राजनीति वर्णसंकर

वर्णसंकर

महाराज शान्तनु भीष्म पितामह के पिता थे। वे हस्तिनापुर के सम्राट थे। उनकी पहली पत्नी गंगा से देवव्रत पैदा हुए जो अपनी भीष्म प्रतिज्ञा के…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-56

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-56

राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार ईश्वर को एक देशीय न मानना स्वयं अपने बौद्घिक विकास के…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-55

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-55

राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इससे अगले श्लोक में श्रीकृष्णजी कहते हैं कि इस संसार में लोग किसी…

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राजनीति अंतिमजन के हितचिंतक पंडित दीनदयाल

अंतिमजन के हितचिंतक पंडित दीनदयाल

-मनोज कुमार एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय सही अर्थों में अंतिमजन के हितचिंतक थे. उनका मानना था कि न्याय और समाजवाद तभी सार्थक…

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धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना क्यों की?

ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना क्यों की?

मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज एक सामाजिक एवं धार्मिक आन्दोलन है। यह वैदिक सिद्धान्तों से देश की राजनीति को भी दिशा देने में समर्थ है। वेद,…

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कविता अब मैं आता हूँ मात्र !

अब मैं आता हूँ मात्र !

अब मैं आता हूँ मात्र, अपनी विश्व वाटिका को झाँकने; अतीत में आयोजित रोपित कल्पित, भाव की डालियों की भंगिमा देखने ! उनके स्वरूपों की छटा निहारने, कलियों के आत्मीय अट्टहास की झलक पाने; प्राप्ति के आयामों से परे तरने, स्वप्निल वादियों की वहारों में विहरने ! अपना कोई उद्देश्य ध्येय अब कहाँ बचा, आत्म संतति की उमंगें तरंगें देखना; उनके वर्तमान की वेलों की लहर ताकना, कुछ न कहना चाहना पाना द्रष्टा बन रहना ! मेरे मन का जग जगमग हुए मग बन जाता है, जीवित रह जिजीविषा जाग्रत रखता है; पल पल बिखरता निखरता सँभलता चलता है, श्वाँस की भाँति काया में मेहमान बन रहता है ! मेरी सृष्टि मेरी द्रष्टि का अहसास लगती है, और मैं अपने सुमधुर सृष्टा का आश्वास; दोनों ‘मधु’ सम्बंधों में जकड़े, आत्म-अंक में मिले सिहरे समर्पण में सने ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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महिला-जगत मातृत्व स्वास्थ्य का लक्ष्य और चुनौतियां

मातृत्व स्वास्थ्य का लक्ष्य और चुनौतियां

उपासना बेहार न्यूयार्क में 24 सितम्बर 2015 को 193 देशों के नेताओं की बैठक हुई जिसे यू. एन. सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट कहा गया।  समिट में 2030 तक के लिए एजेंडा तय किया गया है. ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (सतत विकास लक्ष्य) में 17 मुख्य विकास लक्ष्यों तथा 169 सहायकलक्ष्यों को निर्धारित किया गया है. जो P5 (People, Planet, Peace, Prosperous और Partnership पर जोर देता है, इसे ग्लोबल गोल भी कहा जाता है। इसे “हमारी दुनिया का रूपांतरण : सतत विकास के लिए 2030 का एजेंडा” (Transforming Our World : The 2030 Agenda for Sustainable Development) नाम दिया गया है, जिसका आधार सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य(Millinum Development Goal)  है और इसकी समयसीमा 2015-30 तक है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के 17 गोल में से गोल 3 का उद्देश्य सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देना है  ‎जिसमें मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना प्रमुख लक्ष्य हैं। ‎…

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धर्म-अध्यात्म सत्संग का उत्तम साधन वेद, सत्यार्थप्रकाश आदि का स्वाध्याय

सत्संग का उत्तम साधन वेद, सत्यार्थप्रकाश आदि का स्वाध्याय

-मनमोहन कुमार आर्य    मनुष्य को अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्संग की आवश्यकता होती है। सत्संग का अभिप्राय है कि…

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विविधा भारत के पुनरुत्थान की सुबुगाहट का आख्यान

भारत के पुनरुत्थान की सुबुगाहट का आख्यान

मनोज ज्वाला खबर है कि आगामी अप्रेल महीने में महाकाल की नगरी उज्जैन में एक ऐसा अद्भूत कार्यक्रम सम्पन्न होने जा रहा है, जिससे देश-दुनिया…

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विविधा शिव  हैं निर्माण एवं नव-जीवन के प्रेरक

शिव  हैं निर्माण एवं नव-जीवन के प्रेरक

महाशिवरात्रि- 13 फरवरी 2018 पर विशेष -ः ललित गर्ग:- भगवान शिव आदिदेव है, देवों के देव है, महादेव हैं। सभी देवताओं में वे सर्वोच्च हैं , महानतम हैं ,…

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व्यंग्य साथी हाथ छुड़ाना रे।

साथी हाथ छुड़ाना रे।

अमित शर्मा (CA) हर कार्यालय की लय,वहाँ कार्य से फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने वाले कर्मचारियों की कुशलता में लीन रहकर अंततोगत्वा अपने प्रारब्ध में ही विलीन…

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शख्सियत महर्षि दयानन्द ! तुझे प्रणाम, कोटिश: नमन

महर्षि दयानन्द ! तुझे प्रणाम, कोटिश: नमन

राकेश कुमार आर्य   महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज की 194वीं जयन्ती  महर्षि दयानन्द के व्यक्तित्व को किसी एक आलेख में आबद्घ किया जाना…

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