समाज सार्थक पहल रोज़गार का सशक्त माध्यम बन सकता है पशुधन December 10, 2020 / December 10, 2020 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment फूलदेव पटेल मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार ऐसे वक़्त में जबकि देश में रोज़गार के अवसर कम होते जा रहे हैं, बड़ी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की छटनी कर रही हैं, रोज़गार के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं, ऐसे वक़्त में भी देश के ग्रामीण क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में रोज़गार के अवसर उपलब्ध हैं। वास्तव […] Read more » Livestock can become a strong medium of employment पशुधन रोज़गार का सशक्त माध्यम
लेख समाज विविधता की उपलब्धि December 9, 2020 / December 9, 2020 by गंगानन्द झा | Leave a Comment मैं अपने जीवनकाल में कई प्रकार की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के समाजों से प्रभावित होता रहा हूँ। पूर्वी भारत के झारखण्ड राज्य का देवघर नामक तीर्थस्थान मेरा गृह नगर है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा, के लिए घर छूटा तो फिर आजीविका के क्रम में बिहार, बंगाल और असम में रहने के अवसर […] Read more » विविधता की उपलब्धि
मनोरंजन मीडिया समाज जन-जन को जगाता “सोशल मीडिया” November 29, 2020 / November 29, 2020 by विनोद कुमार सर्वोदय | Leave a Comment राष्ट्रीय उपलब्धियों,समस्याओं और अन्य समाचारों का प्रसार व प्रचार करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में समाचार पत्रों व टीवी न्यूज चैनलों का वर्षो से विशेष योगदान बना हुआ है। उसी कड़ी में बढ़ते संचार संसाधनों के कारण ट्विटर,फेसबुक व व्हाट्सऐप आदि की जन जन तक पहुँच होने से बढ़ते संवादों ने सोशल मीडिया को […] Read more » Social media awakens people अल्पसंख्यक आयोग अल्पसंख्यक मन्त्रालय इस्लामिक आतंकवाद जनसंख्या नियंत्रण कानून सामान नागरिक संहिता सोशल मीडिया
लेख समाज गुरुनानक देव जी की सीखें हर काल में प्रासंगिक रहेंगी। November 27, 2020 / November 27, 2020 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ॥ ਜਪੁ ॥ ਆਦਿ ਸਚੁ ਜੁਗਾਦਿ ਸਚੁ ॥ ਹੈ ਭੀ ਸਚੁ ਨਾਨਕ ਹੋਸੀ ਭੀ ਸਚੁ ॥1॥ एक ओंकार सतनाम, कर्तापुरख, निर्माह निर्वैर, अकाल मूरत, अजूनी सभं. गुरु परसाद ॥ ॥ जप ॥ आद सच, जुगाद सच, है भी सच, नानक होसे […] Read more » Learning of Guru Nanak Dev ji अकाल मूरत अजूनी सभं. गुरु परसाद आद सच एक ओंकार सतनाम कर्तापुरख गुरुनानक देव जी की सीखें जुगाद सच नानक होसे भी सच निर्माह निर्वैर है भी सच
लेख समाज सभ्य समाज का नासूर है नारी हिंसा और उत्पीड़न November 27, 2020 / November 27, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस ( 25 नवम्बर, 2020 ) परललित गर्ग भारत ही नहीं, दुुनियाभर की महिलाओं पर बढ़ती हिंसा, शोषण, असुरक्षा एवं उत्पीड़न की घटनाएं एक गंभीर समस्या है। संयुक्त राष्ट्र संघ महिलाओं पर की जा रही इस तरह हिंसा के उन्मूलन के लिए 25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा एवं उन्मूलन दिवस के […] Read more » अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस नारी हिंसा नारी हिंसा और उत्पीड़न सभ्य समाज का नासूर
लेख समाज बुरा वक्त भी बहुत कुछ सिखाता है November 11, 2020 / November 11, 2020 by सोनम लववंशी | Leave a Comment साल 2020 काफी चुनोतियों भरा है। इस साल जो घटनाएं घटित हुई है वो न ही कभी गुजरे जमाने मे देखी गई होगी और न ही आने वाले वक्त में फिर कभी कोई इस तरह की घटनाओं की कल्पना कर रहा होगा। ये सच है कि बीते कुछ महीनों में ज़िन्दगी की रफ्तार पर ब्रेक […] Read more » बुरा वक्त भी बहुत कुछ सिखाता है
