शख्सियत समाज २३ मार्च – बलिदान व समाजवाद की एक यादगार – प्रेरक तारीख March 22, 2012 / March 22, 2012 by अरविन्द विद्रोही | Leave a Comment अरविन्द विद्रोही २३ मार्च , बलिदान व समाजवाद की एक यादगार – प्रेरक तारीख | २३ मार्च के ही दिन समाजवाद को नयी परिभाषा , नयी सोच और विचारो से कर्म तक के संघर्ष का नूतन पथ प्रदर्शित करने वाले डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म हुआ था | डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म […] Read more » birth day of Dr.Ram Manohar Lohia डॉ राम मनोहर लोहिया
समाज उत्तराखंडी बनो नहीं तो एक दिन कहीं के नहीं रहोगे…….. March 20, 2012 / July 22, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment भार्गव चन्दोला 11 साल हो गए उत्तराखंड को बने हुये मगर आज भी हम उत्तराखंडी नहीं बन पाये…. आज हम कुमाउनी, गढ़वाली, मैदानी, जौनसारी, ब्राह्मण, ठाकुर, हरिजन, पंजाबी, जाट, सरदार, बनिया, मुस्लमान बन कर रह गए हैं जिस कारण लगातार आपसी भाईचारा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है जो की हमारे उत्तराखंड को लाईलाज बीमारी […] Read more » Utrakhand उत्तराखंड
समाज गरीब भारत की रईस राजमाता March 19, 2012 / July 22, 2012 by एल. आर गान्धी | 5 Comments on गरीब भारत की रईस राजमाता एल. आर गाँधी जब बाबा राम देव ने स्विस बैंकों में देश के काले धन को उजागर करने का अभियान छेड़ा तो राज माता ने अपने चार वरिष्ठ मंत्री बाबा को शीशे में उतारने भेजे …बाबा नहीं माने तो पूरे खेल की परिणति ‘रामलीला मैदान- रात्रि काण्ड’ केरूप में सामने आई … हमारे दिग्गी मियां […] Read more » poor indian गरीब भारत गरीब भारत की रईस राजमाता राजमाता
समाज मन की आँखों से रंगों का एहसास March 17, 2012 / March 17, 2012 by अशोक बजाज | Leave a Comment होली उमंग और जोश का पर्व है . हम अपने उमंग और जोश का ईजहार रंग व गुलाल से करते है. यह जानते हुए भी कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश रंगों में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के लिए नुकसानदेह है हम रंग खेलने से नहीं चूकते. डाक्टर या प्रबुद्ध-जन चाहे […] Read more » holi with blinds रंगों का एहसास
समाज धर्म के नाम पर समाज को विभाजित करते सांप्रदायिकतावादी March 5, 2012 by निर्मल रानी | 3 Comments on धर्म के नाम पर समाज को विभाजित करते सांप्रदायिकतावादी निर्मल रानी भारतवर्ष के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर कलंक समझे जाने वाले गोधरा ट्रेन कांड व उसके पश्चात हुए गुजरात के भयावह दंगों को हालांकि दस वर्ष बीत चुके हैं। परंतु देश को अयोध्या, गोधरा व गुजरात हादसों के मोड़ तक पहुंचाने वाली सांप्रदायिक शक्तियां अभी भी अपनी पूरी शक्ति व सामथ्र्य के साथ भारतीय समाज […] Read more »
समाज सेकुलर मानसिकता और मानवाद्धिक्कार March 5, 2012 / July 22, 2012 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल.आर.गाँधी इस्लाम के नाम पर पाक में अल्पसंख्यक हिन्दू लड़कियों पर अत्याचार जारी हैं मगर देश के सेकुलर शैतान चुप हैं. कराची से खबर है की प्रति माह पाक में करीबन २० हिन्दू लड़कियों का ज़बरन धर्म परिवर्तन कर मुसलमान लड़कों से निकाह करवा दिया जाता है. मीरपुर माथेलो की १७ वर्षीय रिंकल का सात […] Read more » secular politicians मानवाद्धिक्कार सेकुलर मानसिकता
