बॉक्स ऑफिस के लिए बेहद सफल एक्ट्रेस – श्रद्धा कपूर
Updated: November 7, 2025
सुभाष शिरढोनकर आज के दौर में श्रद्धा कपूर बॉक्स ऑफिस के लिए एक बेहद सफल एक्ट्रेस मानी जाती है। पिछले 6 साल से उनकी हर फिल्म बॉक्स…
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उपेक्षित रात की स्वर्णिम सुबह !
Updated: November 7, 2025
अवसर लेकर आई है ‘हर मन’ की जीत ! यह जीत बदल सकती है लड़कियों की दुनिया ! डॉ घनश्याम बादल 2 नवंबर 2025 की तारीख की रोशन रात भारतीय खेल जगत की एक ऐतिहासिक एवं स्वर्णिम घटना के रूप में याद की जाएगी…
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क्या नक्सलवाद का अंत हो जाएगा
Updated: November 7, 2025
राजेश कुमार पासी मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी, तब आतंकवाद और नक्सलवाद के रूप में देश की सुरक्षा के लिए दो बड़े खतरे…
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पांडव निष्ठा और भावुकता से सर्वसम्पन्न थे वही कौरव सर्वदोषसम्पन्न थे
Updated: November 7, 2025
आत्माराम यादव पीव सत्य स्वयं प्रतिष्ठित होता है ओर सब कुछ सत्य का आधार पाकर प्रतिष्ठित होता है। आज विश्व में प्रतिष्ठित होने वाला यह…
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खेल: राष्ट्र निर्माण की नई धुरी
Updated: November 7, 2025
भारत में खेलों को लंबे समय तक एक ‘विवेकाधीन क्षेत्र’ के रूप में देखा गया है — यानी एक ऐसी गतिविधि जिसे चाहें तो करें,…
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आत्मघाती होती शिक्षा प्रणाली: मौतों का भयावह यथार्थ
Updated: November 7, 2025
-ललित गर्ग-भारत की शिक्षा प्रणाली को लेकर समय-समय पर प्रश्न खड़े होते रहे हैं। शिक्षा की विसंगतियों एवं दबावों के चलते भी अनेक सवाल खड़े…
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असुरक्षित सड़कों के प्रदेश में सड़क हादसों पर ’जीरो टॉलरेंस’
Updated: November 7, 2025
डा वीरेन्द्र भाटी मंगल राजस्थान, जो अपनी भव्यता और अतिथि-सत्कार के लिए जाना जाता है, दुर्भाग्यवश इन दिनों सड़क हादसों के एक गंभीर संकट का…
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भारतीय राजनीति विचारणीय, चिंतनीय
Updated: November 7, 2025
शिवानन्द मिश्रा यह धारणा कि राजनीतिक वंशों के सदस्य नेतृत्व के लिए अद्वितीय रूप से उपयुक्त होते हैं, भारतीय शासन व्यवस्था में गहराई से…
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मिथिलांचल में कांग्रेस की वापसी की कोशिश: राहुल-तेजस्वी की जोड़ी से नई उम्मीद
Updated: November 7, 2025
डॉ. संतोष झा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को समाप्त हो गया जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर…
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रेल सुरक्षा: सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?
Updated: November 7, 2025
– योगेश कुमार गोयलभारत की रेल पटरियां देश की धमनियां कही जाती हैं, जो प्रतिदिन करोड़ों लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं, जो अर्थव्यवस्था…
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सच की आड़ में झूठ परोस रहे राहुल गांधी
Updated: November 11, 2025
भारत में 90 करोड़ मतदाता हैं, इसलिए मतदाता सूची में गड़बड़ी से इंकार नहीं किया जा सकता। सवाल सिर्फ इतना है कि ये गड़बड़ियां कैसे हुई हैं,
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अब्बा डब्बा जब्बा नहीं,अब अप्पू टप्पू पप्पू…
Updated: November 6, 2025
सुशील कुमार ‘नवीन ‘ वर्ष 1997 में एक फिल्म रिलीज हुई थी। फिल्म का नाम था ‘जुदाई’। मुख्य रोल में थे सुपरस्टार अनिल कपूर और लेडी सुपर स्टार श्रीदेवी। दोनों सुपरस्टारों के साथ जबरदस्त भूमिका में थी रंगीला गर्ल उर्मिला मातोंडकर। जो लोग 40 से बड़ी उम्र के है, अधिकांश फिल्मप्रेमियों ने ये फिल्म टीवी या सिनेमा में अवश्य देखी होगी। फिल्म की कहानी तो उस समय की सुपरहिट थी ही, सो उसकी चर्चा करने की जरूरत ही नहीं है। जरूरत है फिल्म के एक सुपरहिट डायलॉग ‘अब्बा डब्बा जब्बा’ पर चर्चा करने की। मूक बधिर महिला के निभाए गए आइकॉनिक रोल में इस डायलॉग ने उपासना सिंह को रातों रात सुर्खियों में ला दिया था। वैसे आज के समय में उपासना सिंह किसी परिचय की मोहताज नहीं है। आप भी सोच रहे होंगे कि इस डायलॉग की आज 28 वर्ष बाद अचानक कैसे याद हो आई। तो सुनिए बिहार में गुरुवार 6 नवंबर और 11 नवंबर को चुनाव होना है। बिहार की कुल 243 सीट पर दो चरण में चुनाव हो रहे हैं। लगभग 7.43 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। देश की राजनीति में बिहार की बड़ी भूमिका रहती है। इसलिए भाजपा गठबंधन और कांग्रेस गठबंधन जीत के लिए अपना पूरा जोर लगाए हुए है। 