कविता क्यों मौन है आवाम

क्यों मौन है आवाम

      – डॉ. छन्दा बैनर्जी   जाने अख़बार क्या कहता है, पढ़कर, पूरा आवाम क्यों मौन रहता है ?   हां, बस्तर का…

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गजल मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है वो जो चलते थे तो शेर के…

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राजनीति अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर 

अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर 

-ललित गर्ग- भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास गति ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। कृषि क्षेत्र…

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विविधा (स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’

(स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’

अनिल सिंह कुछ दिन पहले अखबार में पढ़ा कि (स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’ के प्रकाशन के 50 वर्ष पूरे हो गये।…

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धर्म-अध्यात्म कृष्ण  जन्माष्टमी की देश में मची धूम

कृष्ण जन्माष्टमी की देश में मची धूम

डा- राधेश्याम द्विवेदी श्रीकृष्ण भक्ति में रासलीला एक लोकप्रिय साधन डा. राधेश्याम द्विवेदी श्रीकृष्ण भारत की पुण्य भूमि में अवतरित हुये थे। वे भगवान विष्णु…

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कविता अगर कृष्ण कलयुग में जन्म लेते

अगर कृष्ण कलयुग में जन्म लेते

अच्छा हुआ कृष्ण ने लिया द्वापर के जमाने में वर्ना दुर्गति हो जाती उनकी इस कलयुगी जमाने में अच्चा हुआ कृष्ण ने जन्म नहीं लिया…

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गजल मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था 

मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था 

डॉ. रूपेश जैन  मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ इज़हार करना चाहा था धुएँ सी उड़ा दी आरज़ू पल में यार ने मिरि तिरा इस्तिक़बाल शानदार करना चाहा था भले लोगो की बातें समझ न आईं वक़्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तिरे काम आ सकूँ इरादा था बस इतना सा तअल्लुक़ आपसे आबदार करना चाहा था इंतिज़ार क्यूँ करें फ़स्ल-ए-बहाराँ सोचकर चमन ये ‘राहत’ खुशबूदार करना चाहा था

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धर्म-अध्यात्म संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण

संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण

अरविंद जयतिलक श्रीकृष्ण साक्षात परब्रह्म और ईश्वर हैं। संसार के समस्त पदार्थों के बीज उन्हीं में निहित है। वे नित्यों के नित्य और जगत के…

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कविता दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!!

दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!!

तारकेश कुमार ओझा ————————- बचपन में कहीं पढ़ा था रोना नहीं तू कभी हार के सचमुच रोना भूल गया मैं बगैर खुशी की उम्मीद के…

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कविता भव्य भव की गुहा में खेला किए !

भव्य भव की गुहा में खेला किए !

गोपाल बघेल ‘मधु’   भव्य भव की गुहा में खेला किए, दिव्य संदेश सतत पाया किए; व्याप्ति विस्तार हृदय देखा किए, तृप्ति की तरंगों में…

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कविता कान्हा का धाम

कान्हा का धाम

प्रीति सुराना गोकुल कान्हा का धाम न होता। जग में गौ मां का नाम न होता,.. अमृत मंथन से निकली गौ माते, धर्मशास्त्र हैं यह…

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राजनीति भारत के आर्थिक विकास पर बेवजह विवाद

भारत के आर्थिक विकास पर बेवजह विवाद

 डॉ. मयंक चतुर्वेदी विश्वभर में सभी देशों के बीच भारत तेजी के साथ आर्थिक विकास की दौड़ लगा रहा है।  तमाम आलोचनाओं और विरोधों के…

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