राजनीति इतिहास का सबसे लंबा अनुत्तरित प्रश्न नेताजी की मौत

इतिहास का सबसे लंबा अनुत्तरित प्रश्न नेताजी की मौत

नेताजी सुभाष की मृत्यु: आयोग, फाइलें और अधूरा सत्य– योगेश कुमार गोयलभारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य आज…

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राजनीति संगठनात्मक क्षमता की लय को कैसे रखेंगे बरकरार?

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नितिन नवीन को पार्टी की कमान सौंपकर भारतीय जनता पार्टी ने सियासी पटल पर एक नई इबारत लिखी है।

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लेख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : आंख मूंद कर भरोसा कहीं मुश्किल में न डाल दे

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : आंख मूंद कर भरोसा कहीं मुश्किल में न डाल दे

 ज्ञान चंद पाटनी    आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का हर क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा रहा है। चिकित्सा से लेकर कानून ही नहीं, कृषि और कारखानों तक, यह तकनीक बेहद उपयोगी और समय बचाने का साधन साबित हो रही है। साथ ही इसका बिना जांचे—परखे उपयोग करना मुसीबत का कारण भी बन रहा है। ताजा उदाहरण बॉम्बे हाईकोर्ट का है जहां एक वकील ने बिना जांचे एआई से बनी दलीलें दाखिल कीं और इससे नाराज अदालत ने 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया। इसी तरह वर्कडे की ताजा ग्लोबल रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में शामिल 85 प्रतिशत कर्मचारी मानते हैं कि हर सप्ताह एआई से बचने वाले एक से 7 घंटों में से 40 प्रतिशत समय गलतियां सुधारने में चला जाता है। इसी तरह अमेरिका और चीन के विश्वविद्यालयों के शोध पत्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि एआई ने रिसर्च की गति तो बढ़ाई लेकिन विविधता को नुकसान पहुंचाया है। साफ है कि एआई के फायदे अपार हैं, लेकिन बिना सावधानी के उपयोग से नुकसान भी उतना ही गहरा है। इसलिए संतुलित और सही इस्तेमाल ही इसका सही मार्ग है।   निश्चित ही एआई का उदय 21वीं सदी की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति है। यह डेटा के विशाल समुद्र में डुबकी लगाती है और जरूरी जानकारी निकालती है। इसकी मदद से रिसर्चर तीन गुना अधिक पेपर प्रकाशित कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में तो एआई डायग्नोसिस की सटीकता बहुत ज्यादा है। एआई तकनीक डॉक्टरों को बीमारियों का जल्द पता लगाने, जांचों का विश्लेषण करने और  उपचार सुझाने में मदद करती है। एआई संचालित टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञों से जोड़ते हैं जिससे समय और लागत की बचत होती है। साथ ही देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होता है। किसानों के लिए एआई एक विश्वसनीय साथी साबित हो रही है। यह तकनीक मौसम की भविष्यवाणी कर सकती है, कीटों के हमलों का पता लगा सकती है और सिंचाई व बुवाई के लिए बेहतर समय तक सुझाने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में भी एआई तकनीक उपयोगी है। एआई न्यायिक कार्य, शासन और लोक सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया को नया रूप दे रही है।    जाहिर है कि एआई तेजी से अर्थव्यवस्था को बदलने वाली तकनीक बन चुकी है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15.7 ट्रिलियन  डॉलर जोड़ सकती है। यह अलग बात है कि इस आर्थिक लाभ का 84 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उत्तरी अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे विकसित क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए भी यह अवसरों का सागर है। यही वजह है कि देश में एआई तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी समझना होगा कि उत्साह के साथ सतर्कता जरूरी है।   एआई की चमक के पीछे छिपे खतरे नजरअंदाज नहीं किए जा सकते।  बॉम्बे हाईकोर्ट का मामला इसका जीता-जागता प्रमाण है। हार्ट एंड सोल एंटरटेनमेंट के निदेशक मोहम्मद यासीन ने एआई से तैयार दलीलें दाखिल कीं. इसमें उद्धृत एक फैसला कहीं अस्तित्व में था ही नहीं। जस्टिस एम.