महेश भट्टजी ! तो हो जाए शशि-सुनंदा पर भी एक फिल्म!
Updated: January 24, 2014
-तारकेश कुमार ओझा- सचमुच जीवन विरोधाभासों से भरता जा रहा है। व्यवहार में जो बातें असंभव प्रतीत होती है, दुनिया में वही होता दिखाई…
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गणतंत्र की मूल भावना को कब समझेंगे हम?
Updated: January 24, 2014
गणतंत्र दिवस पर विशेष -योगेश कुमार गोयल- हर साल की भांति एक और गणतंत्र दिवस हमारी चौखट पर दस्तक दे चुका है। इसमें कोई…
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दंगा पीड़ितों के नाम पर मुआवजे की लूट
Updated: January 24, 2014
-आर.के. गुप्ता- मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद प्रदेश सरकार द्वारा एक धर्म विशेष के लोगों (मुस्लिमों) को एकतरफा मुआवजा देने…
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मकसद में पड़ गईं दरारें
Updated: January 23, 2014
– आलोक कुमार- दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद से आम आदमी पार्टी के अति-उत्साहित नेताओं के सम्बोधन व बयानों को सुनने के बाद ऐसा…
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असलियत “आप” की
Updated: January 23, 2014
-आलोक कुमार- ‘कांग्रेस-भाजपा से समर्थन न लेंगे, न देंगे’ का ताल ठोंककर नेतागिरी करने आए और फिर कांग्रेस की गोद में जा बैठे। राजनीति…
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‘बिग बॉस’ की भूमिका में बिहार के नौकरशाह
Updated: January 23, 2014
-आलोक कुमार- पिछले आठ सालों के सुशासनी शासन के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री ने कई बार नौकरशाहों को गांवों की तरफ रुख करने के…
Read moreचुनौती से बचकर नहीं भिड़कर चलने वाला सम्राटः पृथ्वीराज चौहान
Updated: January 23, 2014
-राकेश कुमार आर्य- पृथ्वीराज चौहान से पराजित होकर मोहम्मद गोरी रह-रहकर अपने दुर्भाग्य को कोस रहा था। गोरी स्वयं को बहुत ही अपमानित अनुभव…
Read moreसनसनी का नया एंकर
Updated: January 22, 2014
-नीरज वर्मा- 21 जनवरी को “आम आदमी पार्टी” के ख़ास आदमी, अरविन्द केजरीवाल ने अपना धरना ख़त्म कर दिया! धरने की वज़ह थी- पुलिस के “टेढ़े” पुलिसकर्मियों को…
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चमचा महफिल का ‘वीकेंड’ सत्र
Updated: January 22, 2014
-विजय कुमार- दिल्ली में केजरी ‘आपा’ के नेतृत्व में ‘झाड़ू वाले हाथ’ की सरकार बनी तो ‘मोदी रोको’ अभियान में लगे लोगों की बांछें…
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केजरीवाल का धरना: तर्क नहीं, सत्य की कसौटी पर
Updated: January 22, 2014
-निर्मल रानी- देश की राजनीति में नित नए आयाम जोड़ऩे में लगी आम आदमी पार्टी आए दिन कोई न कोई नए ‘कीर्तिमान’ स्थापित करती…
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सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड और बिहार की मीडिया
Updated: January 22, 2014
-आलोक कुमार- हाल में बिहार के सारे अखबारों ने “आठ सालों के सुशासनी रिपोर्ट-कार्ड” को जिस तरीके से परोसा वो अपने आप ही सुशासन के मीडिया-मैनेजमेंट की…
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समग्र विकास का दावा छलावा नहीं तो और क्या है ?
Updated: January 22, 2014
-आलोक कुमार- सामाजिक समीकरणों से सत्ता को साधने की कोशिश कोई स्थायी नतीजे नहीं दे सकती, बल्कि एक ऐसी राजनीतिक दिशा का निर्माण करती…
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