समाज यथार्थ वर्णव्यवस्था और दलितोद्धार में महर्षि दयानन्द का योगदान

यथार्थ वर्णव्यवस्था और दलितोद्धार में महर्षि दयानन्द का योगदान

-मनमोहन कुमार आर्य इतिहास में महर्षि दयानन्द पहले व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जन्मना वर्ण-जाति व्यवस्था से ग्रस्त भारतीयों को वैदिक…

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प्रवक्ता न्यूज़ शाहरुख: नाम ने फंसाया

शाहरुख: नाम ने फंसाया

प्रसिद्ध फिल्मी सितारे शाहरुख खान को अमेरिकी हवाई अड्डे पर रोक लिया गया। उनके साथ यह तीसरी बार हुआ है। शिवसेना की पत्रिका ‘सामना’ ने…

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मीडिया सोशल -मीडिया और सामाजिकता के बदलते आयाम

सोशल -मीडिया और सामाजिकता के बदलते आयाम

अनादिकाल से ही मनुष्य सामाजिक प्राणी माना जाता रहा हैं। क्योंकि ज़िंदा रहने के लिए भले ही रोटी -कपडा -मकान की ज़रूरत होती हो लेकिन…

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विविधा आज़ादी कितनी अधूरी, कितनी पूरी

आज़ादी कितनी अधूरी, कितनी पूरी

हासिल स्वतंत्रता, किसी के लिए भी निस्संदेह एक गर्व करने लायक उपलब्धि होती है और स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिलाने वालों की कुर्बानी को याद करने…

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कविता अधूरी है आज़ादी

अधूरी है आज़ादी

नरेश भारतीय अधूरी क्यों है अभी भी यह आज़ादी? विभाजन को स्वीकार करने की मजबूरी क्या थी? जो कट कर अलग हुए क्या ख़ुश रहे?…

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कविता आजादी पर गर्व हमें है

आजादी पर गर्व हमें है

आजादी पर गर्व हमें है और सदा तक बना रहेगा, जिन लोगों ने कुर्वानी दी उनका नाम अमर रहेगा, पर अन्तिम जन को आजादी कब…

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महत्वपूर्ण लेख 70वां स्वतंत्रता दिवस और भारत की 70 उपलब्धियां

70वां स्वतंत्रता दिवस और भारत की 70 उपलब्धियां

डा. राधेश्याम द्विवेदी स्वतंत्रता दिवस का इतिहास:-17वीँ शताब्दी के दौरान कुछ यूरोपियन व्यापारियों द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप के सीमा चौकी पर प्रवेश किया ब्रिटीश ईस्ट इंडिया…

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विविधा गौरक्षकों को प्रधान मंत्री जी की नसीहत के मायने

गौरक्षकों को प्रधान मंत्री जी की नसीहत के मायने

कल के कुछ समाचार पत्रों में विश्व हिन्दू परिषद् के प्रमुख डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया जी की प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा छद्म ‘गौरक्षकों’…

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राजनीति काश, भारत को भी गांधी के शरीर में लिंकन मिल जाते

काश, भारत को भी गांधी के शरीर में लिंकन मिल जाते

डॉ. मयंक चतुर्वेदी ये काश आज भारत की उस त्रासदी से जुड़ा है, जो भारत विभाजन की विभीषिका का स्याह पन्ना है। भारत का विभाजन…

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शख्सियत जाते-जाते तुम बहुत कुछ दे गए स्‍वामी महाराज शांतिलाल पटेलजी……….

जाते-जाते तुम बहुत कुछ दे गए स्‍वामी महाराज शांतिलाल पटेलजी……….

डॉ. मयंक चतुर्वेदी जीवन सतत है और देह क्षणभृंगुर। देह पंचमहाभूतों का सार तत्‍व है और यह देह तभी अपने आकार को प्राप्‍त करती है,…

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विविधा देश को स्वतन्त्रता दिलाने में ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज की भूमिका

देश को स्वतन्त्रता दिलाने में ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज की भूमिका

मनमोहन कुमार आर्य महाभारत युद्ध के बाद अविद्या का अन्धकार सारे देश में फैल गया जो मनुष्यों की पराधीनता का कारण बना। उस अविद्यान्धकार से…

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आलोचना कैसे रहे याद कब हुए आजाद!

कैसे रहे याद कब हुए आजाद!

जगदीश यादव कोलकाता। पन्द्रह अगस्त को भारतवासी आजादी की 70 वीं वर्षगांठ मानएगें। लेकिन शायद यह जानकर हैरत होगी कि देश की एक आबादी को…

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