विविधा जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्हा तेसी…

जाकि रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्हा तेसी…

-आलोक कुमार- हाल के दिनों में स्वरूपानन्द जी जैसे आडंबरी धर्माचार्य जैसे बेतुके और द्वेषपूर्ण बयान दे रहे हैं उसे देख कर लगता है कि…

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राजनीति कान पकाऊ होता मीडिया का ‘मोदी प्लान’!

कान पकाऊ होता मीडिया का ‘मोदी प्लान’!

-तारकेश कुमार ओझा- जिस माहौल में अपना बचपन बीता वहां की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि मोहल्ले में किसी के यहां ब्याह- शादी या…

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कविता हर हाथ तिरंगा हो

हर हाथ तिरंगा हो

-श्यामल सुमन- ना कोई नंगा हो, ना तो भिखमंगा हो। चाहत कि रिश्ता आपसी घर में चंगा हो।। धरती पर आई, लेकर खुशियाली। सूखी मिट्टी…

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राजनीति आरक्षण की वैशाखी पर टिकी राजनीति

आरक्षण की वैशाखी पर टिकी राजनीति

-प्रमोद भार्गव- -संदर्भः महाराष्ट्र में मराठों और मुस्लिमों को आरक्षण- भारत में आरक्षण राजनीतिक दलों के सियासी खेल का दांव बनकर लगातार उभर रहा है।…

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राजनीति सुरजकुंड पाठशाला और नमो की घुट्टी!

सुरजकुंड पाठशाला और नमो की घुट्टी!

-रंजीत रंजन सिंह- भाजपा के नव-निर्वाचित सांसदों को प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को समाप्त हुआ। ऐतिहासिक जीत के बाद हरियाणा…

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राजनीति यह कैसा बिहार प्रेम है?

यह कैसा बिहार प्रेम है?

-फखरे आलम- मैं कभी बड़ा हैरान और परेशान हो जाता हूं! जब बिहार के जनप्रतिनिधियों का व्यवहार देखता हूं। हमारे अपने ही प्रदेश और प्रदेश…

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विविधा कालाधन से पर्दा उठने वाला है

कालाधन से पर्दा उठने वाला है

-प्रमोद भार्गव- चाणक्य ने कहा था, किसी भी देश में न्यूनतम ईमानदार और न्यूनतम ही बेईमान होते है, किंतु जब बेईमानों पर सरकार नकेल कसने…

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आर्थिकी अब वसूली का समय है

अब वसूली का समय है

-आलोक कुमार- कीमतें बढ़ने के पीछे उत्पादन की कमी, मानसून इत्यादि जैसे कारण तो हैं ही। लेकिन महंगाई की असली वजह यह है कि खेती…

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राजनीति ‘अच्छे दिनों’ की शुरुआत आम जनता से या मीसा बंदियों से?

‘अच्छे दिनों’ की शुरुआत आम जनता से या मीसा बंदियों से?

-तनवीर जाफ़री- ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ जैसा लोकलुभावना नारा जनता को देकर सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार अच्छे दिनों की शुरुआत आम जनता…

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महत्वपूर्ण लेख मोदी जी! मेट्रो सिटी नहीं ‘मेधा ग्राम’ बसाइए

मोदी जी! मेट्रो सिटी नहीं ‘मेधा ग्राम’ बसाइए

-राकेश कुमार आर्य- ग्राम अपने आप में एक ऐसी व्यवस्था है जिसके विषय में इसके पूर्णत: आत्मनिर्भर पूर्णत: आत्मानुशासित और पूर्णत: आत्मनियंत्रित रहने की परिकल्पना…

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कविता मैं, शायर नहीं

मैं, शायर नहीं

-रवि कुमार छवि- मैं, शायर नहीं, क्योंकि शायर तो लोगों के साथ रहकर भी, तन्हा रहता है, मैं, उसकी क़लम की स्याही की एक बूंद…

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कविता आ कर लें हम तुम प्यार

आ कर लें हम तुम प्यार

-श्यामल सुमन- है प्रेम सृजन संसार, आ कर लें हम तुम प्यार। ना इन्सानी बाजार, आ कर लें हम तुम प्यार।। रिश्ते जीवन की मजबूरी,…

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