कविता कुचल दो कुयाशा की शाखाएँ !

कुचल दो कुयाशा की शाखाएँ !

कुचल दो कुयाशा की शाखाएँ, कुहक ले चल पड़ो कृष्ण चाहे; कृपा पा जाओगे राह आए, कुटिल भागेंगे भक्ति रस पाए !   भयंकर रूप…

Read more
व्यंग्य    परबुद्ध सम्मेलन 

   परबुद्ध सम्मेलन 

मैं दोपहर बाद की चाय जरा फुरसत से पीता हूं। कल जब मैंने यह नेक काम शुरू किया ही था कि शर्मा जी का फोन…

Read more
राजनीति विकृत मानसिकता और कांग्रेस के नेता

विकृत मानसिकता और कांग्रेस के नेता

सुरेश हिन्दुस्थानी भारतीय संस्कृति से साक्षात्कार करने वाला व्यक्ति कभी अपशब्द नहीं बोल सकता, जो अपशब्द बोलता है, वह भारतीय संस्कृति का संवाहक हो ही…

Read more
विविधा हिंदी पर राष्ट्रपति का नया संदेश

हिंदी पर राष्ट्रपति का नया संदेश

डाॅ. वेदप्रताप वैदिक हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जो संदेश दिया है, यह मुझे ऐसा लगा, जैसे कि मैं ही बोल…

Read more
विधि-कानून भारत में न्यायिक प्रणाली, समस्याएं और सुधार 

भारत में न्यायिक प्रणाली, समस्याएं और सुधार 

एडवोकेट डा. राधेश्याम द्विवेदी लोकतांत्रिक भारत सरकार की तीन स्वतंत्र शाखाएं हैं – कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। भारतीय न्यायिक प्रणाली अंग्रेजों ने औपनिवेशिक शासन के…

Read more
विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-25

विश्वगुरू के रूप में भारत-25

राकेश कुमार आर्य   हमारे प्राचीन ऋषियों ने पशु-पक्षियों की अनेकों प्रेरणास्पद कहानियों का सृजन किया, और उन्हें बच्चों को बताना व पढ़ाना आरंभ…

Read more
कविता हरसिंगार

हरसिंगार

हरसिंगार की  ख़ुशबू कितनी ही निराली हो चाहें रात खिले और सुबह झड़ गये बस इतनी ज़िन्दगानी है। जीवन छोटा सा हो या हो लम्बा, ये बात ज़रा बेमानी है, ख़ुशबू बिखेर कर चले गये या घुट घुट के जीलें चाहें जितना। जो देकर ही कुछ चले गये उनकी ही बनती कहानी है। प्राजक्ता कहलो या पारितोष कहो केसरिया डंडी श्वेत फूल की चादर बिछी पेड़ के नीचे वर्षा रितु कीबिदाई  है शरद रितु की अगवानी है। अब शाम सुबह सुहानी हैं।

Read more
कविता मैं भी तो आगे बढ़ नहीं पायी

मैं भी तो आगे बढ़ नहीं पायी

  जब गुजरती हूँ उन राहों से, मेरी तेज धड़कने आज भी तेरे होने का एहसास करा जाती है ।   जब गुज़रती हूँ उन…

Read more
आर्थिकी देश पर कम होता ऋण भार

देश पर कम होता ऋण भार

डॉ. मयंक चतुर्वेदी ऋण को विकास के लिए जितना अधिक अपरिहार्य माना गया है, उतना ही लगातार इससे डूबे रहने को जनमानस में घोर विपत्‍ति‍कारक स्‍वीकार्य…

Read more
समाज क्यों जिन्दगी का सच नहीं ढूंढ़ पाये? 

क्यों जिन्दगी का सच नहीं ढूंढ़ पाये? 

ललित गर्ग जिन्दगी के सवालों से घिरा वक्त जीवन के सच को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश अतीत से वर्तमान तक होती…

Read more
राजनीति नरेन्द्र मोदी रूपी युगयात्रा की आवाज को सुनें

नरेन्द्र मोदी रूपी युगयात्रा की आवाज को सुनें

नरेन्द्र मोदी के 67वें जन्म दिवस, 17 सितम्बर 2017 के उपलक्ष में -ललित गर्ग – एक दीया लाखों दीयों को उजाला बांट सकता है यदि…

Read more
प्रवक्ता न्यूज़ 2018 से होगा भव्य मंदिर का निर्माण प्रारम्भ

2018 से होगा भव्य मंदिर का निर्माण प्रारम्भ

प्रेस विज्ञप्ति :राम जन्मभूमि आन्दोलन के कारण हुआ भारत का भगवा युग में प्रवेश, 2018 से होगा भव्य मंदिर का निर्माण प्रारम्भ : डा सुरेन्द्र…

Read more