विविधा आंगनबाड़ी की मदद से प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा November 2, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment सुधा कुमारी कहते हैं जब एक लड़का शिक्षित होता है तो एक नागरिक शिक्षित होता है, लेकिन जब एक लड़की शिक्षित होती है तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है। शिक्षा के इस महत्व को समय-समय पर देश की सभी सरकारों ने पहचाना और इसके प्रोत्साहन के लिए अनेक उपाए भी किए। कभी देश के मानचित्र पर […] Read more » primary studies आंगनवाड़ी
विविधा पहाड़ी भाषा से सौतेला बर्ताव क्यूं ? November 2, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment ख्वाजा परवेज दिलबर भाषा न केवल विचारों को अभिव्यक्त करने का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन है बल्कि यह किसी भी समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाने का एक सशक्त माध्यम होता है। देश के अन्य भागों की तरह जम्मू कश्मीर में भी एक दर्जन से अधिक भाषा बोली और समझी जाती है। इनमें […] Read more » language पहाड़ी भाषा
विविधा उत्सवधर्मी संस्कृति के गुमनाम चितेरे October 31, 2011 / December 5, 2011 by हिमकर श्याम | Leave a Comment दम तोड़ने लगी हैं जनजातीय चित्रकलाएं हिमकर श्याम लोक कला युगान्तर से चली आ रही परंपरा है। लोक कला का मानव जीवन के इतिहास से अत्यंत घनिष्ट संबंध है जो सभ्यता के साथ प्रारंभ हुईं और उसके साथ ही चलती चली आ रही है। लोक कलाओं का विकास समाज के परंपरागत विचारों, विश्वासों, आस्थाओं और […] Read more » lok kala जनजातीय लोककला
विविधा भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर छाए संकट के बादल October 30, 2011 / December 5, 2011 by निर्मल रानी | 1 Comment on भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर छाए संकट के बादल निर्मल रानी अन्ना हज़ारे का नाम वैसे तो राजनैतिक मामलों में दिलचस्पी रखने वाले तथा देश की खबरों पर नज़र रखने वाले लोग गत् 3 दशकों से भलीभांति जानते हैं। परंतु जनलोकपाल विधेयक संसद में लाए जाने की मांग को लेकर, अन्ना हज़ारे के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठने के बाद अन्ना हज़ारे केवल भारत […] Read more » Anna Hazare अन्ना हजारे
विविधा जिसने मुंह खोला, वही बेईमान October 28, 2011 / December 5, 2011 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | 2 Comments on जिसने मुंह खोला, वही बेईमान डॉ0 आशीष वशिष्ठ भ्रष्टाचार के विरूद्ध अन्ना और रामदेव की मुहिम धीरे-धीरे ही सही अपना रंग दिखा रही है। लेकिन केंद्र सरकार जिस तरह से भ्रष्टाचार के विरूद्ध अलख जगाने वालों के खिलाफ प्रतिशोध और बदले की भावना से काम कर रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने खुद को दोषी मान […] Read more » वही बेईमान
विविधा संस्कार और बाज़ार October 28, 2011 / December 5, 2011 by राजीव गुप्ता | Leave a Comment राजीव गुप्ता अवधपुरी अति रुचिर बनाई ! देवन्ह सुमन बृष्टि झरी लाई !! प्रभु बिलोकि मुनि मन अनुरागा ! तुरत दिब्य सिंघासन माँगा !! (उत्तरकाण्ड, रामचरितमानस) बाय वन गेट टू फ्री….वॉव….देख-देख-उधर-देख….चल यार उधर ही चलते है….आज शॉपिंग करने में मज़ा आ जाएगा….कहते हुए गीतू ने अपनी तीन सहेलियों मीतू,नीतू और रीतू को इमोशनल ब्लैकमेल करते […] Read more » market बाजार संस्कार
