राजनीति राहुल ने आंख चमकाकर संसद की गिराई गरिमा ?

राहुल ने आंख चमकाकर संसद की गिराई गरिमा ?

प्रमोद भार्गव लोकसभा में सवा चार साल पुरानी राजग सरकार के खिलाफ पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री…

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धर्म-अध्यात्म “वैदिक एवं आंग्ल शिक्षा का केंद्र तपोवन विद्या निकेतन”

“वैदिक एवं आंग्ल शिक्षा का केंद्र तपोवन विद्या निकेतन”

मनमोहन कुमार आर्य,  वैदिक साधन आश्रम तपावेन, देहरादून की अनेक कार्यों में से एक महत्वपूर्ण कार्य एक आर्य शिक्षण संस्था ‘तपोवन विद्या निकेतन’ का संचालन…

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धर्म-अध्यात्म “हम ईश्वर के गुणों का साक्षात्कार कर उससे लाभ उठा सकते हैं”

“हम ईश्वर के गुणों का साक्षात्कार कर उससे लाभ उठा सकते हैं”

मनमोहन कुमार आर्य,  हम अपने परिवार, मित्र मण्डली तथा पड़ोसी आदि अनेक लोगों को जानते हैं। हम से कोई पूछे कि क्या अमुक व्यक्ति को…

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शख्सियत आप सदा भारतीयों के दिल में रहेंगे नरेश भारतीय जी

आप सदा भारतीयों के दिल में रहेंगे नरेश भारतीय जी

विश्व-प्रसिद्ध लेखक हिंदी लेखक को प्रवक्ता-डॉट-कॉम परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि संजीव सिन्हा जी नई दिल्ली: नरेश भारतीय ऊर्फ नरेश अरोड़ा हिन्दी साहित्य के…

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शख्सियत तेजिंदर गगन का जाना

तेजिंदर गगन का जाना

  संजीव खुदशाह वरिष्ठ पत्रकार  प्रभाकर चौबे के दिवंगत होने की खबर का अभी एक पखवाड़ा भी नहीं हुआ था की खबर आई, तेजिंदर गगन नहीं…

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कविता पल्लवित प्रफुल्लित बगिया !

पल्लवित प्रफुल्लित बगिया !

रचनाकार: गोपाल बघेल ‘मधु’ (मधुगीति १८०७१६ स) पल्लवित प्रफुल्लित बगिया, प्रभु की सदा ही रहती; पुष्प कंटक प्रचुर होते, दनुजता मनुजता होती ! हुए विकसित सभी चलते, प्रकाशित प्रकृति में रहते; विकृति अपनी मिटा पाते, वही करने यहाँ आते ! बिगड़ भी राह कुछ जाते, समय पर पर सुधर जाते; अधर जो कोई रह जाते, धरा पर लौट कर आते ! प्रवाहित समाहित होते, कभी वे समाधित होते; ऊर्ध्व गति अनेकों चलते, नज़र पर कहाँ वे आते ! प्रतीकों के परे दुनियाँ, कभी है सामने आती; ‘मधु’ भव माधुरी चखते, माधवी सृष्टि लख जाती !  

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राजनीति  अनावश्यक देश के गले पड़े अविश्वास और राहुल

 अनावश्यक देश के गले पड़े अविश्वास और राहुल

प्रवीण गुगनानी देश को और उसकी संसद को एक अनावश्यक अविश्वास प्रस्ताव में झोंका गया. अनावश्यक अंकगणित की दृष्टि से नहीं, क्योंकि संसदीय लोकतंत्र में अंकगणित…

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समाज परिवार का महत्त्व और उसका बदलता स्वरूप 

परिवार का महत्त्व और उसका बदलता स्वरूप 

 गीता आर्य परिवार व्यक्तियों का वह समूह होता है,  जो विवाह और रक्त सम्बन्धों से जुड़ा होता है जिसमें बच्चों का पालन पोषण होता है…

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धर्म-अध्यात्म “गुरुकुल पौंधा जाकर वहां आचार्यादि मित्रों से शिष्टाचार भेंट”

“गुरुकुल पौंधा जाकर वहां आचार्यादि मित्रों से शिष्टाचार भेंट”

  –मनमोहन कुमार आर्य,  गुरुकुल पौंधा-देहरादून हमारे निवास से 15 किमी. की दूरी पर है। जब भी मन होता है हम महीने में एक या…

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धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्मी सभी बुराईयों से मुक्त अनुशासित,बलवान, क्षमतावान व देशभक्त होते हैं’

वैदिक धर्मी सभी बुराईयों से मुक्त अनुशासित,बलवान, क्षमतावान व देशभक्त होते हैं’

  मनमोहन कुमार आर्य, वैदिक धर्मी का अर्थ होता है कि ईश्वरीय ज्ञान वेद को जानने वाला व उसकी शिक्षाओं को मन, वचन व कर्म…

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शख्सियत             कारवां गुजर गया

            कारवां गुजर गया

विजय कुमार छात्र जीवन से मेरी रुचि साहित्य में रही है। कविता मंचीय हो या पत्रिका में प्रकाशित, उनके प्रति विशेष आकर्षण था। इसी से…

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शख्सियत ये नीरज की प्रेमसभा है,,,,,

ये नीरज की प्रेमसभा है,,,,,

अतुल गौड़ ये नीरज की प्रेमसभा है जरा संभल कर आना जी…. अब से नीरज जी की वो प्रेमसभाओं में नीरज जी की भर्राई सी…

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