समाज क्या वृद्धाश्रम में हमारे बुजुर्ग खुश रहते हैं? March 19, 2016 / March 20, 2016 by जगदीश वर्मा ‘समन्दर’ | 4 Comments on क्या वृद्धाश्रम में हमारे बुजुर्ग खुश रहते हैं? जगदीश वर्मा ‘समन्दर’ पिछले बरस, अपने पैरों पर खड़ी एक नामी अभिनेत्री ने वृन्दावन के आश्रय सदनों में वृद्ध माताओं की भीड़ पर कहा था कि ‘ये घर छोड़कर यहाँ आती ही क्यूँ हैं ?’ उनके इस बयान पर काफी हो-हल्ला मचा । विपक्षी पार्टियों से लेकर आधुनिक समाजसेवी तबके तक से उनके विरोध में […] Read more » Featured old age homes our old relatives in old age homes relatives in old age home अनाथआश्रम और वृद्धाश्रम एक साथ बनायें वृद्धाश्रमों में हमारे बुजुर्ग
शख्सियत समाज छगन भुजबलः कहानी गजब March 19, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हमारे देश में सब्जी बेचने वालों ने जो मुकाम हासिल किया है वह शायद ही किसी और पेशे वाले हासिल कर पाने में कामयाब हुए होंगे। सबसे पहले संजय गांधी उत्तरप्रदेश से आसकरण संखवार को लोकसभा का टिकट देकर उन्हें जितवा कर लाए थे। वे सदन में छाए रहते थे। सदन के बाहर भी ऐसी […] Read more » Chagan bhujbal छगन भुजबल
समाज पुरुषवादी मानसिकता का बर्बर रूप March 18, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment पिछले दिनों महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शनि मंदिर में प्रवेश को लेकर आन्दोलनकारियों और मंदिर समिति की तमाम कार्यवाहियाँ हमारे सामने आ चुकी हैं. इन सबके बावजूद स्त्री-विमर्श के पैरोकार, लेखक-बुद्धिजीवी, कानूनविद और यहाँ तक कि समाजशास्त्री भी इस घटना को भिन्न भिन्न तरीके से देख रहे हैं किन्तु इसके कुछ पहलुओं को जानबूझ […] Read more » male dominated society male domination on women पुरुष प्रधान मानसिकता पुरुषवादी मानसिकता का बर्बर रूप
समाज पातालकोट के नन्हे जुगनू March 18, 2016 by जावेद अनीस | Leave a Comment जावेद अनीस छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक में स्थित पातालकोट मानो धरती के गर्भ में समाया है। तकरीबन 89 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली यह एक घाटी है जो सदियों तक बाहरी दुनिया के लिए अनजान और अछूती बनी रही। पातालकोट में 12 गाँव समाये हुए हैं ये गाँव हैं- गैलडुब्बा, कारेआम, रातेड़, घटलिंगा-गुढ़ीछत्री, घाना […] Read more »
समाज हमारा मूल विदेशों में नही, भारत में है March 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 7 Comments on हमारा मूल विदेशों में नही, भारत में है भारत में जातियों का वर्गीकरण और उनकी सामाजिक स्थिति को विकृत करने का काम अंग्रेजों ने किया। भारत की प्राचीन वर्णव्यवस्था कर्म के आधार पर थी। कर्म से ही व्यक्ति का वर्ण निश्चित किया जाता था, कर्म परिवर्तन से वर्ण परिवर्तन भी सम्भव था। इसलिए एक शूद्र के ब्राह्मण बनने की पूर्ण सम्भावना थी। कालान्तर […] Read more » Featured भारत की प्राचीन वर्णव्यवस्था भारत में जातियों का वर्गीकरण मूल भारत में है
समाज इंसानियत है मज़हब सबसे बड़ा जहां में March 17, 2016 by निर्मल रानी | 1 Comment on इंसानियत है मज़हब सबसे बड़ा जहां में निर्मल रानी इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत सहित पूरे विश्व में मानवता को शर्मसार करने वाली तमाम घटनाओं की ख़बरें सुनने को मिलती रहती है। चारों ओर संकीर्णता,कट्टरपंथी वैचारिकता,स्वार्थ,लालच,धर्म व जाति आधारित वैमनस्य जैसी सामाजिक बुराईयों का बोलबाला है। धर्मांधता व जातिवाद जैसे संकीर्ण विचार रखने वाले लोग मानवता को तिलंाजलि देकर अपने-अपने नापाक […] Read more » Featured humanity is the best religion इंसानियत मजहब सबसे बड़ा मज़हब
