शख्सियत समाज हिंद स्वराज झंडेवाला पार्क के नायक थे अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी August 23, 2020 / August 23, 2020 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment 85वें बलिदान दिवस 23 अगस्त 2020 पर विशेष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास ऐसे वीर वीरांगनाओं की कहानियों से भरा पड़ा है जिनके योगदान को कोई मान्यता नहीं मिली है। ऐसे ही हमारे अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी हैं जिनका योगदान भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा है कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी को इतिहासकारों ने पूरी तरह से उपेक्षित रखा है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक वीर वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध खुला विद्रोह किया और स्वतंत्रता की खातिर शहीद हो गये। इन्हीं शहीदों में क्रांतिवीर गुलाब सिंह लोधी का नाम भी शामिल है। जिन्होंने अपने प्राणों की बाजी भारत माँ को आजादी दिलाने के लिए लगा दी। उनका जन्म एक किसान परिवार में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ग्राम चन्दीकाखेड़ा (फतेहपुर चौरासी) के लोधी परिवार में सन् 1903 में श्रीराम रतनसिंह लोधी के यहां हुआ था। लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में झण्डा सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लेने उन्नाव जिले के कई सत्याग्रही जत्थे गये थे, परन्तु सिपाहियों ने उन्हें खदेड़ दिया और ये जत्थे तिरंगा झंडा फहराने में कामयाब नहीं हो सके। इन्हीं सत्याग्रही जत्थों में शामिल वीर गुलाब सिंह लोधी किसी तरह फौजी सिपाहियों की टुकड़ियों के घेरे की नजर से बचकर आमीनाबाद पार्क में घुस गये और चुपचाप वहां खड़े एक पेड़ पर चढ़ने में सफल हो गये। क्रांतिवीर गुलाब सिंह लोधी के हाथ में डंडा जैसा बैलों को हांकने वाला पैना था। उसी पैना में तिरंगा झंडा लगा लिया, जिसे उन्होंने अपने कपड़ों में छिपाकर रख लिया था। क्रांतिवीर गुलाब सिंह ने तिरंगा फहराया और जोर-जोर से नारे लगाने लगे- तिरंगे झंडे की जय, महात्मा गांधी की जय, भारत माता की जय। अमीनाबाद पार्क के अन्दर पर तिरंगे झंडे को फहरते देखकर पार्क के चारों ओर एकत्र हजारों लोग एक साथ गरज उठे और तिरंगे झंडे की जय, महात्मा गांधी की जय, भारत माता की जय। झंडा सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान देश की हर गली और गांव शहर में सत्याग्रहियों के जत्थे आजादी का अलख जगाते हुए घूम रहे थे। झंडा गीत गाकर, झंडा ऊंचा रहे हमारा, विजय विश्व तिरंगा प्यारा, इसकी शान न जाने पावे, चाहे जान भले ही जाये, देश के कोटि कोटि लोग तिरंगे झंडे की शान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए दीवाने हो उठे थे। समय का चक्र देखिए कि क्रांतिवीर गुलाब सिंह लोधी के झंडा फहराते ही सिपाहियों की आंख फिरी और अंग्रेजी साहब का हुकुम हुआ, गोली चलाओ, कई बन्दूकें एक साथ ऊपर उठीं और धांय-धांय कर फायर होने लगे, गोलियां क्रांतिवीर सत्याग्रही गुलाबसिंह लोधी को जा लगीं। जिसके फलस्वरूप वह घायल होकर पेड़ से जमीन पर गिर पड़े। रक्त रंजित वह वीर धरती पर ऐसे पड़े थे, मानो वह भारत माता की गोद में सो गये हों। इस प्रकार वह आजादी की बलिवेदी पर अपने प्राणों को न्यौछावर कर 23 अगस्त 1935 को शहीद हो गये। क्रांतिवीर गुलाबसिंह लोधी के तिरंगा