समाज शहर और शहरी होने की दौड़ में गाँव और ग्रामीण : कितना सही, कितना गलत

शहर और शहरी होने की दौड़ में गाँव और ग्रामीण : कितना सही, कितना गलत

जब हम किसी व्यक्ति के जीवन का मूल्यांकन इस आधार पर करने लगते हैं कि वह शहर में रहता है या गाँव में, कि वह अंग्रेज़ी बोलता है या भोजपुरी, कि वह सूट पहनता है या धोती — तो हम दरअसल उस व्यक्ति की मनुष्यता को एक सांस्कृतिक पदानुक्रम की सीढ़ियों पर तोलने की कोशिश कर रहे होते हैं। और इस तोल में, अनिवार्य रूप से, गाँव और ग्रामीण हमेशा नीचे पाए जाते हैं — कम विकसित, कम आधुनिक, कम सभ्य।

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खान-पान हीटवेव की मार से हरियाणा–पंजाब की खेती और किसानों की आय दोनों संकट में

हीटवेव की मार से हरियाणा–पंजाब की खेती और किसानों की आय दोनों संकट में

चरम तापमान का सबसे प्रत्यक्ष और स्पष्ट प्रभाव फसलों पर पड़ता है। यह स्थापित तथ्य है कि 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान गेहूं,…

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लेख भीषण गर्मी और मानसिक स्वास्थ्य

भीषण गर्मी और मानसिक स्वास्थ्य

मुख्य मानसिक समस्याएं जो गर्मी में बढ़ती हैं :- तनाव- छोटी-छोटी बातों पर चिंता ,सिरदर्द – धूप और पानी की कमी से, चिड़चिड़ापन और गुस्सा-…

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मनोरंजन लोकतंत्र की सांस है आजाद मीडिया

लोकतंत्र की सांस है आजाद मीडिया

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1993 में की थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित…

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मनोरंजन दुनिया भर में पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां

दुनिया भर में पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां

अगर सच बोलने वालों को हतोत्साहित किया जाता रहा तो सच भी धीरे-धीरे हाशिए पर चला जाएगा। यह स्थिति न तो किसी समाज के लिए शुभ कही जा सकती है और न ही किसी देश या दुनिया के लिए। तय हमें ही करना है कि हम क्या चाहते हैं?

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मनोरंजन कलम का कालजयी कारवां: हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की कालजयी कीर्ति

कलम का कालजयी कारवां: हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की कालजयी कीर्ति

 पेड न्यूज और प्रायोजित सामग्री ने विश्वसनीयता के जिस बुनियादी ढांचे को नष्ट किया है, उसकी भरपाई करना आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हम एक ऐसे सूचना-समाज में जी रहे हैं जहाँ जानकारी का अंबार तो है, पर ज्ञान का अभाव है, और इस भीषण कोलाहल में सत्य की धीमी आवाज अनसुनी रह जाती है।

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मनोरंजन स्वतंत्र मीडिया :लोकतंत्र की सेहत का आईना

स्वतंत्र मीडिया :लोकतंत्र की सेहत का आईना

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 157 वें स्थान पर

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मनोरंजन न्यूज़ रूम में ‘कोड’ का राज: क्या AI छीन लेगा खबरों की रूह?

न्यूज़ रूम में ‘कोड’ का राज: क्या AI छीन लेगा खबरों की रूह?

2026 के चुनावी मौसम में हमने देखा कि तकनीक कैसे एक 'भस्मासुर' बन सकती है। डीपफेक तकनीक ने वह कर दिखाया जो कभी असंभव लगता…

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राजनीति भ्रष्टाचार बनाम विकास: बंगाल के भारी मतदान में छिपे हैं सत्ता परिवर्तन के गहरे संकेत

भ्रष्टाचार बनाम विकास: बंगाल के भारी मतदान में छिपे हैं सत्ता परिवर्तन के गहरे संकेत

महिलाओं के इस रिकॉर्ड मतदान का मतलब है कि उन्होंने किसी एक नैरेटिव को पूरी तरह अपनाया है। अब देखना यह है कि वह 'सुरक्षा'…

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समाज आईसीयू के अमानवीय एवं अनैतिक पक्षों की निगरानी जरूरी

आईसीयू के अमानवीय एवं अनैतिक पक्षों की निगरानी जरूरी

देश में स्वास्थ्य सेवा की वर्तमान स्थिति पर विचार करते समय एक अत्यंत चिंताजनक, मानवीय और संवेदनशील प्रश्न सामने आता है-क्या चिकित्सा अब सेवा न…

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केवल अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है पत्रकारिता की स्वतंत्रता

रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स द्वारा जारी दुनियाभर के देशों की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में भारत जहां 2024 में 2023 के मुकाबले दो पायदान ऊपर चढ़ा, वहीं…

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लेख मनुस्मृति और भारतीय संविधान, भाग – 12 क

मनुस्मृति और भारतीय संविधान, भाग – 12 क

मनु महाराज ने अपने इस महान ग्रंथ में विधि का प्रतिपादन किया । विधि ही कानून व्यवस्था कही जा सकती है और कानून व्यवस्था का…

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