एम. साठये ने इसे न्याय प्रक्रिया में बाधा बताया। एआई टूल्स रिसर्च के लिए स्वीकार्य हैं लेकिन सत्यापन करना वकील या पक्षकार की जिम्मेदारी है, वे इससे बच नहीं सकते। यह घटना एआई के हैलुसिनेशन यानी मतिभ्रम जैसे खतरे को उजागर करती है। इस कारण काल्पनिक तथ्य तक गढ़ लिए जाते हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया भर में ऐसे मामले सामने आए हैं। गत वर्ष ऑस्ट्रेलिया में एक वकील ने कोर्ट में कुछ मुकदमों का हवाला देते हुए अपने केस को मजबूत करना चाहा लेकिन जब जज ने इन मुकदमों की लिस्ट जांची तो सामने आया कि ऐसे केस तो कभी हुए ही नहीं।  वकील ने बताया कि यह जानकारी एआई से मिली थी। वकील ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। जज ने  माफी तो स्वीकार की, लेकिन मामले की जांच भी शुरू कर दी। वकील का मामला विक्टोरियन लीगल सर्विसेज बोर्ड को भेजा गया। बोर्ड ने उसे निजी लॉ प्रैक्टिस करने से रोक दिया  और दो साल तक किसी अनुभवी वकील की निगरानी में काम करने के निर्देश दिए । इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया के कोर्ट में 20 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए, जहां वकीलों या खुद का कोर्ट में पक्ष रखने वाले लोगों ने एआई का इस्तेमाल करके ऐसे दस्तावेज तैयार किए जिनमें गलत जानकारी थी। जाहिर है वकालत और कानून की दुनिया में एआई का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।   वर्कडे रिपोर्ट में भी एआई के कारण होने वाली फॉल्स सेंस ऑफ प्रोडक्टिविटी’ का भी उल्लेख है। जो समय बचता है, गलतियों सुधारने में उसका 40 प्रतिशत जाया हो जाता है। इसी तरह रिसर्च क्षेत्र में एआई ने गति तो बढ़ाई, लेकिन कीमत भी चुकानी पड़ी। 4.13 करोड़ शोध पत्रों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि एआई तकनीक उपयोगी है पर विषय विविधता 4.63 प्रतिशत घटी है।     गोपनीयता उल्लंघन एआई का बड़ा जोखिम है। कैम्ब्रिज एनालिटिका कांड एक बड़ा डेटा गोपनीयता घोटाला था। असल में ब्रिटिश राजनीतिक परामर्श फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने लाखों फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा को उनकी सहमति के बिना राजनीतिक अभियानों के लिए अवैध रूप से एकत्र करके उसका उपयोग किया। इसके बाद डेटा सुरक्षा कानूनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर वैश्विक बहस छिड़ी। फेसबुक पर जुर्माना भी लगा और डेटा सुरक्षा में सुधार के लिए कदम उठाए गए। माना जाता है कि डीपफेक वीडियो ने 2024 के अमेरिकी चुनाव को प्रभावित किया था। साइबर हमलों में भी एआई तकनीक मददगार बन रही है।  जाहिर है विश्वसनीयता का संकट बढ़ रहा है।     एआई से नौकरियों पर संकट की बात भी बहुत जोरशोर से हो रही है। इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि एआई से नौकरीपेशा लोगों पर खतरा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि डेटा एंट्री, कॉल सेंटर, सरल कोडिंग सबसे प्रभावित होंगी लेकिन एआई इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट जैसी नई नौकरियों के लिए अवसर सामने आएंगे। ऐसे में एआई के दौर में अपने आपको प्रासंगिक बनाए रखने के लिए खुद को समय के साथ अपग्रेड रखना जरूरी है। यह बात सही है कि एआई बहुत सी चीजें कर सकता है, लेकिन वह इंसान की रचनात्मकता, भावनात्मकता और सोचने-समझने की क्षमता का मुकाबला नहीं कर सकता है। एआई तकनीक लीडरशिप जैसी भूमिका नहीं निभा सकती। इसलिए एआई से डरने की बजाय  अपनी रचनात्मकता और सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दें।   तमाम खतरों के बावजूद इस तकनीक से किनारा नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश सभी क्षेत्रों के लिए प्रासंगिक है – एआई सहायक है लेकिन वह इंसान की जगह नहीं ले सकती। इसलिए एआई से बचें नहीं, प्रशिक्षण लें और सरकार नियमन तंत्र मजबूत करे। एआई युग में भी मानव विवेक सर्वोपरि रहेगा। तकनीक गति दे सकती है, लेकिन इसे दिशा तो इंसान ही देगा। इसलिए एआई तकनीक के उपयोग में जिम्मेदारी का भाव रहना बहुत जरूरी है। एआई मददगार जरूर है लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भरता घातक साबित होती है। उससे मिली जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, उसे जांचें, अपने विवेक का इस्तेमाल करें और फिर आगे बढ़ें। ज्ञान चंद पाटनी

