राजनीति ‘तापस पालों ‘ की कोई मजबूरियां भी तो समझे…!!

‘तापस पालों ‘ की कोई मजबूरियां भी तो समझे…!!

तारकेश कुमार ओझा भारतीय राजनीति में ज्यादातर दिल्ली व हिंदी पट्टी के राजनेता ही छाए रहते हैं। दूसरे प्रदेशों के राजनेताओं की चर्चा कम ही…

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राजनीति उखड़े दरबार का प्रलाप –डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

उखड़े दरबार का प्रलाप –डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

भारत की जनता ने लोक सभा के चुनावों में जो जनादेश दिया है उससे बुद्धिजीवियों के उस समुदाय  में खलबली  मची हुई है जो अब…

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कविता कण कण मे वही

कण कण मे वही

आस्था नहीं तो, प्रभु कहीं भी हैं नहीं, आस्था हो तो, कण कण मे है वही! पत्थर को गढ़कर, एक शिल्पकार ने कभी, तीन मूर्तियाँ…

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राजनीति अमेरिका के निशाने पर मोदी और भाजपा

अमेरिका के निशाने पर मोदी और भाजपा

प्रवीण दुबे अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए द्वारा भारतीय जनता पार्टी की जासूसी करने संबंधी खुलासे के बाद एक बार पुन: यह सिद्ध हो गया है…

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राजनीति आप क्यों हो रही है हताश

आप क्यों हो रही है हताश

रवि श्रीवास्तव पूरे देश में अपनी पहचान बना चुकी आप (आम आदमी पार्टी) अब हताशा के बादल में घिरती जा रही है। बड़े-बड़े वादों के…

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विविधा बुलेट ट्रेन से ज़रूरी हैं प्लेटफार्म-निर्मल रानी

बुलेट ट्रेन से ज़रूरी हैं प्लेटफार्म-निर्मल रानी

भारत की दस प्रतिशत से भी कम संख्या के संपन्न लोगों को सुविधा पहुंचाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार…

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राजनीति पहले लैपटॉप, अब लालीपॉप

पहले लैपटॉप, अब लालीपॉप

-रवि श्रीवास्तव- चुनावी बिगुल बजते ही सभी राजनीतिक दल ज़नता के लुभाने के लिए अपना एक घोषणा पत्र करते हैं। जिसमें वे लोगों से वादे…

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विविधा बीजिंग में पंचशील समझौते की वर्षगांठ, या तेरहवीं

बीजिंग में पंचशील समझौते की वर्षगांठ, या तेरहवीं

-प्रवीण गुगनानी- भारत चीन सम्बंधों के मध्य की साठ वर्षीय महत्वपूर्ण कड़ी “पंचशील” की षष्ठी पूर्ति के अवसर पर चीन में आयोजित कार्यक्रम में जबकि…

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विविधा साईं पर संग्राम

साईं पर संग्राम

-अरविंद जयतिलक- भगवान कौन है? उसका स्वरूप और विशेषता क्या है? भगवान होने की शर्तें क्या है? किसी के भगवान होने का सर्टिफिकेट कौन जारी…

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विविधा असाढ़ में सूखा : का बरखा जब कृषि सुखानी

असाढ़ में सूखा : का बरखा जब कृषि सुखानी

-संजय स्वदेश- ——————————————– यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब मानसून ने दगाबाजी की हो। आजाद भारत में दर्जनों बार सूखा पड़ा। लेकिन इससे न…

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कविता गरम हलुवा

गरम हलुवा

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव- लगा रहे अविरल परिकम्मा, हलुवा मुझे खिला दे अम्मा| राम शरण बोले ज्वर उन पर, पता नहीं क्यों चढ़ा निकम्मा| बोले रात एक…

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विविधा ‘पहले शौचालय’ का सोच बनाम जमीनी हकीकत

‘पहले शौचालय’ का सोच बनाम जमीनी हकीकत

-मिलन सिन्हा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित देश के कई अन्य प्रभावशाली नेता समय समय पर किसी न किसी मंच से देश में ‘पहले शौचालय’ की…

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