समाज बच्चों के अश्लील वीडियो का घिनौना धंधा November 7, 2020 / November 7, 2020 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव सीबीआई ने बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो बेचने वाले अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुंबई के एक टीवी कलाकार को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी ने अमेरिका, यूरोप और दक्षिण एशियाई देशों में एक हजार से अधिक लोगों को ग्राहक बनाया हुआ था। […] Read more » इंटरनेट और सोशल प्लेटफॉर्म बच्चों के अश्लील वीडियो सर्वोच्च न्यायालय सोशल मीडिया का दुरुपयोग
राजनीति समाज लव जिहाद और राणा जैसे बयान दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करते है। November 3, 2020 / November 3, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment रात हलाला नेक है, उठते नहीं सवाल ! राम नाम की दक्षिणा,पर क्यों कटे बवाल !!लव जिहाद और राणा जैसे बयान दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करते है। यह किसी एक राज्य, देश या समुदायों तक सीमित नही बल्कि विश्व्यापी समस्या बनता जा रहा है और इस कुचक्र का शिकार मासूम लड़कियां ही नहीं […] Read more » love jihad Statements like Love Jihad and Rana create hatred between the two communities. लव जिहाद और राणा
समाज मुख्यधारा से अभी भी दूर है पहाड़िया समाज November 2, 2020 / November 2, 2020 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अमरेन्द्र सुमन दुमका, झारखंड संथाल परगना प्रमण्डल के हरित पर्वत मालाओं, घने जंगलों, स्वच्छंद नदी-नालों तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अंग्रेजों, जमींदार और महाजनों जैसे शोषक वर्गों से लोहा लेने वाली आदिम जाति पहाड़िया समुदाय का अपना एक विशिष्ट इतिहास रहा है। इसे भारत की दुर्लभ जनजातियों में से एक माना जाता है। […] Read more » Pahadia society is still far from mainstream पहाड़िया समाज
समाज माता पिता की सेवा से सन्तानों को स्वर्गीय सुख प्राप्त होता है November 2, 2020 / November 2, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य सभी मनुष्यों के जीवन में माता-पिता होते हैं जो सन्तानों को जन्म देने के साथ उनका पालन भी करते हैं। सन्तान को जन्म देने में माता-पिता को अनेक कष्टों से गुजरना पड़ता है। माता-पिता यदि सन्तान की रक्षा व पालन न करें तो सन्तान का जीवित रहना भी सम्भव नहीं होता। […] Read more » Children get heavenly happiness from the service of parents माता पिता की सेवा माता पिता की सेवा से सन्तानों को स्वर्गीय सुख सन्तानों को स्वर्गीय सुख
महिला-जगत लेख विविधा समाज हिन्दू धर्म और स्त्री स्वतंत्रता October 28, 2020 / October 28, 2020 by डॉ. शुभ्रता मिश्रा | Leave a Comment डॉ. शुभ्रता मिश्रा हिन्दू धर्म को समझने के लिए उसके प्राचीनतम और आधारभूत धर्मग्रन्थ अर्थात् ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद परम प्रमाण माने गए हैं। इन चारों वेदों में उद्धृत पवित्र मन्त्र वास्तव में ईश्वर की वाणी है, जिनके प्रति सभी हिन्दु धर्माबलंबियों की अगाध श्रद्धा और आस्था जुड़ी हुई है। सृष्टि के अनेक रहस्यों […] Read more » Hindu religion and female freedom कात्यायनी मैत्रयी वैदिक काल की गार्गी सुलभा हिन्दू धर्म और स्त्री स्वतंत्रता
समाज आखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार ? October 27, 2020 / October 27, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की […] Read more » why are emotions changing and families collapsing? टूट रहे परिवार बदल रहे हैं मनोभाव