121 सीटों के लिए प्रचार थम चुका है। शेष 122 सीटों के लिए 9 नवंबर तक आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी रहेगा। 11 नवंबर को द्वितीय चरण के मतदान के बाद परिणाम 14 नवंबर को आयेगा। अब सीधे मुद्दे पर आते हैं। चुनाव कोई भी हो चटखारे लेने में कोई कर कसर नहीं छोड़ता। मोदी विरोधी हर मंच से जुमलेबाज, वोट चोर तो कहते ही है। साथ में दो चार तंज और भी छोड़ देते हैं। इसी क्रम में कसर मोदी भी नहीं छोड़ते। जहां मौका लगता है, वहीं तरकश से तीर छोड़ देते है। इस बार मोदी से ज्यादा तो यूपी वाले बाबा जी(योगी आदित्यनाथ) चुनावी मैदान में छक्के पे छक्का मारे जा रहे हैं। नया डायलॉग है पप्पू, अप्पू और टप्पू। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिहार की धरती से न केवल पटना की राजनीति को नहीं साध रहे, बल्कि दिल्ली तक की विपक्ष की राजनीति को निशाने पर ले रहे हैं।। हाल ही में उन्होंने बातों-बातों में विपक्ष के तीन बड़े चेहरों पर पप्पू, अप्पू और टप्पू का ऐसा डायलॉग मारा है जो लगातार चर्चा में है। उन्होंने बिना नाम लिए इन तीन चेहरों में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और बिहार में विपक्ष के सीएम फेस राजद नेता तेजस्वी यादव को गांधी जी के तीन बंदरों से इनका उदाहरण दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज गांधी जी के तीन बंदरों की तरह बिहार के महागठबंधन में भी तीन बंदर हैं। पप्पू, अप्पू और टप्पू। पप्पू सच बोल नहीं सकता, अप्पू सच सुन नहीं सकता और टप्पू सच देख नहीं सकता। उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह तीनों (पप्पू, टप्पू और अप्पू) बंदर न सच देखते हैं, न सुनते हैं, न बोलते हैं। कुछ भी हो डायलॉग जबरदस्त ट्रेंड में है। खैर जो कहा सो कह दिया। लोकतंत्र में सबको बोलने की आजादी है। इन्होंने छक्का मारा है तो मौका लगेगा तो वो भी पीछे नहीं रहेंगे। अथर्ववेद में लिखा गया यह सूक्त आज के समय प्रासंगिक जान पड़ता है। मा भ्राता भ्रातरं द्विक्षन्, मा स्वसारमुत स्वसा। सम्यञ्च: सव्रता भूत्वा वाचं वदत भद्रया।। इसका अर्थ है कि भाई, भाई से द्वेष न करें, बहन, बहन से द्वेष न करें, समान गति से एक-दूसरे का आदर- सम्मान करते हुए परस्पर मिल-जुलकर कर्मों को करने वाले होकर अथवा एकमत से प्रत्येक कार्य करने वाले होकर भद्रभाव से परिपूर्ण होकर संभाषण करें। पुराने समय की बात करें तो राजनीति में भाषा कभी जन-जागरण का माध्यम होती थी। नेता जो बोलते थे वो मर्यादित बोलते थे। आज ट्रेंडिंग का जमाना है। ऐसा बोलो कि समाचार पत्रों और टीवी चैनलों की सुर्खियां तो बने ही साथ में पब्लिक भी इसे खूब सर्कुलेट करे। यदि ये कहे कि राजनेता आज विचार सर्कुलेट नहीं करते अपितु चुनावी रंगमंच में डायलॉग डिलिवरी करते हैं। किसी नेता के संबोधन की जान ‘पप्पू’ है, किसी के लिए ‘चोर’। थोड़ा आगे बढ़े तो कोई फ्री की रेवड़ी बोल अपना वक्तव्य पूरा कर लेता है तो कोई ठगबंधन। फ्लैश बैक में जाएं तो किसी समय अटल बिहारी वाजपेयी का ‘हार नहीं मानूंगा’ समर्थकों में जोश से भर देता था। अब जोश भाषण से वही कटाक्षों से भरे जाने लगे हैं। ये बात सही है कि सुर्खियों के लिए डायलॉग जरूरी हैं, लेकिन जब मुद्दे छोड़ डायलॉग ही एजेंडे बन जाएं तो जनता वही महसूस करेगी जो उपासना सिंह ने ‘जुदाई’ में कहा था- ‘अब्बा डब्बा जब्बा’ अर्थात् बहुत कुछ कहोगे पर कुछ समझ में नहीं आएगा। भगवतगीता का प्रसिद्ध श्लोक इसे और सारगर्भित कर देगा। गीता में कहा गया है – यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते। भाव है को श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण करते हैं, दूसरे मनुष्य (आम इंसान) भी वैसा ही आचरण, वैसा ही काम करते हैं। वह (श्रेष्ठ पुरुष) जो प्रमाण या उदाहरण प्रस्तुत करता है, समस्त मानव-समुदाय उसी का अनुसरण करने लग जाते हैं। लेखक: सुशील कुमार ‘नवीन’ ,
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