फहराने की इस क्रांतिकारी घटना के बाद ही अमीनाबाद पार्क को लोग झंडा वाला पार्क के नाम से पुकारने लगे और वह आजादी के आन्दोलन के दौरान राष्ट्रीय नेताओं की सभाओं का प्रमुख केन्द्र बन गया, जो आज शहीद गुलाब सिंह लोधी के बलिदान के स्मारक के रूप में हमारे सामने है। मानो वह आजादी के आन्दोलन की रोमांचकारी कहानी कह रहा है। क्रांतिवीर गुलाब सिंह लोधी ने जिस प्रकार अदम्य साहस का परिचय दिया और अंग्रेज सिपाहियों की आँख में धूल झोंककर बड़ी चतुराई तथा दूरदर्शिता के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त किया, ऐसे उदाहरण इतिहास में बिरले ही मिलते हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय अग्रणी भूमिका निभाने के लिए उनकी याद में केंद्र सरकार द्वारा जनपद उन्नाव में 23 दिसंबर 2013 को डाक टिकट जारी किया गया। एक सच्चा वीर ही देश और तिरंगे के लिये अपने प्राण न्यौछावर कर सकता है। ऐसे ही अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी एक सच्चे वीर थे जिन्होंने अपने देश और तिरंगे की खातिर अपना बलिदान दे दिया और तिरंगे को झुकने नहीं दिया। अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी का बलिदान देशवासियों को देशभक्ति और परमार्थ के लिये जीने की प्रेरणा देता रहेगा। आज हम वीर शहीद गुलाब सिंह लोधी को उनके 85वें बलिदान दिवस पर नमन करते हुए यही कह सकते हैं कि- ‘‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले। वतन पर मरने वालों का यह बाकी निशां होगा।’’ जय हिंद, जय भारत Read more » Gulab singh lodhi अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी गुलाब सिंह लोधी
लेख समाज विश्व सीनियर सिटीजन दिवस :: करें बुजुर्गों का आदर सत्कार व देखभाल ,ये है जीवन का अनमोल आधार August 21, 2020 / August 21, 2020 by भगवत कौशिक | Leave a Comment भगवत कौशिक आज 21 अगस्त यानी वर्ल्ड सीनियर सिटीजन दिवस,स्पष्ट शब्दों मे कहे तो अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस।हमारे बुजुर्गों के लिए सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से ही हर वर्ष 21 अगस्त को विश्व सीनियर सिटीजन दिवस मनाया जाता है। बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना प्रकट करने व उनको यह अहसास दिलाने की आप […] Read more » World Senior Citizen Day बुजुर्ग विश्व सीनियर सिटीजन दिवस
जन-जागरण लेख समाज शुक्र मनाइए कि आपकी नौकरी बची हुई है ! August 21, 2020 / August 21, 2020 by निरंजन परिहार | Leave a Comment -निरंजन परिहार शुक्र मनाइए कि आप उन दो करोड़ लोगों में नहीं है, जिनकी, लॉकडाउन में चलती नौकरियां चली गई हैं और अगर आप उन 22 करोड़ लोगो में नहीं है, जो लॉकडाउन में काम धंधा बंद होने से बेरोजगार होकर घर बैठने को मजबूर हैं, तो भी शुक्र मनाइए। क्योंकि हमारे हिंदुस्तान में कोरोना ने कोहराम मचा रखा […] Read more »
लेख समाज हमारा मन आखिर क्या चाहता है ? August 17, 2020 / August 17, 2020 by पंडित विनय कुमार | Leave a Comment अक्सर जब मैं अकेला रहता हूं तो स्वभावत: मेरा मन नहीं लगता । मैं अपने आप से पूछता भी हूं कि आखिर मन क्यों नहीं लग रहा है ? किंतु सच्चाई यह है कि उसका उत्तर मुझे नहीं मिलता । उत्तर नहीं मिलने के कई कारण हैं! एक कारण तो यह है कि मैं इसके […] Read more » What does our mind want? मन आखिर क्या चाहता है हमारा मन आखिर क्या चाहता है ?
