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महेश भट्टजी ! तो हो जाए शशि-सुनंदा पर भी एक फिल्म!

-तारकेश कुमार ओझा-   सचमुच जीवन विरोधाभासों से भरता जा रहा है। व्यवहार में जो बातें असंभव प्रतीत होती है, दुनिया में वही होता दिखाई…

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जरूर पढ़ें गणतंत्र की मूल भावना को कब समझेंगे हम?

गणतंत्र की मूल भावना को कब समझेंगे हम?

गणतंत्र दिवस पर विशेष -योगेश कुमार गोयल-   हर साल की भांति एक और गणतंत्र दिवस हमारी चौखट पर दस्तक दे चुका है। इसमें कोई…

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राजनीति दंगा पीड़ितों के नाम पर मुआवजे की लूट

दंगा पीड़ितों के नाम पर मुआवजे की लूट

-आर.के. गुप्ता-   मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद प्रदेश सरकार द्वारा एक धर्म विशेष के लोगों (मुस्लिमों) को एकतरफा मुआवजा देने…

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राजनीति मकसद में पड़ गईं दरारें

मकसद में पड़ गईं दरारें

– आलोक कुमार-    दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद से आम आदमी पार्टी के अति-उत्साहित नेताओं के सम्बोधन व बयानों को सुनने के बाद ऐसा…

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राजनीति असलियत “आप” की

असलियत “आप” की

-आलोक कुमार-   ‘कांग्रेस-भाजपा से समर्थन न लेंगे, न देंगे’ का ताल ठोंककर नेतागिरी करने आए और फिर कांग्रेस की गोद में जा बैठे। राजनीति…

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विविधा ‘बिग बॉस’ की भूमिका में बिहार के नौकरशाह

‘बिग बॉस’ की भूमिका में बिहार के नौकरशाह

-आलोक कुमार-    पिछले आठ सालों के सुशासनी शासन के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री ने कई बार नौकरशाहों को गांवों की तरफ रुख करने के…

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चुनौती से बचकर नहीं भिड़कर चलने वाला सम्राटः पृथ्वीराज चौहान

-राकेश कुमार आर्य-    पृथ्वीराज  चौहान से पराजित होकर मोहम्मद गोरी रह-रहकर अपने दुर्भाग्य को कोस रहा था। गोरी स्वयं को बहुत ही अपमानित अनुभव…

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सनसनी का नया एंकर

-नीरज वर्मा-   21 जनवरी को “आम आदमी पार्टी” के ख़ास आदमी, अरविन्द केजरीवाल ने अपना धरना ख़त्म कर दिया! धरने की वज़ह थी- पुलिस के “टेढ़े” पुलिसकर्मियों को…

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व्यंग्य चमचा महफिल का ‘वीकेंड’ सत्र

चमचा महफिल का ‘वीकेंड’ सत्र

-विजय कुमार-   दिल्ली में केजरी ‘आपा’ के नेतृत्व में ‘झाड़ू वाले हाथ’ की सरकार बनी तो ‘मोदी रोको’ अभियान में लगे लोगों की बांछें…

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राजनीति केजरीवाल का धरना: तर्क नहीं, सत्य की कसौटी पर

केजरीवाल का धरना: तर्क नहीं, सत्य की कसौटी पर

-निर्मल रानी-   देश की राजनीति में नित नए आयाम जोड़ऩे में लगी आम आदमी पार्टी आए दिन कोई न कोई नए ‘कीर्तिमान’ स्थापित करती…

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राजनीति सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड और बिहार की मीडिया

सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड और बिहार की मीडिया

-आलोक कुमार-    हाल में  बिहार के सारे अखबारों ने “आठ सालों के सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड” को जिस तरीके से परोसा वो अपने आप ही सुशासन के मीडिया-मैनेजमेंट की…

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राजनीति समग्र विकास का दावा छलावा नहीं तो और क्या है ?

समग्र विकास का दावा छलावा नहीं तो और क्या है ?

-आलोक कुमार-   सामाजिक समीकरणों से सत्ता को साधने की कोशिश कोई स्थायी नतीजे नहीं दे सकती, बल्कि एक ऐसी राजनीतिक दिशा का निर्माण करती…

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