कविता मै बड़ा भई,मै बड़ा 

मै बड़ा भई,मै बड़ा 

मै बड़ा भई,मै बड़ा सब कहते है मै बड़ा इसी बात को लेकर देवताओ में युद्ध छिड़ा पहले सबसे पावन गंगा बोली, मै तो सबके…

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राजनीति क्षेत्रीय दलों के गठबंधन में कांग्रेस का पेंच

क्षेत्रीय दलों के गठबंधन में कांग्रेस का पेंच

प्रमोद भार्गव इस समय देश की राजनीति में नई करवट लाने की कोशिश पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा…

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विविधा भारत को समावेशी और रोजगार आधरित विकास की जरूरत है

भारत को समावेशी और रोजगार आधरित विकास की जरूरत है

जावेद अनीस आर्थिक विकास के मोर्चे पर तेजी से उभरते भारत के लिये असमानता और बढ़ती बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है। देश में स्वरोजगार के मौके घट रहे…

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विश्ववार्ता किम की चीन-यात्रा के अर्थ

किम की चीन-यात्रा के अर्थ

डॉ. वेदप्रताप वैदिक उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन ने चीन-यात्रा करके सारी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके…

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कविता सुकुमार सी मोहन हँसी !

सुकुमार सी मोहन हँसी !

सुकुमार सी मोहन हँसी, है श्याम सखि जब दे चली; वसुधा की मृदुता मधुरता, उनके हृदय थी बस चली ! करि कृतार्थ परमार्थ चित, हो समाहित संयत विधृत; वह सौम्य आत्मा प्रमित गति, दे साधना की सुभग द्युति ! है झलक अप्रतिम दे गई, पलकों से मुस्काए गई; संवित सुशोभित मन रही, चेतन चितेरी च्युत रही ! भूलत न भोले कृष्ण मन, वह सहजपन अभिनव थिरन; बृह्मत्व की जैसे किरण, विकिरण किए रहती धरणि ! वह धवलता सुकुमारिता, ब्रज वालिका की गहनता; हर आत्म की सहभागिता, ‘मधु’ के प्रभु की ज्यों खुशी ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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धर्म-अध्यात्म वेदों की देन है सत्य और अहिंसा का सिद्धान्त

वेदों की देन है सत्य और अहिंसा का सिद्धान्त

मनमोहन कुमार आर्य आजकल सत्य और अहिंसा की बात बहुत की जाती है। वस्तुतः सत्य और अहिंसा क्या है और इनका उद्गम स्थल कहां हैं?…

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विविधा आर्यावर्त्त के सदृश भूगोल में दूसरा कोई देश नहीं है”

आर्यावर्त्त के सदृश भूगोल में दूसरा कोई देश नहीं है”

-मनमोहन कुमार आर्य संसार में अनेक देश है जिनकी कुल संख्या 195 है। इनमें से कोई भी देश मानवता की दृष्टि, ईश्वर व आत्मा के…

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समाज पैरेण्टिंग( परवरिश)

पैरेण्टिंग( परवरिश)

गङ्गानन्द झा अमेरिकी शिक्षाविद एवम् बच्चों की कहानों के लेखक केट विगिन(1856-1923) की उक्ति है, “इस संसार में जन्मा हर बच्चा विधाता का एक नया…

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विविधा गोरे रंग का सौंदर्य शास्त्र औऱ विकृत मनोविज्ञान

गोरे रंग का सौंदर्य शास्त्र औऱ विकृत मनोविज्ञान

डॉ अजय खेमरिया क्या हमारी चमड़ी का रंग एक अति विशिष्ट मानसिकता को जन्म देता है मोटे तौर पर तो रंग का आपके कार्यव्यवहार,वयक्तित्व, सद्गुण,…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-78

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-78

राकेश कुमार आर्य   गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज क्या है त्रिगुणातीत? जब श्रीकृष्णजी ने त्रिगुणों की चर्चा की और लगभग त्रिगुणातीत…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-77

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-77

राकेश कुमार आर्य गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज मलीन बस्तियों में रहने वाले लोगों को हमें उनके भाग्य भरोसे भी नहीं छोडऩा चाहिए।…

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धर्म-अध्यात्म वैदिक समाज व्यवस्था में शूद्र वर्ण के कर्तव्य एवं अधिकार

वैदिक समाज व्यवस्था में शूद्र वर्ण के कर्तव्य एवं अधिकार

मनमोहन कुमार आर्य वैदिक समाज व्यवस्था को वैदिक वर्ण व्यवस्था के नाम से जाना जाता है। वर्ण का अर्थ चुनना या चयन करना होता है।…

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