खेल जगत फ़ेस बुक पेज़ से समाज धोनी जैसे सेनापति रिटायर नहीं होते, केवल रणक्षेत्र बदलते हैं !! August 17, 2020 / August 17, 2020 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अजय बोकिलवरिष्ठ संपादक‘माही’ के खेल से रिटायर होने का मुझ जैसे क्रिकेट के अल्पज्ञानी के लिए क्या मतलब है? जीत को आदत में बदलने के आग्रही सेनापति की रणक्षेत्र से स्वैच्छिक निवृत्ति या फिर उस लाजवाब हेलीकाॅप्टर शाॅट का स्मृति के हैंगर पर हमेशा के लिए टंग जाना ? एक लंबे बालों वाले मर्द क्रिकेटर […] Read more » Senators like Dhoni do not retire
राजनीति समाज कोरोना संकट काल में लौटे झारखण्डी युवाओं के लिए चुनौतियाँ August 16, 2020 / August 16, 2020 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध” कोविद 19 के संक्रमण काल में अर्थात कोरोना संकट के दौरान सम्पूर्ण देश के गाँवों की भांति झारखण्ड के गाँव की ओर लौटने वाले युवाओं व श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। जहां पूर्व में गाँव वीरान और सिर्फ बुजुर्गों का गाँव दिखाई देता था, वहीँ अब युवाओं के गाँव लौटने के कारण गाँवों […] Read more » Challenges for Jharkhandi youth who returned to Corona crisis Manrega झारखण्डी युवाओं के लिए चुनौतियाँ मनरेगा मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना योजना महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
समाज आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक नहीं हैं August 16, 2020 / August 16, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment — डॉo सत्यवान सौरभ, हर 40 सेकंड में, दुनिया में कोई न कोई अपनी जान लेता है। समाजशास्त्री एमिल दुर्खीम ने प्रसिद्ध रूप से परिकल्पना की थी कि ‘आत्महत्याएं केवल मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक नहीं हैं, बल्कि सामाजिक कारक भी हैं।’ दुनिया भर में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोग कोविड -19 संक्रमण, सामाजिक कलंक, […] Read more » Suicides Suicides are not just psychological or emotional factors आत्महत्याएं
समाज कैसे रुकेगा हिंसक एवं धार्मिक उन्माद August 16, 2020 / August 16, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग –बैंगलोर में फेस बुक पर एक विवादास्पद पोस्ट के बाद एक धर्म विशेष के उपद्रवी तत्वों ने जो हिंसक तांडव किया और उसी धर्म के कुछ युवकों ने वीरतापूर्वक एक मन्दिर को को क्षतिग्रस्त करने से रोका और उसकी सुरक्षा में चक्रव्यूह रच डाला। अहिंसा एवं सर्वधर्म सद्भाव के इस अनुकरणीय उदाहरण वाले […] Read more » bangalore violence धार्मिक उन्माद साम्प्रदायिक संकीर्णता साम्प्रदायिक संकीर्णता एवं धार्मिक उन्माद हिंसक एवं धार्मिक उन्माद
समाज हिंद स्वराज स्वतंत्रता दिवस और देश की आधी आबादी August 16, 2020 / August 16, 2020 by सोनम लववंशी | Leave a Comment देश की आजादी को 73 सावन बीत गए है और हम 74 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहें लेकिन इस आजाद देश में आज भी आधी आबादी गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई है। हम कहने को 21वीं सदी में जी रहे है। जहां समता और स्वतंत्रता की बात भी बहुतायत में होती है। हमारे […] Read more » भ्रूणहत्या महिला सशक्तिकरण और फेमिनिज्म स्वतंत्रता दिवस
विधि-कानून समाज बेटियां हकदार लेकिन कई मुश्किलें August 13, 2020 / August 13, 2020 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले ने देश की बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का हकदार बना दिया है। अदालत के पुराने फैसले रद्द हो गए हैं, जिनमें कई किंतु-परंतु लगाकर बेटियों को अपनी पैतृक संपत्ति का अधिकार दिया गया था। मिताक्षरा पद्धति या हिंदू कानून में यह माना जाता […] Read more » पैतृक संपत्ति में बेटियों का अधिकार बेटों के बराबर बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बराबरी का हकदार सर्वोच्च न्यायालय
महिला-जगत विश्ववार्ता समाज वर्क फ्रॉम होम के दौर में लैंगिक उत्पीडन का बदलता स्वरूप August 12, 2020 / August 12, 2020 by उपासना बेहार | Leave a Comment उपासना बेहार कोरोना वाइरस के कारण देश में सम्पूर्ण लाक डाउन किया गया था जिसने सबको घर के अंदर रहने को बाध्य कर दिया था इस दौर में लोग घर से ऑफिस का काम (work from home) करने लगे. पहले भारत में कम संख्या में वर्क फ्राम होम होता था लेकिन लाक डाउन के कारण […] Read more » Changing nature of sexual harassment Changing nature of sexual harassment during the era of work from home era of work from home लैंगिक उत्पीडन वर्क फ्रॉम होम वर्क फ्रॉम होम के दौर में लैंगिक उत्पीडन
लेख समाज सर्पदंश :हर दस मिनिट में असमय मरता एक गरीब भारतीय August 12, 2020 / August 12, 2020 by डॉ अजय खेमरिया | Leave a Comment डॉ अजय खेमरियाकोरोना महामारी के शोर में इस साल जून से अब तक करीब बीस हजार भारतीय अपने खेतों में सर्पदंश से मौत का शिकार हो चुके हैं। देश भर में करीब तीन लाख लोग हर साल सांप के काटने का शिकार होते है ।हर दस मिनिट में एक व्यक्ति की मौत इसके चलते हो […] Read more » प्रीमियम सीरम्स एन्ड वैक्सीन्स सर्पदंश