राजनीति अमेरिका में प्रवासी भारतीय संकट में

अमेरिका में प्रवासी भारतीय संकट में

प्रमोद भार्गव अमेरिकी नागरिक बन जाने की प्रबल इच्छा रखने वाले भारतियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। यहां ग्रीन कार्ड प्राप्त करने वालों…

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कविता मोदी के मन की बात -तुम मुझे हटा ना पाओगे

मोदी के मन की बात -तुम मुझे हटा ना पाओगे

तुम मुझे हरा ना पाओगे तुम मुझे हटा ना पाओगे महागठबंधन बनाया है तुमने सबको बुलाया है तुमने सबको मिलाया है तुमने मिलाकर भी ना…

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धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द की कृपा से ही हमें वेदों पर कुछ कहने और सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा हैः डा. महावीर अग्रवाल”

“ऋषि दयानन्द की कृपा से ही हमें वेदों पर कुछ कहने और सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा हैः डा. महावीर अग्रवाल”

मनमोहन कुमार आर्य,  श्रीमदद्यानन्द ज्योतिर्मठ आर्ष गुरुकुल, देहरादून का तीन दिवसीय 18वां वार्षिकोत्सव 3 जून, 2018 को समाप्त हो चुका है। दिनांक 2 जून, 2018…

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व्यंग्य       हमें भी खिलाओ नहीं तो…

      हमें भी खिलाओ नहीं तो…

  विजय कुमार आजकल दूरदर्शन ने क्रिकेट और फुटबॉल को हर घर में पहुंचा दिया है; पर हमारे बचपन में ऐसा नहीं था। तब गुल्ली-डंडा, पिट्ठू…

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राजनीति पढ़े लिखे लोगों को मूर्ख बनाने की कला में माहिर है केजरीवाल

पढ़े लिखे लोगों को मूर्ख बनाने की कला में माहिर है केजरीवाल

डॉ मनीष कुमार एक पुरानी कहावत है, भैंस अगर पूंछ उठाएगी तो गोबर ही करेगी. लेकिन केजरीवाल के केस में ये कहावत केजरीवाल के मुंह…

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राजनीति मध्यप्रदेश के लिये अमित शाह का नया गेम प्लान

मध्यप्रदेश के लिये अमित शाह का नया गेम प्लान

जावेद अनीस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पिछले साल अगस्त महीने में जब भोपाल आये थे तो उन्होंने ऐलान किया था कि 2018 में…

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कहानी स्व-प्रेरणा की मिसालों से बनता समाज

स्व-प्रेरणा की मिसालों से बनता समाज

 ललित गर्ग  कहते हैं कि जिसके सिर पर कुछ कर गुजरने का जुनून सवार होता है तो फिर वो हर मुश्किल हालात का सामना करते…

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कविता प्रकाश धरा आ नज़र आता

प्रकाश धरा आ नज़र आता

गोपाल बघेल ‘मधु’ प्रकाश धरा आ नज़र आता, अंधेरा छाया आसमान होता; रात्रि में चमकता शहर होता, धीर आकाश कुछ है कब कहता ! गहरा गहमा प्रचुर गगन होता, गुणों से परे गमन वह करता; निर्गुणी लगता पर द्रढी होता, कड़ी हर जोड़ता वही चलता ! दूरियाँ शून्य में हैं घट जातीं, विपद बाधाएँ व्यथा ना देतीं; घटाएँ राह से हैं छट जातीं, रहनुमा कितने वहाँ मिलवातीं ! भूमि गोदी में जब लिये चलती, तब भी टकराव कहाँ करवाती; ठहर ना पाती चले नित चलती, फिर भी आभास कहाँ करवाती ! संभाले सृष्टा सब ही करवाते, समझ फिर भी हैं हम कहाँ पाते; हज़म ‘मधु’ अहं को हैं जब करते, द्वार कितने हैं चक्र खुलवाते !

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कविता सूरज और चाँद भी मजे लेने लगे है

सूरज और चाँद भी मजे लेने लगे है

कलयुग में सब बदलने लगे है सूरज,चाँद भी बदलने लगे है ये भी अब मजे लेने लगे है अपनी आदत बदलने लगे है इंसान की…

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राजनीति सरकार में ताजा हवा का झोंका

सरकार में ताजा हवा का झोंका

डॉ. वेदप्रताप वैदिक भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में अब 10 संयुक्त सचिव नियुक्त किए जाएंगे, जो कि बाहर से लिये जाएंगे। वैसे संयुक्त सचिव के ऊंचे पद…

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धर्म-अध्यात्म “समस्त पृथिवी पर एक दयानन्द ही पूर्ण ब्रह्मचारी, पूर्ण योगी और पूर्ण ऋषि थाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय”

“समस्त पृथिवी पर एक दयानन्द ही पूर्ण ब्रह्मचारी, पूर्ण योगी और पूर्ण ऋषि थाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय”

  मनमोहन कुमार आर्य,  श्रीमद्दयानन्द ज्यातिर्मठ आर्ष गुरुकुल, पौन्धा-देहरादून के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन 2 जून, 2018 के सायंकालीन  सत्र में आर्यसमाज के…

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राजनीति नौकरशाही में नये प्रयोग की सार्थकता

नौकरशाही में नये प्रयोग की सार्थकता

 ललित गर्ग  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नया भारत निर्मित करना चाहते हैं, इसके लिये देश के प्रशासनिक क्षेत्र को सशक्त बनाने एवं नौकरशाही को दक्ष, प्रभावी…

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