विविधा अहम सवाल- जिन्दगी जैसी है वैसी क्यों हैं August 1, 2018 / August 1, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा रचना (यहाँ टाइप या पेस्ट करें): एक किताब मिली। The Vital Question. Why life is the way it is. लेखक हैं Nick Lane । (अहम सवाल, जिन्दगी जैसी है वैसी क्यों है। ) मैं जीव-विज्ञान का छात्र रहा हूँ।मैंने सीखा कि प्रोटोप्लाज्म जीवन का भौतिक आधार है। मैंने सीखा कि पदार्थ के एक विशेष […] Read more » Featured अहम सवाल- जिन्दगी जैसी है वैसी क्यों हैं आत्मा जीव-विज्ञान परमात्मा रवीन्द्रनाथ ठाकुर लोक परलोक
विविधा सेवा कार्य ही ईश्वरीय कार्य : प्रो. संजय द्विवेदी July 30, 2018 / July 30, 2018 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment सेवा भारती द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह आयोजित, 250 विद्यार्थियों को किया गया पुरुस्कृत प्रो. संजय द्विवेदी भोपाल, 29 जुलाई। सेवा कार्य ही ईश्वरीय कार्य है। जब हम समाज को शिक्षित, संस्कारित, स्वावलंबी और समरस बनाने के लिए सेवा कार्य करते हैं तो उसी आनंद की अनुभूति करते हैं,जो ईश्वर की आराधना में प्राप्त होता है। यह विचार माखनलाल […] Read more » Featured दिव्यांग बालकों शिक्षा शिक्षा एवं संस्कार केंद्र शिशु-बाल समरसता संस्कार सेवा कार्य ही ईश्वरीय कार्य : प्रो. संजय द्विवेदी स्वावलंबन स्वास्थ्य
विविधा लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना July 26, 2018 / July 26, 2018 by डॉ. मधुसूदन | 6 Comments on लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना डॉ. मधुसूदन (एक) भाषाएँ क्यों बदलती हैं? संसार की सभी भाषाओं का व्याकरण धीरे धीरे बदलता रहा है. उनके उच्चारण भी बदलते रहते हैं. वर्णाक्षरों की संख्या भी बदलते रहती है. व्याकरण, वर्णाक्षर, और उच्चारण ऐसे तीन बदलाव आप संसार की सभी भाषाओं में देख पाएँगे. इस प्रक्रिया के निरीक्षण के कारण एक सूत्र ही […] Read more » Featured एन्सायक्लोपेडिया ऑफ हिन्दुइज़्म ब्राह्मी और देवनागरी मॅक्स मूलर के आय. सी. एस लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना
विविधा लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना July 24, 2018 / July 24, 2018 by डॉ. मधुसूदन | 2 Comments on लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना डॉ. मधुसूदन (एक) भाषाएँ क्यों बदलती हैं? संसार की सभी भाषाओं का व्याकरण धीरे धीरे बदलता रहा है. उनके उच्चारण भी बदलते रहते हैं. वर्णाक्षरों की संख्या भी बदलते रहती है. व्याकरण, वर्णाक्षर, और उच्चारण ऐसे तीन बदलाव आप संसार की सभी भाषाओं में देख पाएँगे. इस प्रक्रिया के निरीक्षण के कारण एक सूत्र ही […] Read more » Featured अंग्रेज़ी . उच्चारण देवनागरी लिपि लातिनी और संस्कृत -भाषा में बदलाव की तुलना संस्कृत
विविधा अनिवार्य शिक्षण में शामिल होने से बचेगा हिन्दी का भविष्य July 20, 2018 by अर्पण जैन "अविचल" | 4 Comments on अनिवार्य शिक्षण में शामिल होने से बचेगा हिन्दी का भविष्य डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत बहु भाषी और बहु सांस्कृतिक समन्वय वाला राष्ट्र है, जहाँ ‘कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी’ बदल जाती है। किन्तु विगत 50 साल में भारत की क़रीब 20 फीसदी भाषाएं विलुप्त हो गई हैं। वर्ष १९६१ की जनगणना के बाद भारत में १६५२ मातृभाषाओँ का पता चला था, […] Read more » Featured hindi अनिवार्य शिक्षण हिन्दी का भविष्य
विविधा आपातकाल को लेकर जनता को जागरूक रहना चाहिये – हरेन्द्र प्रताप June 28, 2018 / June 28, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार वि.वि. में आपातकाल प्रसंग पर विमर्श हरेन्द्र प्रताप भोपाल, 26 जून। प्रख्यात चिंतक और विचारक श्री हरेन्द्र प्रताप ने आपातकाल के दर्द को बयां करते हुए कहा कि आज की युवा पीढी को आपातकाल के दौर को याद दिलाने की आवश्यकता है। मैंने प्रत्यक्ष तौर पर आपातकाल […] Read more » Featured आपातकाल जय प्रकाश नारायण पत्रकारों और कार्यकर्ताओं युवाओं लोकतंत्र की रक्षा श्री लाजपत आहूजा संविधान
