महत्वपूर्ण लेख कम मानसून और मौसम वैज्ञानिकों की अटकलें

कम मानसून और मौसम वैज्ञानिकों की अटकलें

-प्रमोद भार्गव- प्रत्येक मई-जून माह में मानसून आ जाने की अटकलों का दौर शुरू हो जाता है। यदि औसत मानसून आये तो देश में हरियाली…

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चुनाव लोकसभा चुनाव 2014: कारगिल बनाम नक्सल शहीद

लोकसभा चुनाव 2014: कारगिल बनाम नक्सल शहीद

-तनवीर जाफ़री- लोकसभा 2014 के आम चुनाव अपने अंतिम दौर से गुज़र रहे हैं। इस बार के चुनाव अभियान में विभिन्न राजनैतिक दलों व उनके…

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आर्थिकी कृषि निर्यात में फिसड्डी साबित हो रहा भारत

कृषि निर्यात में फिसड्डी साबित हो रहा भारत

-रमेश पाण्डेय- मई की तपती गरमी से लेकर अगस्त की सिंझाती सांझ तक पूरे देश में क्या राजा क्या रंक सबका मुंह मीठा करवाने के…

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विविधा हिंदू समाज और राष्ट्र का सशक्तीकरण चाहते थे डॉ. अम्बेडकर

हिंदू समाज और राष्ट्र का सशक्तीकरण चाहते थे डॉ. अम्बेडकर

-आर.एल. फ्रांसिस- वर्तमान समय में राजनीतिक सुविधा के हिसाब से हर कोई डॉ. अम्बेडकर को अपने अपने तरीके से परिभाषित करने में लगा हुआ है,…

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राजनीति पंथ निरपेक्षता को दफ़न कर दिया अब्दुल्ला परिवार ने

पंथ निरपेक्षता को दफ़न कर दिया अब्दुल्ला परिवार ने

-डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री- जम्मू कश्मीर में शेख़ अब्दुल्ला परिवार आजकल पंथ निरपेक्षता को लेकर आग उगल रहा है। महरुम शेख़ अब्दुल्ला के सुपुत्र और…

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चुनाव मोदी: चुनावी मैदान का हीरो!

मोदी: चुनावी मैदान का हीरो!

-फखरे आलम- 16 मई का परिणाम चाहे जो भी हो, परिणाम चाहे जिसके भी पक्ष में क्यों न हो! आम चुनाव के परिणाम के पश्चात्…

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मीडिया प्रेस की स्वतंत्रता पर गहराता संकट

प्रेस की स्वतंत्रता पर गहराता संकट

-रमेश पाण्डेय- भारत में अक्सर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा होती रहती है। प्रत्येक वर्ष 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता…

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चुनाव चाणक्य की दृष्टि और राजधर्म निभाने की भारतीय परंपरा

चाणक्य की दृष्टि और राजधर्म निभाने की भारतीय परंपरा

-कन्हैया झा- पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पर स्याही फेंकना, मुंह पर थप्पड़ मारने आदि जैसी घटनाएं भी हुई. जिस पर…

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विविधा ‘गोरा’ उपन्यास में पराधीन भारत की राष्ट्रीय चेतना का स्वरूप

‘गोरा’ उपन्यास में पराधीन भारत की राष्ट्रीय चेतना का स्वरूप

-कुमार कृष्णन- -गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर विशेष- रवीन्द्र नाथ ठाकुर का उपन्यास ‘गोरा’, अंग्रेजी शासन में भारत की राष्ट्रीय चेतना का औपन्यासिक महाकाव्य…

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धर्म-अध्यात्म शक्ति संगठन और समरसता के प्रतीक परशुराम जी

शक्ति संगठन और समरसता के प्रतीक परशुराम जी

-रमेश शर्मा- भारतीय वाङमय में सबसे दीर्घजीवी चरित्र परशुराम जी का है। सतयुग के समापन से कलयुग के प्रारंभ तक उनका उल्लेख मिलता है। भारतीय…

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कविता दमन की हवा से ही इक दिन…

दमन की हवा से ही इक दिन…

-जावेद उस्मानी- दमन की हवा से ही इक दिन, दहकेंगे श्रम के शोले! हक़ के अंगार से, दफनाये जायेंगे शोषण के गोले! अब भी सुन…

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राजनीति इस भ्रष्टाचार के लिए किसे कोसेगी भाजपा

इस भ्रष्टाचार के लिए किसे कोसेगी भाजपा

-डॉ. मयंक चतुर्वेदी- भारतीय जनता पार्टी के बारे में कहा जाता है कि वह वैचारिक प्रतिबद्धता से पूर्ण सुचिता के संकल्प को लेकर राजनीतिक क्षेत्र…

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