कला-संस्कृति इंस्टाग्राम संस्कृति में तीर्थयात्रा बनाम पर्यटन 

इंस्टाग्राम संस्कृति में तीर्थयात्रा बनाम पर्यटन 

सचिन त्रिपाठी  आज की दुनिया में जहां हर क्षण एक स्टोरी है, हर भाव एक फिल्टर में ढलता है, वहां तीर्थयात्रा और पर्यटन के बीच…

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राजनीति भारत: आत्म बल से आगे बढ़ता राष्ट्र

भारत: आत्म बल से आगे बढ़ता राष्ट्र

प्रो. महेश चंद गुप्ता भारत ने हाल ही में जिस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, वह केवल एक सैन्य ऑपरेशन नहीं बल्कि उसकी…

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राजनीति भारत और इस्लामिक देश

भारत और इस्लामिक देश

शिवानन्द मिश्रा इस्लामिक देशों से भारत की दोस्ती कितनी गहरी और कितनी सांस्कृतिक है, मलेशिया की घटना से समझ लीजिए। यूँ तो सभी जानते हैं…

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राजनीति शिमला समझौता : सवालों के घेरे में पाकिस्तान की मंशा

शिमला समझौता : सवालों के घेरे में पाकिस्तान की मंशा

डॉ. ब्रजेश कुमार मिश्र पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में 1972 के शिमला समझौते को “मृत दस्तावेज़” करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान…

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शख्सियत संत कबीर : विश्व शांति का मूल है कबीर का “एकेश्वरवाद”

संत कबीर : विश्व शांति का मूल है कबीर का “एकेश्वरवाद”

संत कबीर दास जी की जयंती 11 जून पर विशेष… दुनिया में धार्मिक कट्टरता के लिए नहीं है कोई स्थान, देश के सभी धर्म और संप्रदाय हैं एक समान प्रदीप कुमार वर्मा संत कबीर दास15 वीं सदी के मध्यकालीन भारत के एक रहस्यवादी कवि और भक्ति आंदोलन की निर्गुण शाखा के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, जो ईश्वर के प्रति भक्ति और प्रेम पर जोर देते थे। संत कबीर दास को एक ऐसे समाज सुधारक के तौर पर भी जाना जाता है, जो अपनी रचनाओं के जरिए जीवन भर आडंबर और अंधविश्वास का विरोध करते रहा।वह कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे और इसकी झलक उनकी रचनाओं में साफ़ झलकती है। यही वजह है कि समाज में संत कबीर को जागरण युग का अग्रदूत कहा जाता है। उनकी रचनाएँ हिन्दी साहित्य के भक्ति काल की निर्गुण शाखा की ज्ञानमार्गी उपशाखा की महानतम कविताओं के  रूप में आज भी प्रसिद्ध हैं। इन कविता और साखियों के माध्यम से पता चलता है कि संत कबीर दास जी का एकेश्वरवाद का सिद्धांत दुनिया में आज भी प्रासंगिक है।               माना जाता है कि संत कबीर का जन्‍म सन 1398 ईस्वी में काशी में हुआ था। कबीर दास निरक्षर थे तथा ऐसी मान्यता है कि उन्‍हें शास्त्रों का ज्ञान अपने गुरु स्‍वामी रामानंद द्वारा प्राप्‍‍त हुआ था। तत्कालीन भारतीय समाज में कबीर दास ने कर्मकांड और गलत धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया। इन्होंने सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त भेद भाव को दूर करने का भी प्रयास किया। वे सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष थे। उन्होंने हिंदू मुसलमानों के बाह्याडंबरों पर समान रूप से प्रहार किया | यदि उन्होंने हिंदुओं से कहा कि-पत्थर पूजै हरि मिलै, तो मैं पूजूँ पहाड़,,तासे तो चक्की भली, पीस खाए संसार ||” तो मुसलमानों से भी यह कहने में संकोच नहीं किया कि ” कंकड़ पत्थर जोड़ि के, मस्जिद लियो बनाय,,ता पर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय”?             संत कबीर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सच्ची पूजा दिल से होती है, बाहरी कर्मकांडों की तुलना में ईश्वर के साथ सच्चे संबंध को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यह भी सिखाया कि हृदय की पवित्रता और ईश्वर के प्रति प्रेम ही सर्वोपरि है। यजी नहीं संत कबीर ने खुलेआम खोखले कर्मकांडों और अंधविश्वासों की निंदा की और लोगों से सच्ची भक्ति की तलाश करने का आग्रह किया। उनका मानना था कि सच्ची आस्था से रहित कर्मकांडों का कोई मतलब नहीं होता है। उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं को खारिज किया। संत कबीर ने जाति, पंथ या लिंग की परवाह किए बिना सभी मनुष्यों के बीच समानता की वकालत की। उनके छंदों ने लोगों के बीच सद्भाव की वकालत करते हुए एकता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया               कबीरदास निर्गुण भक्ति के उपासक थे। उन्होंने न तो हिंदू धर्म की मूर्तिपूजा को स्वीकार किया, न ही इस्लाम की कट्टरता को। वे एकेश्वरवाद में विश्वास रखते थे और मानते थे कि ईश्वर एक है तथा सर्वत्र व्याप्त है। उनके अनुसार, आत्मा और परमात्मा के बीच का संबंध प्रेम और भक्ति पर आधारित होना चाहिए। कबीर दास पहले भारतीय कवि और संत हैं जिन्होंने हिंदू धर्म और इस्लाम धर्म के बीच समन्वय स्थापित किया और दोनों धर्मों के लिए एक सार्वभौमिक मार्ग दिया। उसके बाद हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर उनके दर्शन का अनुसरण किया,जो कालांतर में “कबीर पंथ” के नाम से चर्चित हुआ। कहा तो यह भी जाता है की कबीरदास द्वारा काव्यों को कभी भी लिखा नहीं गया, सिर्फ बोला गया है। उनके काव्यों को बाद में उनके शिष्‍यों द्वारा लिखा गया।  कबीर की रचनाओं में मुख्‍यत: अवधी एवं साधुक्‍कड़ी भाषा का समावेश मिलता है।   …