विविधा जैव विविधता भारत की धरोहर है May 21, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव जिस तरह से आज पूरी दुनिया वैश्विक प्रदूषण से जूझ रही है और कृषि क्षेत्र में उत्पादन का संकट बढ़ रहा है, उस परिप्रेक्ष्य में जैव विविधता का महत्व बढ़ गया है। लिहाजा हमें जहां जैव कृषि सरंक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है, वहीं जो प्रजातियां बची हुई हैं, उनके भी सरंक्षण […] Read more » Featured चिड़ियाघरों जीव-जंतु जैव विविधता भारत की धरोहर मानव प्रजातियां सभ्यताएं और संस्कृतियां
विविधा पानी समाप्त होने के कारण और भी हैं May 15, 2018 by डॉ. राजेश कपूर | 12 Comments on पानी समाप्त होने के कारण और भी हैं वैद्य राजेश कपूर जिस प्रकार पृथ्वी पर लगभग 68 से 70 प्रतिशत जल है, ठीक उसी प्रकार हमारे शरीर में भी 68 % से 70% तक जल है। पानी और स्वास्थ्य पानी की गुणवत्ता पर बहुत अधिक यह निर्भर करता है कि हमारा स्वास्थ्य कैसा होगा। हम जैसा पानी पीयेंगे वैसा हमारा स्वास्थ्य होगा। उसका […] Read more » drinkable water shortage Featured global water crisis polluted water water water crisis water shortage पानी की कमी
विविधा वाह कोलकाता. आह कोलकाता .!! May 13, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा देश की संस्कारधानी कोलकाता पर गर्व करने लायक चीजों में शामिल है फुटपाथ पर मिलने वाला इसका बेहद सस्ता खाना। बचपन से यह आश्चर्यजनक अनुभव हासिल करने का सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है । देश के दूसरे महानगरों के विपरीत यहां आप चाय – पानी लायक पैसों में खिचड़ी से लेकर […] Read more » Featured चिड़ियाखाना में जानवारों फल खाने मनपसंद मिठाई मांस शौक संस्कारधानी कोलकाता
विविधा *प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान* April 28, 2018 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment *डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’* पुस्तक सर्वदा बहुत अच्छी मित्र होती है, इसके पीछे एक कारण यह है कि पुस्तक ही किसी सृजक के उपलब्ध ज्ञान का निष्कर्ष होती है। जब तक लेखक किसी विषय को गहनता से अध्ययन नहीं कर लेता उस पर लेखन उसके लिए संभव नहीं है और गहराई से ग्रहण किए ज्ञान का […] Read more » Featured इंटरनेट व सोशल मीडिया पुस्तक प्रकाशित पुस्तक लेखक हिन्दीलेखक
विविधा हिंदी के नाम पर पाखंड April 13, 2018 / April 13, 2018 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 4 Comments on हिंदी के नाम पर पाखंड डॉ. वेदप्रताप वैदिक ताजा खबर यह है कि विश्व हिंदी सम्मेलन का 11 वां अधिवेशन अब मोरिशस में होगा। मोरिशस की शिक्षा मंत्री लीलादेवी दोखुन ने सम्मेलन की वेबसाइट का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘आज हिंदी की हालत पानी में जूझते हुए जहाज की तरह हो गई है।’ अच्छा हुआ कि […] Read more » 11 वां अधिवेशन Featured भाषा मोरिशस लीलादेवी दोखुन विश्व हिंदी सम्मेलन शिक्षा मंत्री संयुक्तराष्ट्र स्वतंत्र भारत
विविधा मैं ककहरा सीख रहा था, वो प्रिंसीपल थे.. April 11, 2018 by मनोज कुमार | 1 Comment on मैं ककहरा सीख रहा था, वो प्रिंसीपल थे.. मनोज कुमार मैं उन दिनों पत्रकारिता का ककहरा सीख रहा था. और कहना ना होगा कि रमेशजी इस स्कूल के प्रिंसीपल हो चले थे. यह बात आजकल की नहीं बल्कि 30 बरस पुरानी है. बात है साल 87 की. मई के आखिरी हफ्ते के दिन थे. मैं रायपुर से भोपाल पीटीआई एवं देशबन्धु के संयुक्त […] Read more » Featured ककहरा दैनिक भास्कर नई दुनिया पत्रकारिता भोपाल भौतिक रमेशजी