कविता आदमी बदल रहा है

आदमी बदल रहा है

देखो आदमी बदल रहा है , आज खुद को छल रहा है, अपनो से बेगाना हो रहा है , मतलब को गले लगा रह है…

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राजनीति विपक्ष थोड़ा बड़प्पन दिखाए..

विपक्ष थोड़ा बड़प्पन दिखाए..

  २४ नवम्बर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र आने वाले सोमवार को अपना आधा पड़ाव पूर्ण कर लेगा| इस एक पखवाड़े में कई…

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कला-संस्कृति मन्दिर था या मस्जिद ??

मन्दिर था या मस्जिद ??

श्रीराम भारतीय राष्ट्रभाव का चरम आनंद हैं, वे मंगल भवन हैं, अमंगलहारी हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं । वे भारतीय मानस  के सम्राट हैं, पुराण में…

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धर्म-अध्यात्म श्रेष्ठ समाज और देश का आधार आर्य समाज का छठा नियम

श्रेष्ठ समाज और देश का आधार आर्य समाज का छठा नियम

आर्य समाज के 10 नियम है जो संसार की सभी संस्थाओं व संगठनों में श्रेष्ठ कहे जा सकते हैं। इन नियमों में छठे नियम के…

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कला-संस्कृति वीर हरपाल देव का स्वतंत्रता आंदोलन एवं खुसरू खां की ‘हिन्दू क्रान्ति’

वीर हरपाल देव का स्वतंत्रता आंदोलन एवं खुसरू खां की ‘हिन्दू क्रान्ति’

एक का उठना एक का गिरना ये खेल निरंतर चलता है। नीति पथ के अनुयायी को जग में मिलती सच्ची सफलता है।। पथ अनीति का…

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समाज अबूझ है संवेदना का समाजशास्त्र….!!

अबूझ है संवेदना का समाजशास्त्र….!!

रकेश कुमार ओझा कुछ साल पहले मेरी नजर में एक एेसे गरीब युवा का मामला आया, जो आइआइटी में दाखिला लेने जा रहाथा और  उसे…

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जन-जागरण एक त्रासदी का खबरनामा

एक त्रासदी का खबरनामा

मनोज कुमार तीस बरस का समय कम नहीं होता है। भोपाल के बरक्स देखें तो यह कल की ही बात लगती है। 2-3 दिसम्बर की…

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राजनीति Default Post Thumbnail

रामज़ादों के ऐसे बोल?

तनवीर जाफ़री भारतीय राजनीति में मर्यादा,विवेक तथा सद्भावना को तिलांजलि देने का एक और उदाहरण पिछले दिनों दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान…

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शख्सियत अद्भुत प्रतिभावान डा. भीमराव रामजी अम्बेदकर

अद्भुत प्रतिभावान डा. भीमराव रामजी अम्बेदकर

ओ३म् पुण्य तिथि 7 दिसम्बर पर श्रद्धांजलि मनमोहन कुमार आर्य 7 दिसम्बर 1956 को दिवगंत डा. भीमराव रामजी अम्बेदकर जी की आज 58 वीं जयन्ती…

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धर्म-अध्यात्म सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग ही मनुष्य का धर्म है

सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग ही मनुष्य का धर्म है

किसी विषय पर यदि दो बातें हैं, इनमें हो सकता कि एक सत्य हो और दूसरी असत्य या दोनों ही असत्य भी हो सकती हैं।…

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जन-जागरण जापान : कर्मयोग का ज्वलंत आदर्श

जापान : कर्मयोग का ज्वलंत आदर्श

डॉ. मधुसूदन (एक) प्रवेश: आज हम ऐसे मोड पर खडे हैं, जहाँ से दो रास्ते निकलते हैं। एक कठिन परिश्रम का। दूसरा फिरसे गत ६७…

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धर्म-अध्यात्म स्वाध्याय से जीवनोद्देश्य का ज्ञान व इच्छित फलों की प्राप्ति

स्वाध्याय से जीवनोद्देश्य का ज्ञान व इच्छित फलों की प्राप्ति

  संस्कृत का “स्व” शब्द विश्व के भाषा साहित्य का एक गौरवपूर्ण व महिमाशाली शब्द है। इस शब्द में स्वयं को जानने व समझने की…

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