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राजनीति विकसित भारत के संकल्प में सहयोगी क्रांतियाँ

विकसित भारत के संकल्प में सहयोगी क्रांतियाँ

डॉ. नीरज भारद्वाज विकसितभारत के संकल्प को पूरा करने में देश के हर क्षेत्र और व्यक्ति का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। विकसित भारत के संकल्प…

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राजनीति राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला क्यों

राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला क्यों

राजेश कुमार पासी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद ऐसा लगता है कि राहुल गांधी बौखला गए हैं । उन्हें समझ नहीं आ रहा है…

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मनोरंजन साउथ के टॉप 5 मेल एक्टर्स

साउथ के टॉप 5 मेल एक्टर्स

सुभाष शिरढोनकर तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा को समेकित करने वाली साउथ फिल्म इंडस्ट्री ने हाल के वर्षों में न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर…

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लेख रिश्तों के लाश पर खड़ा आधुनिक प्रेम

रिश्तों के लाश पर खड़ा आधुनिक प्रेम

इंदौर के राजा और सोनम के मेघालय हनीमून पर हुई हत्या की घटना न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि सामाजिक, नैतिक और मानसिक स्तर पर…

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कविता क्या हो गया है इन औरतों को?

क्या हो गया है इन औरतों को?

क्या हो गया है इन औरतों को?अब ये आईना क्यों नहीं झुकातीं?क्यों चलती हैं तेज़ हवा सी,क्यों बातों में धार रखती हैं?कल तक जो आंचल…

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पर्यावरण ग्लोबल वार्मिंग-जलवायु परिवर्तन : असंभव है इन्हें रोक पाना

ग्लोबल वार्मिंग-जलवायु परिवर्तन : असंभव है इन्हें रोक पाना

तनवीर जाफ़री इस समय पूरी पृथ्वी ग्लोबल वार्मिंग के संकट से बुरी तरह जूझ रही है। विश्व के किसी न किसी कोने से मानवजीवन को…

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पर्व - त्यौहार भारत के स्वराज्य की हुंकार : हिन्दू साम्राज्य दिवस

भारत के स्वराज्य की हुंकार : हिन्दू साम्राज्य दिवस

– लोकेन्द्र सिंह  छत्रपति शिवाजी महाराज भारत की स्वतंत्रता के महान नायक हैं, जिन्होंने ‘स्वराज्य’ के लिए संगठित होना, लड़ना और जीतना सिखाया। मुगलों के लंबे शासन और अत्याचारों के…

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