जन-जागरण शौर्य दिवस पर विधवा विलाप क्यों?

शौर्य दिवस पर विधवा विलाप क्यों?

प्रवीण दुबे छह दिसंबर 1992 का दिन, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं। तमाम मुस्लिम संगठनों…

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कविता तुला

तुला

नागफनी सरीखे उग आये है कांटे , दूषित माहौल में इच्छाये मर रही है नित चुभन से दुखने लगा है, रोम-रोम। दर्द आदमी का दिया…

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शख्सियत वैश्विक नेता के रुप में उभरते मोदी

वैश्विक नेता के रुप में उभरते मोदी

प्रमोद भार्गव   एक के बाद एक ऐशियाई व पश्चिमी देशों की यात्राओं में मिली अप्रत्याशीत सफलताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक नेता के…

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जन-जागरण छलनीगढ़ में बदलता छत्तीसगढ़

छलनीगढ़ में बदलता छत्तीसगढ़

अभिषेक तिवारी साल के आखिरी महीने के पहले दिन की शुरूआत छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने अपने सुनियोजित परंतु कायरतापूर्ण तरीके से सीआरपीएफ के 14 जवानों…

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जन-जागरण राष्ट्रहित से जुड़ी संस्कृत

राष्ट्रहित से जुड़ी संस्कृत

प्रमोद भार्गव देश के केंद्रीय विद्यालयों में फिर से संस्कृत पढ़ाए जाने के विवाद पर केंद्र सरकार ने अब अपना रुख साफ कर दिया है।…

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टॉप स्टोरी संस्कृत के पक्ष में दो शब्द

संस्कृत के पक्ष में दो शब्द

  भाषा न तो किसी की जागीर है और न ही इसे सीमाओं की परिधि में समेटा जा सकता। यह तो रुचि के अनुरूप है।…

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खान-पान शीत ऋतु में आहार-विहार

शीत ऋतु में आहार-विहार

मुख्य रूप से तीन ऋतुएं हैं- शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु और वर्षा ऋतु। आयुर्वेद के मतानुसार छः ऋतुएँ मानी गयी हैं- वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद,…

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कविता तस्वीर

तस्वीर

ये कैसी तस्वीर उभर रही है , आँखों का सकून , दिल का चैन छिन रही है . अम्बर घायल हो रहा है अवनि सिसक…

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कविता याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना

याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना

याद है मुझे आज भी बारिश का दिन सुहाना वो तुम्हें देखकर मेरा खुद से ही नज़रें चुराना। महफ़िल के बीच छुपकर तुमसे नज़रें मिलाना…

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जन-जागरण बेघरों का दर्द कौन सुने

बेघरों का दर्द कौन सुने

आराधना द्विवेदी सर्दी का मौसम घर में रहने वाले लोगों के लिए तो बेहद रूमानी और खूबसूरत होता है, लेकिन इसी भारत के वे लोग…

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जन-जागरण दोहरे आतंक की मार झेलता भारत

दोहरे आतंक की मार झेलता भारत

सुरेश हिन्दुस्थानी नक्सलियों ने एक बार फिर सुरक्षा बलों के समूह पर हमला बोल कर अपने कुत्सित इरादों का परिचय दिया है। सुकमा के घने…

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राजनीति सत्ता के लिए कांगे्रस की तड़पन

सत्ता के लिए कांगे्रस की तड़पन

सुरेश हिन्दुस्थानी भारत की सत्ता एक अथाह सागर की तरह है, जिसमें कोई भी दल एक बार डुबकी लगा ले तब उसे छोटे छोटे तालाबों…

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