विविधा बीवी की याद में बना उत्तर प्रदेश में एक और ताजमहल

बीवी की याद में बना उत्तर प्रदेश में एक और ताजमहल

डा. राधेश्याम द्विवेदी प्यार की अमर निशानी ताजमहल का निर्माण शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल के लिए 1631 में आगरा में करवाया था। इसके…

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राजनीति खाट सभा और टाट सभा

खाट सभा और टाट सभा

कल शाम शर्मा जी के घर गया, तो वे माथे पर हाथ रखे ऐसे बैठे थे, जैसे सगी सास मर गयी हो। हर बार तो…

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राजनीति कश्मीरः अब पत्थरों के बदले गोलियां

कश्मीरः अब पत्थरों के बदले गोलियां

सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल कश्मीर हो आया। नतीजा क्या निकला? उल्टा ही हुआ! गृहमंत्री राजनाथसिंह ने पूरी कोशिश कर ली। न जाकर भी देखा और जाकर…

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आलोचना व्यभिचार का महिमामंडन

व्यभिचार का महिमामंडन

परंपरागत राजनीति से ऊबी हुई दिल्ली की जनता ने बड़ी आशा और विश्वास के साथ आम आदमी पार्टी को विजयश्री प्रदान की थी ! किन्तु…

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विविधा सरकारी धन और सुरक्षा पर इतराते अलगाववादी

सरकारी धन और सुरक्षा पर इतराते अलगाववादी

यह भारत जैसे उदार व सहिष्णु देश में ही संभव है कि आप अलगाव और देशद्रोह का खुलेआम राग अलापिए, मासूम युवाओं को भड़काइए और…

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राजनीति खटिया लूटेरी जनता

खटिया लूटेरी जनता

जब लोकतंत्र जनता के लिए है, चुनाव जनता के लिए हैं, रैलियों का इंतजाम जनता के लिए है तो खटिया क्यूँ नहीं? उत्तर प्रदेश के…

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समाज प्रवासियों का जमावड़ा नहीं होता राष्ट्र, इसका निर्धारण इसके प्रति अपनत्व रखने वालों से होता है – मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी डी बक्शी

प्रवासियों का जमावड़ा नहीं होता राष्ट्र, इसका निर्धारण इसके प्रति अपनत्व रखने वालों से होता है – मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) जी डी बक्शी

जबसे वामपंथियों को एक महानायक कामरेड कन्हैया मिला है, उन्होंने राष्ट्रवाद को लेकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक जबरदस्त अभियान शुरू कर दिया है,…

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शख्सियत आचार्य विनोबा भावे : रोशनी जिनके साथ चलती थी

आचार्य विनोबा भावे : रोशनी जिनके साथ चलती थी

आचार्य विनोबा भावे की जन्म जयन्ती- 11 सितम्बर -ललित गर्ग- महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन कालजयी होता…

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विविधा प्रियंका योशीकावा: नस्लभेद मानवता का अभिशाप

प्रियंका योशीकावा: नस्लभेद मानवता का अभिशाप

ललित गर्ग – जिसमें हम जीते हैं, वह है सभ्यता और जो हममें जीती है वह है संस्कृति। संस्कृति ने अपने जीने का सबसे सुरक्षित…

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राजनीति वैचारिक खेमेबाजी और मोर्चे पर संघ परिवार

वैचारिक खेमेबाजी और मोर्चे पर संघ परिवार

उमेश चतुर्वेदी कामकाज और गुणदोष के आधार पर सरकारों की आलोचना से कोई भी लोकतांत्रिक समाज इनकार नहीं कर सकता । स्वस्थ आलोचना सरकारों की…

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कविता तुम से प्यार कितना है

तुम से प्यार कितना है

मनीषा गुप्ता क्या कहूँ की तुम से प्यार कितना है तेरी चाहत पर एतबार कितना है !! की साँसे भी अब तो कर देती है…

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राजनीति निरंतर ह्रास की ओर बढ़ रहा वामपंथ

निरंतर ह्रास की ओर बढ़ रहा वामपंथ

मजदूर हितों के नाम पर अपनी पूरी की पूरी राजनैतिक रोटियाँ सेंकनें वाले वामपंथी ट्रेड यूनियनों को एक बड़ी असफलता का सामना करना पड़ा है.…

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