Category: समाज

महिला-जगत समाज

हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान

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भारतीय परिदृष्य में यदि बात की जाए तो यह कहा जाता है कि हमारा समाज पूरूष प्रधान है , परंतु यह कहना अर्धसत्य जैसा ही होगा क्योकि वह समाज पूरूष प्रधान केसे हो सकता है जहाॅ पुरूषों की उत्पत्ति का आधार ही महिलाए है। बल्कि यदि यह कहा जाए तो गलत नही होगा कि हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान है वर्तमान परिवेष में जब महिलाओं का समान अधिकार देने व उन्हे आगे बढाने की बाते जोर पकड रही है तो यह ध्यान रखना होगा कि इस प्रकार की बाते सिर्फ मंचो से लोगों की तालिया बटोरने भर के लिए नहीं कही जाए वरन दोहरे व्यक्तित्व को छोडकर राजनैतिक पूरोधाओं को भी नारी शक्ति के अस्तित्व को न सिर्फ मंचो से बल्कि वास्तविक जीवन मे भी सत्यता से स्वीकार व अंगीकार करना होगा।

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समाज सार्थक पहल

अनोखा मदरसा ‘मुईन उल इस्लाम’ में सद्भावना का पाठ

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आगरा देवरैठा का मदरसा हिंदू-मुस्लिम एकता की किसी मिसाल से कम नहीं है। यहां धर्म की दीवार तोड़ बच्चे उर्दू और संस्कृत दोनों विषयों की शिक्षा एकसाथ गृहण कर रहे हैं। मुस्लिम बच्चे संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण जबकि हिंदू बच्चे कुरान की आयतें पढ़ते हैं। शिक्षक हों या बच्चे, सभी कहते हैं, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। कक्षा आठ की छात्रा निशा खान के मुंह से गायत्री मंत्र का उच्चारण सुन लगेगा मानो इस बच्ची की जुबां पर स्वयं सरस्वती मां विराजमान हो गई हैं। मासूम से चेहरे पर न तो किसी धर्म की परछाई दिखाई पढ़ती है और न ही किसी प्रकार का धार्मिक भेदभाव। कक्षा सात के छात्र ऋषभ उर्दू सीखता है और कुरान की आयतें भी पढ़ता है।

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समाज

अमरिका में प्रवासी भारतीय सद्भाव कैसे बढाएँ ?

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आपको बडा योगदान करने की आवश्यकता नहीं है।जहाँ आप रहते हैं, उस आस पडोस के परिवारों को किसी न किसी रूपमें सहायता करने का काम होना चाहिए। यदि, हमारे विषय में भ्रांत धारणा है, कि, हमारे कारण देश में समस्याएँ हैं, तो उसका निर्मूलन यथा संभव हो जाना चाहिए, तो जो छुट पुट हत्त्याओं की घटनाएँ हो रही है; उनकी मात्रा में कमी की संभावना बढ जाएगी। कुछ अज्ञानियों की ईर्ष्या भी ऐसी घटनाओं के पीछे काम करती है।ध्यान अवश्य रहे; बिल्कुल भूले नहीं।अपने हक की लडाई शत्रुता जगाती है। संघर्ष समाधान नहीं है। समन्वयता, सहकार, भाईचारा, ॥कृण्वन्तोऽविश्वमार्यम्‌॥

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समाज

देश का शराब मुक्त होना ज़रूरी

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देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार इस समय शराबबंदी को लेकर पूरे देश के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करने की स्थिति में पहुंच चुका है। गत् वर्ष 21 जनवरी को नितीश सरकार ने शराबबंदी के समर्थन में लगभग 12 हज़ार किलोमीटर की विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली एक अद्भुत मानव श्रृंखला बनाई। इस मानव श्रृंखला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबाई नहीं बल्कि शराब के विरोध में एक-दूसरे का हाथ थामे हर आयु-वर्ग के सभी धर्मों व जातियों के तथा सभी प्रकार की आर्थिक हैसियत रखने वाले वह लोग शामिल थे जो वास्तव में भारतीय समाज का दर्पण कहे जाते हैं।

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