समाज ‘चरणबद्ध तरीके से निजी क्षेत्र में लागू हो आरटीआई’ March 5, 2012 / July 22, 2012 by हिमांशु शेखर | Leave a Comment उड़ीसा के क्योंझर जिले में 17 जनवरी 1949 को पैदा हुए सत्यानंद मिश्रा का केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) तक का सफर कई लोगों को प्रेरित करने वाली है. जब वे दो साल के थे तो उनके माता-पिता नहीं रहे. राज्य के आदिवासी कल्याण विभाग में काम करने वाले अपने चाचा कृपासिंधू दास की देखरेख में […] Read more » RTI आरटीआई
समाज गोधरा के शहीदों को नमन March 1, 2012 by सुमंत विद्वांस | 1 Comment on गोधरा के शहीदों को नमन सुमंत 27 फरवरी 2002. ‘आधुनिक’ भारत के इतिहास का एक और काला दिन. इसी दिन इस ‘स्वतंत्र’ और “धर्मनिरपेक्ष” देश में सुबह 7:43 बजे गुजरात के गोधरा स्टेशन पर इसी देश के 58 नागरिकों (23 पुरुषों, 15 महिलाओं और 20 बच्चों) को साबरमती एक्सप्रेस के कोच S-6 में ज़िंदा जला दिया गया. उनका ‘अपराध’ शायद […] Read more »
शख्सियत समाज बलबीर सिंह सीचेवालः जिन्होंने नदी को नई जिंदगी दी February 23, 2012 / February 23, 2012 by हिमांशु शेखर | 1 Comment on बलबीर सिंह सीचेवालः जिन्होंने नदी को नई जिंदगी दी हिमांशु शेखर भारत में आम तौर पर यह देखा गया है अगर किसी पर धर्म और आध्यात्म का रंग काफी ज्यादा चढ़ जाए तो या तो वह यहां-वहां घूमकर प्रवचन करने लगता है या फिर कहीं एकांत में जैसे किसी पहाड़ आदि पर जाकर साधना में लीन हो जाता है. इस देश में ऐसे लोगों […] Read more » Bakbir Singh DSichewal बलबीर सिंह सीचेवाल
समाज राम-रहीम के पचडे में कहां खो गया इंसां February 17, 2012 / February 18, 2012 by वीरभान सिंह | 1 Comment on राम-रहीम के पचडे में कहां खो गया इंसां वीरभान सिंह RAMJAAN में राम और दीपावली में बसते हैं अली हिन्दू-मुसलमान को छोडो, हम बनकर करो भारत निर्माण RAMJAAN और दीपावली, पूरा भारत देश मनाता है, लेकिन क्या किसी ने भी इन शब्दों में छिपे गूढ रहस्य को समझने का प्रयास किया है। धर्मों के ठेकेदारों ने तो सदैव जातिवाद और संप्रदायवाद की विष […] Read more » hindu muslim राम-रहीम
लेख समाज गरीबी का आधुनिकीकरण February 14, 2012 / February 14, 2012 by गंगानन्द झा | Leave a Comment ऐसा बताया जाता रहा है कि बढ़ते हुए परिवर्द्धन के साथ-साथ अभाव की स्थिति में कमी आती जाएगी तथा अन्त में विश्व के हर कोने से गरीबी समाप्त हो जाएगी। परिवर्द्धन (Development) और गरीबी के बीच विलोमानुपाती सम्बन्ध समझा जाता रहा है। पर यह परी-कथा ही निकली। अमीर और गरीब के बीच के फर्क के […] Read more » modernisation of poverty poverty आधुनिकीकरण गरीबी गरीबी का आधुनिकीकरण
समाज देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनते भिखारी वेशधारी February 13, 2012 / February 13, 2012 by निर्मल रानी | 1 Comment on देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनते भिखारी वेशधारी निर्मल रानी हमारे देश में एक अनुमान के अनुसार एक करोड़ से भी अधिक लोग भीख मांगकर अपना जीवन यापन करते हैं। इन भिखारियों में जहां तमाम मजबूर,गरीब,लाचार,शारीरिक रूप से असहाय व अति वृद्ध ऐसे लोग शामिल हैं जो वास्तव में दया के पात्र होते हैं वहीं इनमें काफी बड़ी संख्या ढोंगी,निखट्टू,हट्टे-कट्टे,आलसी व अपराधी प्रवृति […] Read more » beggers देश की सुरक्षा के लिए खतरा भिखारी वेशधारी