली इतिहास लगभग सन १९२० माना जाता हैं । वो भी जन सामान्य को काव्य गरिमा के आलोक से जोड़ कर देशप्रेम प्रस्तावित करना| चूँकि उस दौर में भारत में जन समूह के एकत्रीकरण के लिए बहाने काम ही हुआ करते थे, जिसमें लोग सहजता से आएं और […] Read more » Featured आई एम इंजीनियरिंग एन आई टी कवि सम्मेलनों प्रबंधन मेडिकल रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात विश्वविद्यालय स्तरहीन कवि सम्मेलनों हिन्दी भाषा
समाज ‘उदन्त मार्तण्ड’ की परम्परा निभाता हिन्दी पत्रकारिता May 28, 2018 by मनोज कुमार | Leave a Comment 30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष आलेख मनोज कुमार कथाकार अशोक गुजराती की लिखी चार पंक्तियां सहज ही स्मरण हो आती हैं कि राजा ने कहा रात है मंत्री ने कहा रात है सबने कहा रात है यह सुबह सुबह की बात है कथाकार की बातों पर यकीन करें तो मीडिया का जो चाल, […] Read more » 1975 का आपातकाल Featured अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उदन्त मार्तण्ड निभाता हिन्दी पत्रकारिता भारतीय संविधान मीडिया उद्योग