समाज साम्प्रदायिक सद्भाव एक मृग मरीचिका April 21, 2017 by विनोद कुमार सर्वोदय | 1 Comment on साम्प्रदायिक सद्भाव एक मृग मरीचिका राष्ट्रवाद को झुठलाने की एक और घटना जब सितम्बर 2008 में बटला हाउस (दिल्ली) में आजमगढ़ के आतंकियों को मारा गया तो उसमे दिल्ली पुलिस के शूरवीर इंस्पेक्टर के बलिदान को ही संदेहात्मक बना दिया और (छदम्) धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुस्लिम आतंकियो के घर आजमगढ़ जाने की नेताओं में होड़ ही लग गयी थी। यहा तक समाचार आये थे कि उस समय सत्ता के शीर्ष को नियंत्रित करने वाली सोनिया गांधी ने भी आजमगढ़ के आतंकवादियों पर आंसू बहायें थे । Read more » communal harmony communal harmony in India Featured साम्प्रदायिक सद्भाव
महिला-जगत समाज हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान April 19, 2017 / April 19, 2017 by हरीश शर्मा | 1 Comment on हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान भारतीय परिदृष्य में यदि बात की जाए तो यह कहा जाता है कि हमारा समाज पूरूष प्रधान है , परंतु यह कहना अर्धसत्य जैसा ही होगा क्योकि वह समाज पूरूष प्रधान केसे हो सकता है जहाॅ पुरूषों की उत्पत्ति का आधार ही महिलाए है। बल्कि यदि यह कहा जाए तो गलत नही होगा कि हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान है वर्तमान परिवेष में जब महिलाओं का समान अधिकार देने व उन्हे आगे बढाने की बाते जोर पकड रही है तो यह ध्यान रखना होगा कि इस प्रकार की बाते सिर्फ मंचो से लोगों की तालिया बटोरने भर के लिए नहीं कही जाए वरन दोहरे व्यक्तित्व को छोडकर राजनैतिक पूरोधाओं को भी नारी शक्ति के अस्तित्व को न सिर्फ मंचो से बल्कि वास्तविक जीवन मे भी सत्यता से स्वीकार व अंगीकार करना होगा। Read more » Featured महिला प्रधान समाज महिलाओं का सम्मान हमारा समाज पुरूष प्रधान हमारा समाज महिला प्रधान
समाज बचपन हुआ नशे में चूर April 18, 2017 / April 18, 2017 by घनश्याम भारतीय | Leave a Comment तम्बाकू उत्पाद के कुप्रभाव को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थानांे पर धूम्रपान को अपराध घोषित किया गया है। जिसके उलंघन पर 200 रूपये के जुर्माने का प्राविधान है। दुकानों पर निर्धारित आकार में हानियों को प्रदर्शित करने वाला बोर्ड़ भी लगा होना चाहिए। कम आयु वर्ग को अथवा उसके द्वारा तम्बाकू उत्पाद बेचने को अपराध घोषित किया गया है। नियम तो यहां तक है कि तम्बाकू उत्पाद बिक्री स्थान पर नाबालिग दिखाई भी न पडे़। और शिक्षण संस्थानो के 100 गज के दायरे में ऐसे उत्पादो की बिक्री अपराध है। Read more » Featured नशे में चूर
समाज सार्थक पहल अनोखा मदरसा ‘मुईन उल इस्लाम’ में सद्भावना का पाठ April 18, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment आगरा देवरैठा का मदरसा हिंदू-मुस्लिम एकता की किसी मिसाल से कम नहीं है। यहां धर्म की दीवार तोड़ बच्चे उर्दू और संस्कृत दोनों विषयों की शिक्षा एकसाथ गृहण कर रहे हैं। मुस्लिम बच्चे संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण जबकि हिंदू बच्चे कुरान की आयतें पढ़ते हैं। शिक्षक हों या बच्चे, सभी कहते हैं, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। कक्षा आठ की छात्रा निशा खान के मुंह से गायत्री मंत्र का उच्चारण सुन लगेगा मानो इस बच्ची की जुबां पर स्वयं सरस्वती मां विराजमान हो गई हैं। मासूम से चेहरे पर न तो किसी धर्म की परछाई दिखाई पढ़ती है और न ही किसी प्रकार का धार्मिक भेदभाव। कक्षा सात के छात्र ऋषभ उर्दू सीखता है और कुरान की आयतें भी पढ़ता है। Read more » Featured मुईन उल इस्लाम हिंदू-मुस्लिम एकता
शख्सियत समाज डा. अम्बेदकर को पूर्व जन्म के महान् संस्कारों ने उच्च स्थान प्राप्त कराया April 18, 2017 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on डा. अम्बेदकर को पूर्व जन्म के महान् संस्कारों ने उच्च स्थान प्राप्त कराया मनमोहन कुमार आर्य डा. अम्बेदकर जी के जन्म दिवस 14 अप्रैल को 4 दिन व्यतीत हो चुके हैं। उस दिन हम उन पर कुछ लिखना चाहते थे परन्तु लिख नहीं सके। हमारा मानना है कि किसी महापुरुष के जीवन पर चिन्तन करना केवल जन्म दिन व पुण्य तिथि पर ही उचित नहीं होता अपितु […] Read more » डा. अम्बेदकर
समाज हमारे मुसलमान भी क्या मुसलमान हैं? April 18, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment तीन तलाक, निकाह हलाला, बहुपत्नीवाद, पशु-बलि, बुर्का, मांसाहार, ताबीज, आदि ये सब बातें किसी भी धर्म के शाश्वत और सार्वदेशिक लक्षण नहीं हो सकते। इन्हें देश-काल के मुताबिक बदलते रहना चाहिए। यही बात शरिया, रोमन और ग्रीक लॉ पर भी लागू होती है। आज स्त्री-पुरुष समानता का युग है। इसमें यदि आदमी तीन बार बोलकर औरत को तलाक दे सकता है तो औरत भी तीन बार बोलकर आदमी को Read more » ताबीज तीन तलाक निकाह हलाला पशु बलि बहुपत्नीवाद बुर्का मांसाहार मुसलमान हमारे मुसलमान