पर्व - त्यौहार समाज उमंग का पर्व है होली March 16, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | 1 Comment on उमंग का पर्व है होली डॊ. सौरभ मालवीय होली हर्षोल्लास, उमंग और रंगों का पर्व है. यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इससे एक दिन पूर्व होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहा जाता है. दूसरे दिन रंग खेला जाता है, जिसे धुलेंडी, धुरखेल तथा धूलिवंदन कहा जाता है. लोग एक-दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते […] Read more » Featured उमंग का पर्व उमंग का पर्व है होली होली
शख्सियत समाज समानता के पैरोकार कांशीराम March 15, 2016 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment अरविंद जयतिलक सैकड़ों साल बाद भारतीय समाज का स्वरुप, चरित्र एवं चिंतन की व्याख्या का दायरा और उसके मूल्यों को मापने व परखने का मापदण्ड क्या होगा उसकी भविष्यवाणी आज संभव नहीं है। लेकिन जब भी असमानता और अन्याय पर आधारित समाज के खिलाफ तनकर खड़े होने वाले शिल्पकारों का इतिहासपरक मूल्यांकन करेगा उस कसौटी […] Read more » kanshiram social eqality by kanshiram कांशीराम समानता के पैरोकार कांशीराम
कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार समाज होली: राक्षसी शक्तियों के दहन का पर्व March 15, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव होली एक प्राचीन त्योहार है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मुख्य रुप से यह बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है। भारत और चीन में इसे, इसी परिप्रेक्ष में मनाने की परंपरा है। आज इस पर्व को मूल-अर्थों में मनाना ज्यादा प्रासंगिक है। क्यूंकी नैतिकता-अनैतिकता के सभी मानदण्ड खोटे होते जा रहे हैं। […] Read more » featival Holi राक्षसी शक्तियों के दहन का पर्व होली
कला-संस्कृति समाज हिंद स्वराज मध्यकालीन भारतीय समाज और विदेशी यात्री March 15, 2016 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | Leave a Comment डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री विदेशी यात्रियों की नजर में भारत : मध्यकालीन भारत के बारे में जिन विदेशियों ने भारत संबंधी कुछ विवरण लिखित रूप में छोड़ा, उनमें तीन लोगों का विशेष महत्व है – यूरोप का मेगस्थनीज, चीन का फाह्यान और अरब का अल- बिरूनी । इनमें सबसे पुराना मेगस्थनीज (ईसा पूर्व तीसरी […] Read more » Featured indian society and foreign tourist medieval indian society मध्यकालीन भारतीय समाज विदेशी यात्री
राजनीति समाज समाजवादी प्रदेश के चार साल में शिक्षा का बुरा हाल March 15, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | 1 Comment on समाजवादी प्रदेश के चार साल में शिक्षा का बुरा हाल मृत्युंजय दीक्षित एक ओर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रदेश के बच्चों का भविष्य सुधारने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं तथा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं वहीं अफसरशाही के कारण प्रदेश की शिक्षा का बुरा हाल है। मुख्यमंत्री व प्रशासन के सभी प्रयासों […] Read more » education in akhilesh government education in uttar pradesh Featured शिक्षा शिक्षा का बुरा हाल समाजवादी प्रदेश
समाज संघ की आईएसआईएस से कोई तुलना नहीं ! March 15, 2016 / March 15, 2016 by श्रीराम तिवारी | 1 Comment on संघ की आईएसआईएस से कोई तुलना नहीं ! राज्य सभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेसी गुलाम नबी आजाद ने ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ‘ की तुलना खूँखार इस्लामिक जेहादी संगठन ‘आईएसआईएस’ से की है। ‘संघ परिवार’वाले तो गुलाम नबी आजाद के इस वयान से कदापि सहमत नहीं होंगे। और यह कोई अचरज की बात भी नहीं है ! यह तो सनातन […] Read more » Featured ISIS no comparison of sangh with isis Sangh आईएसआईएस संघ