मिलना अपने श्याम से,ये सोच कर आये है
Updated: July 30, 2018
मिलना अपने श्याम से,ये सोच कर आये है दर्शन करने को हम सब लौट कर आये है छटा तुम्हारी सारे संसार में बिखरी है माया…
Read more
भारत राष्ट्र के निर्माताओं में से एक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
Updated: July 30, 2018
-अशोक “प्रवृद्ध” स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है के उद्घोषक लोकमान्य बालगंगाधर तिलक (3 जुलाई 1856- 1 अगस्त 1920) एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज…
Read more
“चलो, स्वाध्याय करें”
Updated: July 30, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, हमारा जहां तक ज्ञान है उसके अनुसार संसार में केवल वैदिक मत ही एकमात्र ऐसा धर्म वा मत है जहां प्रत्येक मनुष्य…
Read moreसाहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता : समस्या और समाधान
Updated: July 30, 2018
डॉ अर्पण जैन ‘अविचल‘ इंटरनेट की दुनिया ने हिंदी या कहे प्रत्येक भाषा के साहित्य और लेखन को जनमानस के करीब और उनकी पहुँच में…
Read more
लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को,उसे दिल में छिपा लिया
Updated: July 28, 2018
लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को,उसे दिल में मैंने छिपा लिया पड़े ना बुरी निगाह राहू-केतू की,उसे नयनों में समां लिया आयेगा जब बुरा वक्त…
Read more
नये भारत के सुखद संकेत
Updated: July 28, 2018
ललित गर्ग कोई भी राष्ट्र या समाज स्वयं नहीं बोलता, वह सदैव अपनी प्रबुद्ध प्रतिभाओं की क्षमता, साहस, योग्यता एवं विलक्षणता के माध्यम से बोलता…
Read more
इमरान सिद्ध करें कि वे फौज के मुखौटा नहीं
Updated: July 28, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक पाकिस्तान तहरीके-इंसाफ के नेता इमरान खान अब प्रधानमंत्री बनेंगे, इसमें जरा भी शक नहीं रह गया है। उन्हें स्पष्ट बहुमत नहीं मिला…
Read more
रोजगार और लैंगिक समानता विकास की नींव है
Updated: July 28, 2018
सुनील अमर संसद में विश्वास मत का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री का यह बयान बहुत अहम है कि पिछले साल एक करोड़ लोगों को रोजगार…
Read more
भारत में गिनती के रह गए हैं बाघ
Updated: July 28, 2018
प्रमोद भार्गव भारत में इस समय 21 राज्यों के 30,000 बाघ के रहवासी क्षेत्रों में गिनती का काम चल रहा है। 2018 में प्रथम चरण…
Read more
कर पाते कहाँ वे विकास !
Updated: July 28, 2018
(मधुगीति १८०७२४) कर पाते कहाँ वे विकास, कर के कुछ प्रयास; वे लगाते रहे क़यास, बिना आत्म भास ! विश्वास कहाँ आश कहाँ, किए बिन सकाश; संकल्प कहाँ योग कहाँ, धारणा कहाँ ! है ध्येय कहाँ ज्ञेय रहा, गात मन थका; उद्देश्य सफल कहाँ हुआ, ना मिली दुआ ! बेहतर है प्रचुर कर्म करें, ज्ञान सृष्टि कर; सृष्टा को ध्यान कर के वरें, अपने कलेवर ! उर उनकी सुने चलते रहें, बृह्म भाव रस; ‘मधु’ के प्रभु के कार्य करें, उनके हृदय बस ! रचनाकार: गोपाल बघेल ‘मधु’
Read more
“श्रावणी पर्व एवं कृष्ण जन्माष्टमी”
Updated: July 28, 2018
–मनमोहन कुमार आर्य, श्रावण का महीना वर्षा ऋतु का सबसे अधिक वर्षा वाला महीना होता है। आजकल तो देश में बड़े-बड़े नगर बस गये हैं।…
Read more
करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को
Updated: July 27, 2018
करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को देश के खातिर जिन्होंने परवाह नहीं की अपने वजिदो को किसी ने माँ की गोद…
Read more