आरामपसंद भारत ?
Updated: September 7, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ अर्थात धर्म का सबसे पहला साधन शरीर है लेकिन भारतीय लोग अपने…
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फोन बैंकिंग से डूबे बैंक
Updated: September 7, 2018
प्रमोद भार्गव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भारतीय डाक भुगतान बैंक‘ का उद्घाटन करते हुए डाॅ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर…
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कानूनी उत्पीड़त के विरोध में सवर्ण
Updated: September 7, 2018
प्रमोद भार्गव बम को चिंगारी से बचाने की दूरद्रष्टि हमारे ज्यादातर नेताओं में नहीं है। यदि द्रष्टि होती तो सर्वोच्च न्यायालय के 20 मार्च 2018…
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भयावह सपना
Updated: September 7, 2018
-विनोद सिल्ला सपने में नित देता है दिखाई समाज का उधड़ता ताना-बाना घुलता फिजां में जहर साम्प्रदायिक कहर दलितों की रुकती घुड़चढ़ी खाप-पंचायतों की ललकार…
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मर्द नहीं, औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन?
Updated: September 7, 2018
निर्मल रानी प्राचीन समय में मुहावरों तथा कहावतों की रचना निश्चित रूप से हमारे पुर्वजों द्वारा पूरे चिंतन-मंथन,शोध तथा अनुभवों के आधार पर की गई…
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किस्मत बदल देता इस मण्डी से खरीदा गया हर माल
Updated: September 6, 2018
अनिल अनूप चौक गये न आप!! अब सेक्स की मंडी में ग्राहकों की भीड़ केवल मौज मस्ती या शारीरिक सुख के लिए ही नहीं लगती।…
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लोकतांत्रिक मूल्यों की सरकार ही देश समाज से डरती है
Updated: September 6, 2018
प्रवीण गुणगानी एक प्रसिद्द शेर याद आया – गिरते हैं शह सवार ही मैदाने जंग में ,वो तिफ्ल (सैनिक) क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल…
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ख़लिश
Updated: September 6, 2018
डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जिस सहर पे यकीं था वो ख़ुशगवार न हुयी देखो ये कैसी अदा है नसीब की समझा था जिसे बेकार, वो बेकार न हुयी मांगी थी जब तड़प रूह बेक़रार न हुयी कहूँ अब क्या किसी से देखकर माल-ओ-ज़र भी मिरि चाहतें तलबगार न हुयीं सोचा था जिन्हे अपना वो साँसें मददगार न हुयीं है अजीब अशआर क़ुदरत की भूल से छोड़ा था जिसे हमने वो निगाहें शिकबागार न हुयीं
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हिंदुस्तान में हिंदी का हाल व भविष्य
Updated: September 6, 2018
मेरे देश में मेरा ही बुरा हाल है विदेशी भाषा पर ठोकते ताल है मेरे देश में मेरा ही सम्मान नहीं फिर विदेशो में मेरा…
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‘‘हितकारी प्रकाशन समिति, हिण्डोन सिटी द्वारा सम्मान के लिये हार्दिक धन्यवाद’’
Updated: September 6, 2018
-मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि-भक्त आर्य-श्रेष्ठ श्री प्रभाकरदेव आर्य जी विगत लगभग 25 वर्षों से दुलर्भ, हितकारी एवं जीवनोन्नति के आधार आर्य साहित्य के प्रकाशन का…
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‘क्या मौन में छुपा है कोई हल’
Updated: September 6, 2018
प्रीति सुराना आजमा के देख ये भी कुछ पल क्या मौन में छुपा है कोई हल हल न भी मिले तो लाभ ही है क्रोध…
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शिक्षक दिवस
Updated: September 6, 2018
माँ ही मेरी पहली शिक्षक है क्यों न उसे मै शीश निवाऊ पढ़ा लिखा कर बड़ा किया है क्यों न शिक्षक दिवस मनाऊ पहले जैसे…
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