महिला-जगत समाज नारी मुक्ति की यन्त्रणा April 17, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment औद्योगिक समाज में पुरुष और नारी के बीच का समीकरण बदला। औरत और मर्द के बीच समानता की अवधारणा उभड़ी। लिंग आधारित श्रम-विभाजन की अवधारणा पर सवाल उठने लगे। और नारी पुरुष का सम्पर्क पूरक होने के बजाय योगात्मक होने लग गया। स्त्रियों का कर्मक्षेत्र घर की चाहरदीवारी से बाहर भी प्रतिष्ठित हुआ और पारस्परिक निर्भरशीलता की बाध्यता में कमी आई। औरतों के हाथ में आर्थिक क्षमता आने के साथ परम्परा से सम्मानित पितृसत्ता में दरारें पड़ने लगीं। Read more » Featured नारी मुक्ति
समाज स्वास्थ्य-योग जानलेवा फ्लोराइड और उसके चिकित्सीय उपाय April 17, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी फ्लोराइड क्या है:-कई देशों जैसे सं. रा. अमेरिका आदि में पीने के पानी के फ्लोरिडेशन की नीति इतने लंबे समय से प्रभावी है कि अधिकांश लोग इसपर ध्यान ही नहीं देते. लेकिन अब बहुत से वैज्ञानिक और जनस्वास्थ्य अधिकारी यह प्रश्न उठा रहे हैं कि राष्ट्रव्यापी फ्लोरिडेशन का क्या औचित्य है और […] Read more » fatal floride Featured Floride जानलेवा फ्लोराइड फ्लोराइड फ्लोराइड चिकित्सीय उपाय
समाज घर-घर शौचालय पर बहस ज़रूरी April 17, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment समझने की बात है कि एकल होते परिवारों के कारण मवेशियों की घटती संख्या और परिणामस्वरूप घटते गोबर की मात्रा के कारण जैविक खेती पहले ही कठिन हो गई है। कचरे से कंपोस्ट का चलन अभी घर-घर अपनाया नहीं जा सका है। अतः गांधी जयंती पर स्वच्छता, सेहत, पर्यावरण, गो, गंगा और ग्राम रक्षा से लेकर आर्थिकी की रक्षा के चाहने वालों को पहला संदेश यही है कि गांवों में 'घर-घर शौचालय' की बजाय, 'घर-घर पानी निकासी गड्ढा' और 'घर-घर कंपोस्ट' के लक्ष्य पर काम करें। Read more » घर-घर शौचालय स्वच्छाग्रह स्वच्छाग्रह का सच
समाज हिंसक होती महानगरीय संस्कृति की त्रासदी April 15, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment दिल्ली में बढ़ती हिंसा की घटनाओं को लेकर व्यक्ति और समाज को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। इसका एक बड़ा कारण है संयुक्त परिवारों का बिखरना। इसके कारण महानगरों में न्यूक्लियर फेमिली यानी एकल परिवार की अवधारणा को बल मिलता चला गया है। मैं, मेरी पत्नी और मेरे बच्चे तक सिमटी नई सामाजिक और शहरी अवधारणा ने परिवार के बाकी बचे लोगों को एक-दूसरे अलग-थलग कर दिया है। Read more » महानगरीय संस्कृति
समाज अमरिका में प्रवासी भारतीय सद्भाव कैसे बढाएँ ? April 14, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 3 Comments on अमरिका में प्रवासी भारतीय सद्भाव कैसे बढाएँ ? आपको बडा योगदान करने की आवश्यकता नहीं है।जहाँ आप रहते हैं, उस आस पडोस के परिवारों को किसी न किसी रूपमें सहायता करने का काम होना चाहिए। यदि, हमारे विषय में भ्रांत धारणा है, कि, हमारे कारण देश में समस्याएँ हैं, तो उसका निर्मूलन यथा संभव हो जाना चाहिए, तो जो छुट पुट हत्त्याओं की घटनाएँ हो रही है; उनकी मात्रा में कमी की संभावना बढ जाएगी। कुछ अज्ञानियों की ईर्ष्या भी ऐसी घटनाओं के पीछे काम करती है।ध्यान अवश्य रहे; बिल्कुल भूले नहीं।अपने हक की लडाई शत्रुता जगाती है। संघर्ष समाधान नहीं है। समन्वयता, सहकार, भाईचारा, ॥कृण्वन्तोऽविश्वमार्यम्॥ Read more » Featured live with communal harmony abroad अमरिका प्रवासी भारतीय सद्भाव
समाज देश का शराब मुक्त होना ज़रूरी April 14, 2017 by निर्मल रानी | Leave a Comment देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार इस समय शराबबंदी को लेकर पूरे देश के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करने की स्थिति में पहुंच चुका है। गत् वर्ष 21 जनवरी को नितीश सरकार ने शराबबंदी के समर्थन में लगभग 12 हज़ार किलोमीटर की विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली एक अद्भुत मानव श्रृंखला बनाई। इस मानव श्रृंखला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबाई नहीं बल्कि शराब के विरोध में एक-दूसरे का हाथ थामे हर आयु-वर्ग के सभी धर्मों व जातियों के तथा सभी प्रकार की आर्थिक हैसियत रखने वाले वह लोग शामिल थे जो वास्तव में भारतीय समाज का दर्पण कहे जाते हैं। Read more » शराब बंदी