Category: विविधा

विविधा

एक नए भारत का सृजन 

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न्द्र सरकार द्वारा पुराने 500 और 1000 के नोटों का चलन बन्द करने एवं नए 2000 के नोटों के चलन से पूरे देश में थोड़ी बहुत अव्यवस्था का माहौल है। आखिर इतना बड़ा देश जो कि विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में दूसरे स्थान पर हो थोड़ी बहुत अव्यवस्था तो होगी ही। राष्ट्र के नाम अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने यह विश्वास जताया था कि इस पूरी प्रक्रिया में देशवासियों को तकलीफ तो होगी लेकिन इस देश के आम आदमी को भ्रष्टाचार और कुछ दिनों की असुविधा में से चुनाव करना हो तो वे निश्चित ही असुविधा को चुनेंगे और वे सही थे।

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विविधा शख्सियत

लाला लाजपतराय बलिदान दिवस-17 नवम्बर

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लाला लाजपत राय को भारत के महान क्रांतिकारियों में गिना जाता है। आजीवन ब्रिटिश राजशक्ति का सामना करते हुए अपने प्राणों की परवाह न करने वाले लाला लाजपत राय को 'पंजाब केसरी' भी कहा जाता है। लालाजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता तथा पूरे पंजाब के प्रतिनिधि थे। उन्हें 'पंजाब के शेर' की उपाधि भी मिली थी। उन्होंने क़ानून की शिक्षा प्राप्त कर हिसार में वकालत प्रारम्भ की थी, किन्तु बाद में स्वामी दयानंद के सम्पर्क में आने के कारण वे आर्य समाज के प्रबल समर्थक बन गये। यहीं से उनमें उग्र राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई।

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आर्थिकी विविधा

प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का काले धन पर प्रहार और हमारा देश

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मोदी जी के इस निर्णय के कारण पाकिस्तान में छपने वाली फेक करंसी का प्रचलन सर्वथा समाप्त हो जाने के कारण पाकिस्तान सहित सभी आतंकवादी, अलगाववादी, कश्मीर में सेना पर पत्थरों की वर्षा करने वाले लोग, नक्सलवादी, हवाला कारोबारी व जमीन की खरीद-फरोक्त जिसमें काले धन का अधिकाधिक प्रयोग होता है, का कारोबार पूरी तरह से ध्वस्त व समाप्त होकर रुक गया है जो मोदी जी की इस मुहिम की बहुत बड़ी सफलता है।

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आर्थिकी विविधा सार्थक पहल

कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

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भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं! और हर व्यक्ति धड़ल्ले से उसका प्रयोग कर रहा है! अगर पूरे जोरशोर से प्रयास किया जाये तो निश्चय ही लोग कॅश के स्थान पर कार्ड व्यवस्था को रोजमर्रा की जिंदगी का भाग बना लेंगे और एक बार जब उन्हें इसकी सुविधा की आदत पड जाएगी तो फिर देखते ही देखते भारत भी इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देगा!

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आर्थिकी विविधा

सांच को नहीं कोई आंच, मोदी और नोटबंदी

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माना कि देश परेशान है, लोग हैरान है और परेशानी का सामना कर रहे हैं, लेकिन मीडिया को इस बात में ज्यादा रूचि है कि देश में कैसी-कैसी परेशानियां सामने आ रही हैं। अरे परेशानियां तो आनी ही थी, यदि किसी देश के साथ युद्ध होता तो संभवत: जो कुछ घर में होता बस वही गुजारे का साधन होता, आटा होता तो चून गूंधा जाता और चून नहीं होता तो भूखे सोना होता। हालात थोड़े असामान्य जरूर हैं लेकिन बदतर नहीं है। लोग जैसे भी हो, जद्दो-जहद कर दो जून की रोटी कमाने में और नोट बदलने में कामयाब हो ही रहे हैं।

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आर्थिकी विविधा

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के नये संदर्भ

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लगभग सभी गैर कानूनी कार्यों में पैसों का लेनदेन बि‍ना कि‍सी तृतीय पक्ष (बैंक आदि‍ सरकारी यंत्रणा) के होता है, इससे गैर कानूनी धंदों में दि‍न दूगनी और रात चौगुणी प्रगती होती हैं। इन सभी गोरखधंदों को बंद करने का यह रामबाण उपाय हैं। इसमें भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के अर्थशास्‍त्री और वि‍शेषज्ञों का योगदान है। नये नोटों को सैटेलाइट द्वारा ट्रैक करने की सुवि‍धा के कारण आगे आने वाले नोटों की ट्रैकिंग से नोटों का प्रयोग हो रहे स्‍थानों का पता लगाया जा सकेगा इससे भवि‍ष्‍य में नकली नोटों को बनाने में के खतरे को भी टाला जा सकेगा।

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आर्थिकी विविधा

आर्थिक उदारीकरण के दौर में कालेधन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

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नाव सुधारों पर काम करने वाली संस्था एडीआर के आंकड़े वाकई आश्चर्यजनक हैं कि, 2004 से 2015 के बीच हुए 71 विधानसभा और 3 लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को 2100 करोड़ रुपए का नकद चंदा मिला है। इससे भी आगे यह कि पिछले लोकसभा चुनाव में आयोग को 300 करोड़ रुपए बिना स्त्रोत का नकद मिला था। यानि कि यह कहने में कोई बुराई नहीं है कि राजनीतिक दलों के पास 80 पैसा ऐसे स्त्रोत से ही आता है,जिसका किसी को पता नहीं है। ऐसे में इसे भी कालेधन और नोट बदलने की मुहिम का हिस्सा बनाकर टैक्स लगाया जाना अच्छा क़दम साबित हो सकता है।

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