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लेख सम्पर्क, सूचना और संचार समझाये विचार

सम्पर्क, सूचना और संचार समझाये विचार

चंद्र मोहन “संपर्क सूचना और संचार” का मतलब है वह जानकारी (जैसे फ़ोन नंबर, ईमेल, पता) और तरीके (जैसे फ़ोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया) जिनका उपयोग…

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कला-संस्कृति प्रकृति, चेतना और आत्म जागरण का उत्सव

प्रकृति, चेतना और आत्म जागरण का उत्सव

बसंत पंचमी विशेष :  डॉ घनश्याम बादल भारतीय परंपरा और श्रीमद् भागवत गीता में  वसंत को ऋतुराज कहा गया है,’ऋतूनां कुसुमाकरः अर्थात् ऋतुओं में मैं वसंत हूँ, जहाँ सृजन, सौंदर्य और चेतना अपने चरम पर होती है। बसंत का सौंदर्य एवं महत्व देखकर ही इसे ऋतुराज की संज्ञा दी गई है। वसंत पंचमी भारतीय जीवन-दर्शन का सजीव प्रतीक है- जहाँ धर्म, विज्ञान, मनोविज्ञान और प्रकृति एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के विविध रूप हैं।  तिथि मात्र नहीं बसंत   वसंत पंचमी केवल पंचांग में अंकित एक तिथि मात्र नहीं, अपितु भारतीय चेतना का वह क्षण है जब जड़ता के लंबे शीतकाल के बाद जीवन पुनः मुस्कुराने लगता है। यह ऋतु परिवर्तन का संकेत भर नहीं, बल्कि आत्मा, प्रकृति और समाज‌ तीनों के नवजागरण का पर्व है। श्वेत शीत के बाद पीत वसंत का आगमन जैसे कहता है-अब भीतर और बाहर, दोनों ही स्तरों पर ऊर्जा को जगाने एवं सृजन का समय है। धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। सरस्वती केवल विद्या की देवी नहीं, बल्कि चेतना की धारा हैं। वह चेतना जो अज्ञान के तम को चीरकर विवेक का प्रकाश फैलाती है। इसीलिए इस दिन पुस्तकों, वाद्ययंत्रों और लेखन-कार्य का पूजन होता है। या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना  श्लोक हमें स्मरण कराता है कि ज्ञान का स्वरूप शुद्ध, शांत और उज्ज्वल होता है, ठीक उसी तरह जैसे वसंत का प्रकाश। आध्यात्मिक दृष्टि से वसंत पंचमी आंतरिक ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। जैसे धरती के भीतर बीज फूटते हैं, वैसे ही साधक के भीतर सुप्त चेतना जागती है। योग और तंत्र परंपरा में इस काल को साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ  माना गया है । प्रकृति और विज्ञान का संगम वैज्ञानिक दृष्टि से वसंत पंचमी के आसपास पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में दिनों की अवधि बढ़ने लगती है, सूर्य की किरणें अधिक सीधी और ऊर्जा-समृद्ध हो जाती हैं। इसका प्रभाव सीधे मानव शरीर और मस्तिष्क पर पड़ता है। मौसम विज्ञान के अनुसार भी वसंत ऋतु में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे “प्रसन्नता दायक हार्मोन” का स्तर बढ़ता है अवसाद, जड़ता और आलस्य में कमी आती है। सृजनात्मकता और सीखने की क्षमता तीव्र होती है । इसीलिए प्राचीन भारत में गुरुकुलों में नए अध्ययन सत्र, संगीत-नाट्य अभ्यास और शास्त्रार्थ इसी काल में प्रारंभ होते थे। मनोविज्ञान और आत्मिक चेतना मनोवैज्ञानिक रूप से वसंत पंचमी आशा का पर्व है। शीतकाल मानव मन में एक प्रकार की संकुचनशीलता ले आता है। कम प्रकाश, कम ऊर्जा, अधिक अंतर्मुखता। वसंत इस संकुचन को तोड़ता है। पीला रंग, जो वसंत पंचमी का प्रतीक है, ऊर्जा, ऊष्मा,आशावाद, बौद्धिक स्पष्टता और आत्मविश्वास का रंग माना जाता है।  इस दिन पीले वस्त्र, पीले पुष्प और पीले पकवान (केसरिया खीर, बेसन के लड्डू) परंपरा में शामिल हैं। यह रंग मन को संदेश देता है- संकुचन एवं आलस का समय यानी शीतकाल अब चला गया इसलिए आगे बढ़ो,सीखो और रचो।” भौगोलिक परिवर्तन और जीवन भौगोलिक दृष्टि से वसंत पंचमी कृषि चक्र का महत्वपूर्ण पड़ाव है। रबी की फसलें पकने लगती हैं, सरसों के खेत पीले फूलों से भर जाते हैं। यह दृश्य केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि अन्न, समृद्धि और जीवन की निरंतरता का संकेत है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक लोकजीवन में वसंत का स्वागत गीतों के माध्यम से होता है- फागुन आयो रे, रंग बरसाओ रे, सरसों फूली,धरती बोली,जीवन गुनगुनाओ रे जैसे लोकगीतों में किसान की आशा, प्रकृति से उसका संवाद और जीवन के प्रति उसका उल्लास समाहित होता है। वसंत और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा वसंत पंचमी के साथ ही फाग, होली, रास और प्रेम-उत्सवों की श्रृंखला आरंभ होती है। कालिदास ने ‘ऋतुसंहार’ में वसंत को प्रेम और सृजन की ऋतु कहा है। यह प्रेम केवल दैहिक नहीं, बल्कि आत्मा का प्रकृति से, मनुष्य का मनुष्य से और साधक का ब्रह्म से प्रेम है।  आधुनिक संदर्भ में वसंत पंचमी…