विविधा “बाबर की औलाद” का राष्ट्रपति भवन में मंचन शर्मनाक : विहिप October 28, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on “बाबर की औलाद” का राष्ट्रपति भवन में मंचन शर्मनाक : विहिप विहिप ने भेजा राष्ट्रपति व प्रधान मंत्री को पत्र, कहा-मंचन हुआ तो होगा प्रदर्शन केन्द्रीय कानून मंत्री श्री सलमान खुर्शीद द्वारा लिखित नाटक “बाबर की औलाद” के राष्ट्रपति भवन में आज मंचन किये जाने का विश्व हिन्दू परिषद ने कडा विरोध किया है। विहिप दिल्ली के महा मंत्री श्री सत्येन्द्र मोहन ने आज इस नाटक […] Read more » son of babar बाबर की औलाद
विविधा गैर-राजनीतिक अंदोलन का राजनीतिक होना October 28, 2011 / December 5, 2011 by प्रमोद भार्गव | 3 Comments on गैर-राजनीतिक अंदोलन का राजनीतिक होना प्रमोद भार्गव चुन-चुन कर अन्ना दल के सदस्यों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को एक गैर राजनीतिक सामाजिक आंदोलन के राजनीतिक होने की दिशा में बढ़ते जाने के परिप्रेक्ष्य में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे तंत्र और समाज के बीच जो लड़ाई चल रही हैं, उसमें तंत्र समाज की रचनात्मक शक्तियों को कैसे […] Read more » Anna Hazare अन्ना हजारे
विविधा आज किरण को माफ़ करें, कल कनिमोझी को! October 27, 2011 / December 5, 2011 by जगमोहन फुटेला | 16 Comments on आज किरण को माफ़ करें, कल कनिमोझी को! जगमोहन फुटेला किरण बेदी कह रहीं हैं कि खुद को कष्ट देकर जो पैसे उन्होंने हवाई टिकटों से बचाए हैं, अब (पर्दाफ़ाश होने के बाद) वे वापिस कर देंगी. भाई लोग कह रहे हैं कि वे इंसान हैं और गलती चूंकि इंसान से हो ही सकती है और पैसे भी जब वे वापिस दे ही […] Read more » Kiran Bedi किरण बेदी
विविधा गरीब को पहचानने की कोशिश में विदूषक नजर आते सभी पात्र October 22, 2011 / December 5, 2011 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत का योजना आयोग इस देश में गरीब को पहचानने की कोशिश में लगा हुआ है। इस आयोग ने इस काम के लिए देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों को भी लगाया है। वैसे तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्वयं भी अपने आपको अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के अर्थशास्त्री कहते हैं। उनके मित्र मोंटेक सिंह अहलुवालिया […] Read more » poor people गरीब
विविधा सफलता की नई शर्त-गोरेपन का अहसास October 22, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हरिकृष्ण निगम ऐसा अनेक बार देखा गया है कि जब भी कोई देश की एक कड़वी सच्चाई भरी हमारी इस कमजोरी को सामने रखता है कि हम स्वभाव से गोरी चमड़ी को महत्व देते हैं और उस अर्थ में रंगभेद की भेदभाव भरी नस्लवादी मानसिकता से ग्रस्त रहते हैं, इस आरोप का हम तुरंत प्रतिरोध […] Read more » fairness गोरापन
महत्वपूर्ण लेख विविधा शक्ति-पूजा का विस्मरण – शंकर शरण October 20, 2011 / December 5, 2011 by शंकर शरण | 26 Comments on शक्ति-पूजा का विस्मरण – शंकर शरण कश्मीर के विस्थापित डॉक्टर कवि कुन्दनलाल चौधरी ने अपने कविता संग्रह ‘ऑफ गॉड, मेन एंड मिलिटेंट्स’ की भूमिका में प्रश्न रखा थाः “क्या हमारे देवताओं ने हमें निराश किया या हम ने अपने देवताओं को?” इसे उन्होंने कश्मीरी पंडितों में चल रहे मंथन के रूप में रखा था। सच पूछें, तो यह प्रश्न संपूर्ण भारत […] Read more » Ritual power शक्ति-पूजा