समाज व्यभिचार को सामाजिक स्वीकृति मिलना असंभव

व्यभिचार को सामाजिक स्वीकृति मिलना असंभव

डॉ. वेदप्रताप वैदिक स्त्री-पुरुष संबंधों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है, ज्यादातर लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। उसे क्रांतिकारी बता…

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धर्म-अध्यात्म “क्या हमारा वर्तमान का जन्म पिछले जन्म का पुनर्जन्म नहीं है?”

“क्या हमारा वर्तमान का जन्म पिछले जन्म का पुनर्जन्म नहीं है?”

मनमोहन कुमार आर्य,  वेद और वैदिक परम्परा में ईश्वर व जीवात्मा को सनातन, अजन्मा, अमर, अविनाशी, जन्म व मरण के बन्धन में बन्धा हुआ और…

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समाज जीवन की राह: शांति की चाह  

जीवन की राह: शांति की चाह  

 ललित गर्ग – आज हर व्यक्ति चाहता है – हर दिन मेरे लिये शुभ, शांतिपूर्ण एवं मंगलकारी हो। संसार में सात अरब मनुष्यों में कोई…

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मनोरंजन महिला के हक और सम्मान के प्रति सजग हैं रिया

महिला के हक और सम्मान के प्रति सजग हैं रिया

अनिल अनूप मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, जिन्हें “जलेबी” फिल्म में देखा जाएगा, कहते हैं कि भारत और देश जैसे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की…

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कविता श्राद्ध पर कुंडलिया

श्राद्ध पर कुंडलिया

जब तक श्रद्धा न हो,श्राद्ध करना है बेकार किसी ने हाल न पुछा,जब था बाँप बीमार जब था बीमार,किसी ने दवाई को न पूछा मर…

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मनोरंजन विवादों का खरीदार बिग बॉस

विवादों का खरीदार बिग बॉस

विवेक कुमार पाठक बिग बॉस टेलीविजन शो का 12 वां संस्करण दर्शकों के सामने परोसा जा रहा है। ये शो एक अजब गजब शो है।…

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समाज कीटाणुओं पर प्रहार करेगा अदालत से सीधा प्रसारण

कीटाणुओं पर प्रहार करेगा अदालत से सीधा प्रसारण

विवेक पाठक पारदर्शिता हमेशा पर्दे और कोनों में छिपी बुराइयों पर प्रहार करती है। दुनिया की तमाम बुराइयां पारदर्शिता के अभाव में पनपती हैं। हमें…

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समाज विकृति को बढ़ावा देनेवाले फैसले

विकृति को बढ़ावा देनेवाले फैसले

बिपिन किशोर सिंहा सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च न्यायालय है। इसके फैसले कानून बन जाते हैं। अतः जिस फैसले से समाज का स्वस्थ तानाबाना तार-तार…

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कविता दर्द भी दिया अपनों ने

दर्द भी दिया अपनों ने

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ भी दिया अपनों ने उम्मीद भी अपनों से जाएँ कहा बिना उनके अपने तो अपने होते हैं।   वो दूर चले गए कितने या हम पास न रह पाए कहने को तो बहुत है पर अपने तो अपने होते हैं।   गिला-शिकवा अपनों से  आस लगा के छोड़ देना आख़िर भुलाएँ तो कैसे अपने तो अपने होते हैं।

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मीडिया हाहाकार के बीच आंदोलन …!

हाहाकार के बीच आंदोलन …!

तारकेश कुमार ओझा दो दिनों के अंतराल पर एक बंद और एक चक्का जाम आंदोलन। मेरे गृह प्रदेश पश्चिम बंगाल में हाल में यह हुआ।…

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धर्म-अध्यात्म “आध्यात्मिकता रहित भौतिक सुखों से युक्त जीवन अधूरा व हानिकारक है”

“आध्यात्मिकता रहित भौतिक सुखों से युक्त जीवन अधूरा व हानिकारक है”

मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य मननशील प्राणी है। मनुष्य अन्नादि से बना भौतिक शरीर मात्र नहीं है अपितु इसमें एक अनादि, नित्य, अविनाशी, अमर, अल्पज्ञ, जन्म-मरण…

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समाज वृद्ध जीवन के उजालों का स्वागत करें

वृद्ध जीवन के उजालों का स्वागत करें

 ललित गर्ग – एक अक्टूबर को सम्पूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस मनाया जाता है। समाज और नई पीढ़ी को सही दिशा दिखाने और मार्गदर्शन…

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