धर्म-अध्यात्म हमारा उपास्य ईश्वर कैसा है?

हमारा उपास्य ईश्वर कैसा है?

-मनमोहन कुमार आर्य उपासना क्या है? उपासना किसी के पास बैठने को कहते हैं। सर्वोत्तम उपासना सृष्टिकर्त्ता ईश्वर के पास बैठना है। ईश्वर के पास…

Read more
विविधा संविधान सभा में सरदार पटेल का वह अविस्मरणीय भाषण

संविधान सभा में सरदार पटेल का वह अविस्मरणीय भाषण

राकेश कुमार आर्य सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय स्वातंत्र्य समर के एक दैदीप्यमान नक्षत्र हैं। उनकी स्पष्टवादिता और कड़े निर्णय लेने में दिखायी जाने वाली निडरता…

Read more
राजनीति संविधान नहीं राजनीति बदलो

संविधान नहीं राजनीति बदलो

राकेश कुमार आर्य  भारत अपना 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। अब से ठीक 68 वर्ष पूर्व भारत ने अपने गणतान्त्रिक स्वरूप की घोषणा…

Read more
धर्म-अध्यात्म जीवन मृत्यु रहस्य एवं आनन्दमय मोक्ष प्राप्ति की चर्चा

जीवन मृत्यु रहस्य एवं आनन्दमय मोक्ष प्राप्ति की चर्चा

मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जीवन हो या पशु-पक्षियों का जीवन, सभी का जीवन, जीवन व मृत्यु के पाश में बन्धा व फंसा हुआ है। कोई…

Read more
समाज ग्राम स्वराज का अर्थ आत्मबल का होना

ग्राम स्वराज का अर्थ आत्मबल का होना

–मनोज कुमार महात्मा गांधी का मानना था कि अगर गांव नष्ट हो जाए, तो हिन्दुस्तान भी नष्ट हो जायेगा। दुनिया में उसका अपना मिशन ही…

Read more
व्यंग्य   थानेदार मुर्गा

  थानेदार मुर्गा

इस शीर्षक को पढ़कर मुर्गा नाराज होगा या थानेदार, ये कहना कठिन है; पर कुछ घटनाएं पढ़ और सुनकर लग रहा है कि भविष्य में…

Read more
धर्म-अध्यात्म  सृष्टि के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा

 सृष्टि के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा

देवेंद्रराज सुथार शिल्प, वास्तुकला, चित्रकला, काष्ठकला, मूर्तिकला और न जाने कितनी कलाओं के जनक भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का आर्किटेक्ट व देवशिल्पी कहा जाता है।…

Read more
विविधा कब तक हमारे देश के सैनिक शहीद होते रहेंगे ?

कब तक हमारे देश के सैनिक शहीद होते रहेंगे ?

देवेंद्रराज सुथार कवि कुमार मनोज की कुछ पंक्तियाँ :- सुख भरपूर गया, मांग का सिंदूर गया, नंगे नौनिहालों की लंगोटियां चली गयी। बाप की दवाई…

Read more
विविधा क्या प्रदूषित भारत कभी बन पाएगा स्वच्छ?

क्या प्रदूषित भारत कभी बन पाएगा स्वच्छ?

राजू पाण्डेय 2018 के द्विवार्षिक एनवायरनमेंटल परफॉर्मेन्स इंडेक्स में भारत 180 देशों में 177 वें स्थान पर रहा। दो वर्ष पहले हम 141 वें स्थान…

Read more
कविता तुम याद आये

तुम याद आये

जब हवाओं का रुख मेरी तरफ हुआ उड़ते गुलाल ने आसमान  को छुआ तब तुम याद आये , हल्की तपती दोपहरी में कोयल ने कोई…

Read more
व्यंग्य वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !!

वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !!

तारकेश कुमार ओझा वाकई इस दुनिया में पग – पग पर कंफ्यूजन है।  कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब तो मिलते नहीं अलबत्ता वे…

Read more
समाज  आज के स्वेच्छाचारी वक्ता

 आज के स्वेच्छाचारी वक्ता

पण्डित परन्तप प्रेमशंकर आजकल के आध्यात्म वक्ता वडे स्वच्छन्दी एवं पाखंडी हो गए हैं । इस परिपेक्ष्य मे इनको सत्य दर्शन कराना संतो एवं विद्वानों…

Read more