परिचर्चा मीडिया का बदलता स्वरूप

मीडिया का बदलता स्वरूप

-अंशु शरण- तह-दर-तह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मौजूद लोगों की नियति सामने आ रही है, मीडिया ने इस आम चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुये अपनी…

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व्यंग्य किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहां

किसकी आवाज़ बिकाऊ नहीं यहां

-अंशु शरण- 1.  अवसरवाद लोकतन्त्र स्थापना के लिए वो हमेशा से ऐसे लड़ें, कि उखड़े न पाये सामंतवाद की जड़ें, इसलिए तो लोकतंत्र के हर…

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परिचर्चा इस्लाम पर छाए संकट के काले बादल

इस्लाम पर छाए संकट के काले बादल

-तनवीर जाफ़री- पिछले दिनों इस्लाम धर्म का सबसे खुशियों भरा प्रसिद्ध,पवित्र व लोकप्रिय त्यौहार ईद-उल-फ़ितर पूरे विश्व में मनाया गया। परंतु इस बार की ईद…

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टॉप स्टोरी कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचाएगा नटवर का किताबी बम

कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचाएगा नटवर का किताबी बम

-सिद्धार्थ शंकर गौतम- कांग्रेस के पूर्व कद्दावर नेता, पूर्व राजनयिक और पूर्व केंद्रीय मंत्री के. नटवर सिंह अपनी किताब वन लाइफ इज नॉट एनफ को…

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कला-संस्कृति क्या भारत में विधवा को सती करने की प्रथा थी ?

क्या भारत में विधवा को सती करने की प्रथा थी ?

-शिवेश प्रताप- भारत सदा से एक वीरता प्रधान देश रहा है | सिकंदर की सेना के रक्त से झेलम के पानी को लाल करने वाली हिदू…

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लेख हिन्दी को न्याय और भारत को स्वत्व की पहचान मिले

हिन्दी को न्याय और भारत को स्वत्व की पहचान मिले

-नरेश भारतीय- हाल में भारत के गृह मंत्रालय ने सरकार और समाज के बीच दूरी को पाटने की क्षमता रखने वाले सामाजिक माध्यम या कथित…

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व्यंग्य वोट देवता जिन्दाबाद

वोट देवता जिन्दाबाद

-विजय कुमार- दिल्ली में ‘नमो सरकार’ बनने से सामाजिक संस्थाओं का रुख भी बदला है। जिस संस्था ने मुझे कभी श्रोता के रूप में बुलाने…

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धर्म-अध्यात्म स्वस्थ मन, स्वस्थ तन और स्वस्थ समाज का द्योतक है ‘नाग पंचमी’

स्वस्थ मन, स्वस्थ तन और स्वस्थ समाज का द्योतक है ‘नाग पंचमी’

-रमेश पाण्डेय- पर्व, त्यौहार और उत्सव दो तरह के होते हैं। शाश्वत और सामयिक। शाश्वत पर्व वे हैं, जो किसी विषय वस्तु विशेष के कारण…

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कविता दूध पीकर, नाग देव प्रसन्न

दूध पीकर, नाग देव प्रसन्न

-पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’- 1.दूध पीकर, नाग देव प्रसन्न, नाग पंचमी। 2.आओ झूलेँगे, द्वारे नीम सखियां, झूला पड़ा है। 3.बहनें सजीँ, गुड़िया जैसी लगें, गुड़िया…

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विविधा जिन्होंने समाज, साहित्य और राष्ट्र को एक नई दिशा दी

जिन्होंने समाज, साहित्य और राष्ट्र को एक नई दिशा दी

-प्रमोद भार्गव- -संदर्भः मैथिलीशरण गुप्त के जन्मदिन 3 अगस्त के लिए विशेष- मैथिलीशरण गुप्त का राष्ट्रीय प्रदेय- मैथिलिशरण गुप्त का समाज,साहित्य और राष्ट्र के लिए…

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टॉप स्टोरी आरएसएस की अंतर्शक्ति: गोवा का भारत विलय और पुर्तगाली प्रतिरोध  

आरएसएस की अंतर्शक्ति: गोवा का भारत विलय और पुर्तगाली प्रतिरोध  

-प्रवीण गुगनानी- -2 अगस्त:दादरा नागर हवेली के भारत विलय दिवस और गोमान्तक सेना पर विशेष- भारत को जिस स्वरुप और जिन भौगोलिक सीमाओं को वर्तमान में…

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कविता मेरी नानी का घर

मेरी नानी का घर

–बीनू भटनागर- बहुत याद आता है कभी, मुझे मेरी नानी का घर, वो बड़ा सा आंगन, वो चौड़े दालान, वो मिट्टी की जालियां, झरोखे और छज़्जे। लकड़ी के तख्त पर  बैठी नानी, चेहरे की झुर्रियाँ, और आँखों की चमक, किनारी वाली सूती साड़ी, और हाथ से पंखा झलना। नानी की रसोई, लकड़ी चूल्हा और फुंकनी, रसोई में गरम गरम रोटी खाना, वो पीतल के बर्तन , वो काँसे की थाली, उड़द की दाल अदरक वाली, देसी घी हींग, ज़ीरे का छौंक, पोदीने की चटनी हरी मिर्च वाली। खेतों से आई ताज़ी सब्ज़ियां, बहुत स्वादिष्ट होता था वो भोजन। आम के बाग़ और खेती ही खेती।…

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