विविधा मुस्लिम घुसपैठियों पर चुप्पी क्यों?

मुस्लिम घुसपैठियों पर चुप्पी क्यों?

-प्रवीण दुबे-    घुसपैठ विशेषकर मुस्लिम घुसपैठ को लेकर हमारी केन्द्र सरकार अपने मुंह पर मुसीका क्यों लगा लेती है? कश्मीर में पाकिस्तान से और…

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कविता झारखंड के झरिया का जर्जर विकास

झारखंड के झरिया का जर्जर विकास

-ऋतु राय-    झारखण्ड के झरिया का विकास एक ऐसा विकास जिसके बारे में जानकार लगा की अब लोग बड़े निष्ठुर हो गए और ऐसा…

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विविधा संकट में ग्रामीण शिक्षा

संकट में ग्रामीण शिक्षा

-अभिषेक रंजन-    खबरिया चैनलों, अखबारों के माध्यम से आजकल हर रोज कोई न कोई नया सर्वे होने की खबर मिलती रहती है. लेकिन दुखद…

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राजनीति चाय पर चर्चा के जरिए मोदी पहुंचेंगे गली-मुहल्ले

चाय पर चर्चा के जरिए मोदी पहुंचेंगे गली-मुहल्ले

-एम. अफसर खां सागर-    चाय की चुस्की और चुनावी चकल्लस का चोली दावन का साथ रहा है। अल सुबह चायखानों पर सियासी गुफ्तगु का…

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राजनीति जनता को ज्यादा दिनों तक बरगलाया नहीं जा सकता

जनता को ज्यादा दिनों तक बरगलाया नहीं जा सकता

-आलोक कुमार-    दिल्ली का विधानसभा चुनाव इस बार पूरी तरह से चौंकाने वाले परिणामों से भरा रहा। यहां दो परम्परागत राजनैतिक दलों को सबसे…

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राजनीति समाजवाद पर आधारित लोकतांत्रिक मूल्यों का कैसा स्वरूप है सुशासनी बिहार ?

समाजवाद पर आधारित लोकतांत्रिक मूल्यों का कैसा स्वरूप है सुशासनी बिहार ?

-आलोक कुमार-   सुशासन बाबु (नीतीश कुमार) इसके लिए सदैव प्रयासरत रहते हैं कि देश और बिहार की जनता उन्हें सिद्धांतवादी स्वीकार करे। इसलिए वे बीच-बीच…

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राजनीति आखिर क्या है अराजकता का मापदंड?

आखिर क्या है अराजकता का मापदंड?

-तनवीर जाफरी-   दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गत् 20-21 जनवरी को अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों तथा आम आदमी पार्टी के विधायकों के साथ नई दिल्ली…

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राजनीति के गलियारे में

राजनीति के गलियारे में, तीन व्यक्ति चर्चा में हैं ‘पप्पू’ तो हम सबका ही, राज दुलारा है, उसके गाल का डिंपल देखो, कितना प्यारा प्यारा…

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राजनीति गणतंत्र पर सत्ता परिवर्तन हेतु अश्वमेध यज्ञ की तैयारी

गणतंत्र पर सत्ता परिवर्तन हेतु अश्वमेध यज्ञ की तैयारी

-राकेश कुमार आर्य-   कांग्रेस का कर्णधार (पीएम पद का प्रत्याशी) आगामी चुनावों में कौन होगा? इस पर पार्टी मोदी के सामने अपने युवराज को…

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कविता फिर आ गया गणतंत्र दिवस

फिर आ गया गणतंत्र दिवस

फिर आ गया गणतंत्र दिवस दिखलाने, बतलाने सुनने-सुनाने हालात, समस्यायें उपलब्धियां गिनाने। देखो… सुनो… पढ़ो… जांचो… मगर कुछ कहना मत। सच! क्योंकि सच कह दिया…

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कविता रोते कितने लोग यहाँ

रोते कितने लोग यहाँ

इस माटी का कण कण पावन। नदियाँ पर्वत लगे सुहावन। मिहनत भी करते हैं प्रायः सब करते हैं योग यहाँ। नीति गलत दिल्ली की होती…

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टॉप स्टोरी 65वें गणतंत्र पर आत्मावलोकन

65वें गणतंत्र पर आत्मावलोकन

-विनोद बंसल-    वर्ष 2014 में भारत अपने गणतंत्र की 65वीं वर्षगांठ मना रहा है। अंग्रेजों की गुलामी से स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात भारत ने आज…

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