राजनीति लोकतंत्र का लचीला और खुला स्वरूप रहे बरकरार

लोकतंत्र का लचीला और खुला स्वरूप रहे बरकरार

प्रधानमंत्री जी ने गत दिनों दो निजी टी वी चैनलों को दिए अपने साक्षात्कारों में अपने मन की बात हमेशा की तरह हमारे साथ की।…

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धर्म-अध्यात्म संसार ने सर्वप्रथम कैसे जाना ईश्वर व जीवात्मा का अस्तित्व

संसार ने सर्वप्रथम कैसे जाना ईश्वर व जीवात्मा का अस्तित्व

मनमोहन कुमार आर्य आज विश्व का अधिकांश व बहुत बड़ा भाग ईश्वर एवं जीवात्मा के अस्तित्व को स्वीकार करता है। प्रश्न होता है कि ईश्वर…

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आर्थिकी  तमन्नाओं में उलझाया गया हूं….खिलौने दे कर बहलाया गया हूं

 तमन्नाओं में उलझाया गया हूं….खिलौने दे कर बहलाया गया हूं

 वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आख़िरी पूर्ण बजट पेश करने के बाद शाद अजीमाबादी की ये पंक्तियां याद आ रही हैं – तमन्नाओं में उलझाया…

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आर्थिकी आसियान के माध्यम से चीन को चुनौती

आसियान के माध्यम से चीन को चुनौती

दुलीचन्द रमन इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह कुछ खास रहा क्योंकि इस वर्ष 69वें गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान आसियान के दस देशों…

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धर्म-अध्यात्म मनुष्य और उसकी जीवात्मा

मनुष्य और उसकी जीवात्मा

मनमोहन कुमार आर्य दो पैर, दो हाथ तथा बुद्धि से सम्पन्न प्राणी को मनुष्य कह सकते हैं। पशुओं में प्रायः सबके पास चार पैर होते…

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समाज संवेदनहीन होता समाज 

संवेदनहीन होता समाज 

अक्सर बच्चे गलती करते हैं और बच्चों की गलती सुधारने के लिए इस दुनिया में माता-पिता होते हैं, बच्चे की पहली पाठशाला भी माता-पिता ही…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-48

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-48

राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ज्ञान-विज्ञान और ईश्वर का ध्यान आत्र्त-जिज्ञासु भजें अर्थार्थी दिन रात। युक्तात्मा ज्ञानी भजै…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-47

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-47

राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज आज के संसार में प्रकृतिवादी लोग ऐसी ही मानसिकता और सोच रखते हैं।…

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विविधा अस्पताल में भ्रष्टाचार एक बदनुमा दाग 

अस्पताल में भ्रष्टाचार एक बदनुमा दाग 

– ललित गर्ग – आजकल देश में भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है। एक तरह से भ्रष्टाचार शिष्टाचार हो गया है। ऐसे-ऐसे घोटाले, काण्ड एवं भ्रष्टाचार के…

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राजनीति भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब 

भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब 

“साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा दे उड़ाय।। ” कबीर दास जी भले ही यह कह गए हों, लेकिन…

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धर्म-अध्यात्म आस्तिक व नास्तिक कौन?

आस्तिक व नास्तिक कौन?

मनमोहन कुमार आर्य, दो शब्द आस्तिक व नास्तिक का बहुधा प्रयोग होता है। मोटे रूप से आस्तिक ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखने वालों को…

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आर्थिकी बजट की छांव में उम्मीदों का सच 

बजट की छांव में उम्मीदों का सच 

– ललित गर्ग- भारत भविष्य की आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना देख रहा है और उस दिशा में आगे बढ़ भी रहा है। लोकसभा में…

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