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राजनीति एनएसए अजीत डोभाल ने ऐसा क्या कहा कि कुछ लोग तिलमिलाने लगे!

एनएसए अजीत डोभाल ने ऐसा क्या कहा कि कुछ लोग तिलमिलाने लगे!

रामस्वरूप रावतसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने 10 जनवरी 2026 को कहा कि भारत की स्वतंत्रता आसानी से नहीं मिली बल्कि इसके पीछे पीढ़ियों तक चला दर्द, अपमान…

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राजनीति वंदे मातरम पर बवाल क्यों ?

वंदे मातरम पर बवाल क्यों ?

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राजनीति महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम – प्रमुख राजनैतिक संदेश

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम – प्रमुख राजनैतिक संदेश

मृत्युंजय दीक्षितमहाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम आ चुके हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन महायुति ने संपूर्ण महाराष्ट्र मे महाविजय प्राप्त करके…

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राजनीति वंदे मातरम पर बवाल क्यों ?

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अध्याय ५ वन्देमातरम् की पृष्ठभूमि और बंकिम चंद्र चटर्जी हमारे भीतर आशाओं का संचार बना रहा सन १८१८ में पेशवा बाजीराव द्वितीय को अंग्रेजों ने…

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राजनीति विकसित @2047 के लिए युवा

विकसित @2047 के लिए युवा

डॉ. बालमुकुंद पांडे    विकसित भारत की संकल्पना युवाओं के रचनात्मक कार्य क्षमता एवं रचनात्मक संरचनात्मक ऊर्जा से ही संभव है । भारतवर्ष वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक युवा आबादी वाला राष्ट्र  हैं जिसमें देश की 28.2%  यानी 40 करोड़ आबादी ‘ 15- 29’ आयु – वर्ग की  हैं । यह  आयु – वर्ग  नवाचार ,विकास, ग्राहय एवं अधिगम के लिए सर्वाधिक उपर्युक्त आयु होती है। राष्ट्र के इस ऊर्जावान युवा वर्ग में राष्ट्र के उत्थान एवं प्रत्येक भारतीयों के  जीवनस्तर को गुणात्मक बनाए रखने की क्षमता, धारिता, और योग्यता होती है। युवाओं के सक्रिय भागीदारी एवं ऊर्जावान दक्षता से राष्ट्र को सामाजिक ,आर्थिक, एवं राजनीतिक(राजनैतिक)  समृद्धि के लिए उत्प्रेरित करने की अनंत ,असीमित ,अपार एवं असीम क्षमता होती है।                                           …

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